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26. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_6.18–6.29

Total questions: 45

Worksheet time: 1hrs 15mins

Name
Class
Date
1.

कृपया यहाँ पर अपना नाम लिखें ।

4 lines
2.

कृपया यहाँ पर अपनी आयु लिखें ।

4 lines
3.

कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल नं0 लिखें ।

4 lines
4.

कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।

4 lines
5.

एक पूर्णयोगी का किसी भी भौतिक इच्छा से विचलित न होने का मूल कारण क्या है ?

a)

उसके द्वारा उच्चतर रसों का रसास्वादन किया जाना ।

b)

उसके मानसिक कार्यकलापों का अनुशासित होना ।

c)

उसका अष्टांगयोग के प्रति समर्पण एवं निपुणता ।

d)

उसका आध्यात्म के प्रति प्रतिबद्धता ।

6.

अम्बरीश महाराज का जन्म निम्न में से किस वंश में हुआ था ?

a)

रघुवंश

b)

यदुवंश

c)

वृष्णिवंश

d)

कुरुवंश

7.

किसी भी योग पद्धति का प्रथम पड़ाव क्या है ?

a)

मन का निग्रह

b)

इन्द्रियों का निग्रह

c)

दिव्य कार्यकलापों का प्रारम्भ

d)

आत्म-साक्षात्कार

8.

महाराज अम्बरीश के उदाहरण से हमें श्रीभगवान् के चरणकमलों में समर्पण की विधि का ज्ञान होता है । अतः आपसे अनुरोध है कि इस विधि के वास्तविक क्रम को पहचानने में मेरी सहायता करें ।

a)

मन – वाणी – हस्त – कर्ण – आँखें – शरीर – घ्राणेन्द्रि – जिह्वा – पाँव – मस्तक – इच्छाएँ ।

b)

मन – हस्त – वाणी – कर्ण – आँखें – घ्राणेन्द्रि – शरीर – जिह्वा – पाँव – मस्तक – इच्छाएँ ।

c)

मन – वाणी – हस्त – आँखें – कर्ण – शरीर – घ्राणेन्द्रि – जिह्वा – मस्तक – पाँव – इच्छाएँ ।

d)

मन – वाणी – हस्त – कर्ण – घ्राणेन्द्रि – जिह्वा – आँखें – शरीर – पाँव – मस्तक – इच्छाएँ ।

9.

मन को श्रीभगवान् के चरणकमलों में स्थिर करने की क्या विधि है ?

a)

श्रीभगवान् का निरंतर स्मरण

b)

श्रीभगवान् का नित्य दर्शन

c)

श्रीभगवान् का नित्य पूजन

d)

श्रीभगवान् का नित्य समरण

10.

योगी के दिव्यकार्य कब तक व्यवहारिक नहीं हो सकते हैं ?

a)

जब तक उसका मन श्रीभगवान् के चरणकमलों में स्थिर नहीं हो जाता है ।

b)

जब तक उसका मन उसकी बुद्धि के अधीन नहीं हो जाता है ।

c)

जब तक उसका मन भौतिक इन्द्रियों के सञ्चालन में निपुण नहीं हो जाता है ।

d)

जब तक उसका मन श्रीभगवान् के चरणकमलों में स्थिर होने का प्रयत्न नहीं करता है ।

11.

निर्विशेषवादियों के लिए दिव्य अवस्था अनिर्वचनीय क्यों होती है ?

a)

क्योंकि उन्हें दिव्य अवस्था (योग में स्थिरता) के विषय में कोई ज्ञान नहीं होता है ।

b)

क्योंकि वे ज्ञान द्वारा मन तथा इन्द्रियों को कृत्रिम दमन द्वारा वश में करते हैं ।

c)

क्योंकि उनके अनुसार जीव का ब्रह्मज्योति में तदात्म्य ही जीवन की अंतिम अभिव्यक्ति होती है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

12.

अर्चन किसे कहते हैं ?

a)

भगवद्भक्ति में किये जाने वाले दिव्यकार्यों को अर्चन कहते हैं ।

b)

किसी विशेष प्रयोजन हेतु किये जाने वाले कार्यों को अर्चन कहते हैं ।

c)

कर्मकाण्ड में किये जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को अर्चन कहते हैं ।

d)

भगवद्भक्ति में किये जाने वाले कर्मकाण्डों को अर्चन कहते हैं ।

13.

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार युक्तः किसे कहते हैं ?

a)

मन तथा इन्द्रियों द्वारा किये जाने वाले दिव्यकार्य ।

b)

मन तथा इन्द्रियों द्वारा किये जाने वाले दिव्यकार्यों से प्राप्त दिव्य सफलता ।

c)

मन तथा इन्द्रियों के दिव्यकार्यों द्वारा प्राप्त की जाने वाली दिव्य सफलता की उचित विधि ।

d)

यह सभी कथन सही हैं ।

14.

"वायुरहित स्थान में दीपक हिलता-डुलता नहीं है ।" इस कथन से आपका क्या अभिप्राय है ?

a)

भौतिक आसक्तियों व आकर्षणों से विरक्त मन अविचलित भाव से भगवान् श्रीकृष्ण के चिंतन में स्थिर रहता है ।

b)

ऐसा निम्मजन स्थान जहाँ गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी कार्य नहीं करती है ।

c)

ऐसा निम्मजन स्थान जहाँ पर न तो प्रकृति और न ही जीवन की कोई संभावना होती है ।

d)

ऐसा निम्मजन स्थान जहाँ पर केवल निम्न योनियों के जीवन और विकास की ही संभावना होती है ।

15.

यदि योगी को अपने द्वारा किए जाने वाले योगाभ्यास की गुणवत्ता को जाँचना हो, तो निम्न में से कौन सा कथन उसकी गुणवत्ता की पुष्टि करता है ?

a)

यदि योगी योगाभ्यास के फलस्वरूप भौतिक धारणाओं से क्रमशः विरक्त हो रहा है तो वह योग में प्रगति कर रहा है ।

b)

यदि योगी का शरीर स्वस्थ है और उसका मन योगाभ्यास के फलस्वरूप भौतिक उपलब्धियों के लिए व्याकुल है तो वह योग में प्रगति कर रहा है ।

c)

यदि योगी का मन योगाभ्यास के दौरान निरंतर स्वर्गलोकों के भोगों का चिंतन करता रहता है, तो वह निश्चित ही योग में प्रगति कर रहा है ।

d)

यदि योगी के मन को योगाभ्यास के दौरान निर्विशेष ब्रह्म में तादात्म्य की अनुभूति हो रही हो, तो योगी निश्चित ही योग में अवन्नति को प्राप्त हो रहा है ।

16.

योगसूत्र नामक ग्रंथ की रचना निम्न में से किसने की है ?

a)

महर्षि पतञ्जलि

b)

महर्षि जमदाग्नि

c)

महर्षि वाल्मीकि

d)

महर्षि वेदव्यास

17.

पतंजलि पद्धति में जिस दिव्य आनंद को स्वीकार किया गया है । वह दिव्य आनंद क्या है ? कृपया स्पष्ट करें ।

a)

भगवान् श्रीकृष्ण की दिव्य प्रेमा-भक्तिमयी सेवा के फलस्वरूप भगवद्कृपारूपी आनंद ।

b)

निर्विशेष ब्रह्म का सान्निध्य रूपी आनंद ।

c)

भगवान् श्रीकृष्ण की दिव्य सृष्टि के भोग से प्राप्त होने वाला आनंद ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

18.

अद्वैतवादी दिव्य आनंद को क्यों स्वीकार नहीं करते हैं ?

a)

कहीं उनके अद्वैतवाद में कोई बाधा न उत्पन्न हो जाए ।

b)

कहीं उन्हें ज्ञान तथा ज्ञाता के वास्तविक भेद का बोध न हो जाए ।

c)

कहीं निर्विशेष ब्रह्म में उनके तादात्म्य में कोई अवरोध न उत्पन्न हो जाए ।

d)

यह सभी कथन वास्तविक सत्य हैं ।

19.

वास्तव में चिति शक्ति क्या है ?

a)

अंतरंगा शक्ति

b)

बहिरंगा शक्ति

c)

अह्लादिनी शक्ति

d)

अह्लादिनी शक्ति

20.

वास्तव में कैवल्यम् किसे कहते हैं ?

a)

अद्वैतवादियों के अनुसार परब्रह्म से तादात्म्य कैवल्यम् कहलाता है ।

b)

महर्षि पतंजलि के अनुसार कैवल्यम् वास्तव में अंतरंगा शक्ति है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी स्वाभाविक स्थिति से अवगत होता है ।

c)

भगवान् चैतन्य के कथनानुसार कैवल्यम् चेतोदर्पणमार्जनम् अर्थात् मन रूपी मलिन दर्पण का मार्जन है ।

d)

यह सभी कथन कैवल्यम् कहलाते हैं ।

21.

जीवात्मा का वास्तविक जीवन कब शुरू होता है ?

a)

मोक्ष के उपरान्त आध्यात्मिक कार्यकलापों की या भगवद्भक्ति की अभिव्यक्ति ही जीवात्मा का वास्तविक जीवन है ।

b)

मोक्ष के उपरान्त एक भौतिक शरीर से दूसरे भौतिक शरीर में देहांतरण रूपी यात्रा ही जीवात्मा का वास्तविक जीवन है ।

c)

मोक्ष के उपरांत निर्विशेष ब्रह्म में तादात्म्य रूपी निष्क्रिय अवस्था ही जीवात्मा का वास्तविक जीवन है ।

d)

यह सभी कथन जीवात्मा के वास्तविक जीवन की पुष्टि करते हैं ।

22.

निम्न लिखित कथनों में से कौन सा कथन कैवल्यम् या मोक्ष की पुष्टि नहीं करता है ?

a)

भवमहादावाग्निनिर्वापणम्

b)

स्वरूपेण व्यवस्थितिः

c)

आनंदमयोऽभ्यासात्

d)

चेतोदर्पणमार्जनम्

23.

भौतिक दूषण से मुक्ति का अभिप्राय जीवात्मा की मूल दिव्य स्थिति का विनाश है । निम्न में से ऐसा किसका मत है ?

a)

ज्ञानी

b)

योगी

c)

भक्त

d)

कर्मी

24.

योग के परमलक्ष्य अर्थात् चितिशक्ति को प्राप्त करने की सरलतम् विधि क्या है ?

a)

हठयोग

b)

ज्ञानयोग

c)

ध्यानयोग

d)

भक्तियोग

25.

सम्प्रज्ञात समाधि इनमें से किसे प्राप्त होती है ?

a)

ज्ञानी

b)

योगी

c)

भक्त

d)

कर्मी

26.

असम्प्रज्ञात समाधि इनमें से किसे प्राप्त होती है ?

a)

ज्ञानी

b)

योगी

c)

भक्त

d)

कर्मी

27.

निम्नलिखित में से कौन सा योगी असफल माना जाता है ?

a)

जो योगी मैथुन तथा मादकद्रव्य सेवन में अनुरक्त रहता है ।

b)

जो योगी केवल योग की सिद्धियों के प्रति आकृष्ट रहता है ।

c)

जो योगी योग की आनुषंगिक वस्तु के प्रति आकृष्ट रहता है ।

d)

यह सभी प्रकार की योगी असफल माने जाते हैं ।

28.

हठयोग, ध्यानयोग तथा ज्ञानयोग का अभ्यास करते हुए अनेक अवरोध आ सकते हैं । किंतु कर्मयोग या भक्तियोग के पालन में कोई समस्या सामने नहीं आती है । ऐसा क्यों ? स्पष्ट करें ।

a)

क्योंकि योग की इन सभी पद्धतियों में मन तथा इंद्रियों का निग्रह बिना उनके शुद्धिकरण के किया जाता है । जो कि वास्तव में उनका दमन होता है ।

b)

क्योंकि योग की इन सभी पद्धतियों में योगी समय से पूर्व ही अपने नियत कर्मों का त्याग कर देते हैं ।

c)

क्योंकि योग कि इन सभी पद्धतियों में अधिकाँश योगी योग की सिद्धियों के अभिलाषी होते हैं ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

29.

"वह घाटे के सौदे का सर्वोत्तम उपयोग करके जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओं को स्वीकार करता है ।" इस कथन में 'घाटे के सौदे' से आपका क्या अभिप्राय है ?

a)

भोग की इच्छाओं के कारण भौतिक देह की प्राप्ति ।

b)

कृष्णभावनामृत को अंगीकार करने के बजाए अष्टाँगयोग को स्वीकार करना ।

c)

कर्मयोग को स्वीकार करने के बजाए ज्ञानयोग को अपनाना ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

30.

निम्नलिखित कथनों में से उस कथन को चुने जोकि योगाभ्यास में रत योगी के संकल्प को प्रस्तुत करता है ।

a)

योग पद्धति के विधि-विधानों का योग्य गुरु के निर्देशन में यथावत् अनुपालन करना ।

b)

योग पद्धति के विधि-विधानों का योग्य गुरु के निर्देशन में स्वेच्छानुसार से अनुपालन करना ।

c)

योग पद्धति के विधि-विधानों का योग्य गुरु के निर्देशन में समयानुसार से अनुपालन करना ।

d)

योग पद्धति के विधि-विधानों का योग्य गुरु के निर्देशन में मानसिक क्रियाओं के आधार पर अनुपालन करना ।

31.

"मनोधर्म से उत्पन्न समस्त इच्छाओं को निरपवाद रुप से त्याग दें ।" इस कथन से आप क्या समझते हैं ? कृपया स्पष्ट करें ।

a)

यह कि व्यक्ति को अपनी किसी भी इच्छा को अभूतपूर्व या अद्वितीय नहीं समझते हुए, अपनी संकल्प शक्ति के द्वारा उसका तुरंत त्याग कर देना चाहिए ।

b)

यह कि व्यक्ति को अपनी किसी भी इच्छा को पूर्ण करने के उपरांत ही अपनी संकल्प शक्ति के द्वारा उसका परित्याग कर देना चाहिए ।

c)

यह कि व्यक्ति को अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपवाद न बनते हुए, उन्हें तुरंत प्रभाव से त्याग देना चाहिए ।

d)

यह कि व्यक्ति को योग्य मार्गदर्शन में अपनी इच्छाओं का सही-सही आंकलन करके, कभी न पूरी होने वाली इच्छाओं का तुरंत प्रभाव से परित्याग कर देना चाहिए ।

32.

योगी को योगाभ्यास के लिए अपनी श्रद्धा को सुदृढ़ करने हेतु निम्न में से किस सूत्र का सहारा लेना चाहिए ?

a)

अंत में उसकी सफलता निश्चित है ।

b)

केवल वही सफल होगा अन्य नहीं ।

c)

वह सभी को सफल होकर दिखाएगा ।

d)

भगवान् को उसे सफल बनाना ही होगा ।

33.

यदि योगी को निरंतर योगाभ्यास के बावजूद भी सफलता न मिल रही हो तो उसे निम्नलिखित में से क्या नहीं होना चाहिए ?

a)

उसे निरुत्साहित नहीं होना चाहिए ।

b)

उसे दृढ़ संकल्पित नहीं होना चाहिए ।

c)

उसे धैर्यवान् नहीं होना चाहिए ।

d)

उसे आत्मसंयमी नहीं होना चाहिए ।

34.

श्रील रूप गोस्वामी जी ने उपदेशामृत-3 में छः सिद्धांतों का वर्णन निम्न में से किस योग पद्धति के लिए किया है ?

a)

भक्तियोग

b)

ध्यानयोग

c)

ज्ञानयोग

d)

इन सभी योग पद्धतियों के लिए ।

35.

गौरैया के उदाहरण से हमें क्या शिक्षा प्राप्त होती है ?

a)

यह कि हमें योग में सदैव संकल्पित रहना चाहिए ।

b)

यह कि हमें योग में सदैव उत्साहित रहना चाहिए ।

c)

यह कि हमें योग में सदैव धैर्यवान् रहना चाहिए ।

d)

यह कि हमें योग में सदैव व्यावहारिक रहना चाहिए ।

36.

समाधि में स्थित होने के लिए योगी को निम्न में से सबसे अधिक किस की आवश्यकता होती है ?

a)

व्यवसायात्मिका बुद्धि

b)

संयमित मन

c)

संयमित इंद्रियाँ

d)

संयमित काम

37.

निम्न में से देहात्मबुद्धि को शून्य करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका किसकी होती है ?

a)

व्यवसायात्मिका बुद्धि

b)

संयमित मन

c)

संयमित इंद्रियाँ

d)

शुद्ध आत्मा

38.

जो योगी अपने मन तथा इंद्रियों को अपने वश में रखता है वह क्या कहलाता है ?

a)

गोस्वामी

b)

गोदास

c)

हृषीकेश

d)

इंद्रदेव

39.

"गोस्वामी इन्द्रियसुख के मानक से भिज्ञ होता है ।" कृपया इस कथन को समझने में मेरी सहायता करें ।

a)

अर्थात् गोस्वामी जानता है कि इन्द्रियों का वास्तविक सुख भगवान् श्रीकृष्ण की दिव्य प्रेममयी सेवा में ही होता है ।

b)

अर्थात् गोस्वामी इन्द्रियसुख की चरम सीमा से भलीभान्ति परिचित होता है ।

c)

अर्थात् गोस्वामी इंद्रियों से सभी प्रकार के सुख पहले से ही भोग किए हुए रहता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

40.

जब योगी का मन भगवान में स्थिर हो जाता है तो वह ................. से परे हो जाता है ।

a)

रजोगुण

b)

तमोगुण

c)

सतोगुण

d)

शुद्ध प्रेम

41.

"स वै मनः कृष्णपदारविन्दयोः ।" का क्या अभिप्राय है ?

a)

भगवान् की दिव्य प्रेमाभक्ति में निरंतर प्रवृत्त रहना ।

b)

भगवान् श्रीकृष्ण की खोज में निरंतर प्रवृत्त रहना ।

c)

जीवन में प्राप्त होने वाले दुखों व कष्टों के लिए सदैव भगवान् श्रीकृष्ण को कोसते रहना ।

d)

सदा भगवान श्रीकृष्ण के समतुल्य बनने के लिए व्याकुल रहना ।

42.

ब्रह्म-संस्पर्श का क्या अर्थ है ?

a)

ब्रह्म के साथ दिव्य सान्निध्य

b)

ब्रह्म की दिव्य प्रेममयी सेवा

c)

ब्रह्म की इंद्रियों का तुष्टीकरण

d)

यह सभी कथन ब्रह्म-संस्पर्श का अर्थ स्पष्ट करते हैं ।

43.

वास्तविक योगी की क्या विशेषता होती है ?

a)

वास्तविक योगी पूर्ण दृष्टा होता है ।

b)

वास्तविक योगी समस्त जीवों में भगवान् को देखता है ।

c)

वास्तविक योगी समस्त जीवों को भगवान् में देखता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

44.

निम्नलिखित में से कौन सा कथन भगवान् की परम निरपेक्षता को सिद्ध करता है ?

a)

विभिन्न योनियों में अवस्थित जीवात्माओं के हृदय में विद्यमान् होने पर भी भगवान् भौतिक रूप से अप्रभावित रहते हैं ।

b)

प्रत्येक जीवात्मा के प्रति भगवान् का व्यवहार उसकी योनि के अनुरूप होता है ।

c)

भगवान् प्रत्येक धर्म के जीवों के साथ एक समान व्यवहार रखते हैं, चाहे वह जीव हिंदू धर्म से या इस्लाम धर्म से या ईसाई धर्म से या अन्य किसी धर्म से ही संबंधित क्यों न हो ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

45.

इनमें से कौन सा कथन असत्य है ?

a)

जीव अपराशक्ति का अंश होते हुए भी पराशक्ति द्वारा बद्ध है ।

b)

अपराशक्ति में जीव भौतिक इन्द्रियों का दास होता है ।

c)

पराशक्ति में जीव साक्षात् परमेश्वर का दास होता है ।

d)

प्रत्येक परिस्थिति में जीव भगवान् का ही दास होता है ।