wayground logo

Free Printable Worksheets

Font size

S
M
L
XL
Worksheets

25. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_6.10–6.17

Total questions: 43

Worksheet time: 1hrs 14mins

Name
Class
Date
1.

कृपया यहाँ पर अपना नाम लिखें ।

4 lines
2.

कृपया यहाँ पर अपनी आयु लिखें ।

4 lines
3.

कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल नं0 लिखें ।

4 lines
4.

कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।

4 lines
5.

निम्नलिखित में से किस रूप में मनुष्य परमसत्य को अनुभव नहीं कर सकता है ?

a)

ब्रह्म

b)

परमात्मा

c)

ब्रह्मा

d)

श्रीभगवान्

6.

क्या निर्विशेषवादी तथा ध्यानयोगी भी कृष्णभावनाभावित होते हैं ?

a)

हाँ, वे अप्रत्यक्ष रूप से आंशिक कृष्णभावनाभावित होते हैं।

b)

नहीं, वे ब्रह्मवादी तथा परमात्मावादी होते हैं।

c)

हाँ, वे प्रत्यक्ष रूप से पूर्ण कृष्णभावनाभावित होते हैं।

d)

नहीं, उन्हें कृष्ण के विषय में तनिक भी ज्ञान नहीं होता है।

7.

निर्विशेषवादी तथा ध्यानयोगी के अपूर्ण कृष्णभावनाभावित होने का प्रमुख कारण क्या होता है ?

a)

निर्विशेषवादियों तथा ध्यानयोगियों को क्रमशः ब्रह्म तथा परमात्मा का ही ज्ञान होना ।

b)

निर्विशेषवादियों तथा ध्यानयोगियों को परमसत्य के विषय में अपूर्ण ज्ञान होना ।

c)

निर्विशेषवादियों तथा ध्यानयोगियों का क्रमशः ब्रह्म तथा परमात्मा के प्रति आसक्त होना ।

d)

यह सभी कथन उचित हैं ।

8.

निम्नलिखित में से योगी का प्रथम कर्तव्य क्या होता है ?

a)

योगी को अपना ध्यान सदैव कृष्ण पर एकाग्र रखना चाहिए ।

b)

योगी को सदैव कृष्ण का चिंतन करना चाहिए ।

c)

योगी को एक क्षण के लिए भी कृष्ण को भुलाना नहीं चाहिए ।

d)

यह सभी कथन योगी के प्रथम कर्तव्य के मुख्य घटक हैं ।

9.

निम्नलिखित में से योगी को समाधि में रहने के लिए क्या आवश्यक है ?

a)

मन की एकाग्रता

b)

मन की व्यग्रता

c)

मन की व्याकुलता

d)

मन की विवशता

10.

"योगी को चाहिए कि वह अनुकूल परिस्थितियों को ग्रहण करे और प्रतिकूल परिस्थितियों का त्याग दे, जिससे उसकी अनुभूति पर कोई प्रभाव ना पड़े ।" श्रील प्रभुपाद जी के इस कथन में निम्न में से किस अनुभूति का उल्लेख हुआ है ?

a)

परमसत्य की अनुभूति

b)

मन की शुद्धता की अनुभूति

c)

इन्द्रियों की शुद्धता की अनुभूति

d)

जीवात्मा की शुद्धता की अनुभूति

11.

यदि कोई व्यक्ति पूर्ण कृष्णभावनाभावित होने का संकल्प लेता है । तो उसे निम्न में से किन वस्तुओं से दूर रहना होगा और क्यों ?

a)

पद व प्रतिष्ठा - क्योंकि इनसे संग्रहभाव उत्पन्न होता है ।

b)

धन व स्त्री - क्योंकि इनसे संग्रहभाव उत्पन्न होता है ।

c)

वैभव व सत्ता - क्योंकि इनसे संग्रहभाव उत्पन्न होता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

12.

आत्मोत्सर्ग से आपका क्या तात्पर्य है ?

a)

आत्मत्याग

b)

आत्मविश्वास

c)

आत्मासक्ति

d)

आत्मानुभूति

13.

किसी व्यक्ति के वैराग्य के अपूर्ण होने का प्रमुख कारण क्या है ?

a)

वस्तुओं की स्वभाविक स्थिति के पूर्णज्ञान के अभाव में उनका त्याग करना ।

b)

योगाभ्यास के दौरान अपने परिवारजनों का चिंतन करना ।

c)

बिना सोचे-समझे अपने नियत कर्मों का परित्याग कर देना ।

d)

सांसारिक भोगों की आकांक्षाओं को मन में दबाए रखना ।

14.

निम्नलिखित में से कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को किसका भलीभांति ज्ञान होता है ?

a)

यह कि प्रत्येक वस्तु कृष्ण की है और इनका परिग्रह अनुचित होता है ।

b)

यह कि कृष्णभावनामृत के अनुकूल वस्तुओं को स्वीकार करना चाहिए और प्रतिकूल वस्तुओं का परित्याग करना चाहिए ।

c)

यह कि कृष्णभावनाहीन व्यक्तियों की संगति सर्प स्पर्शित दूध के समान होती है ।

d)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को इन सभी का ज्ञान होता है ।

15.

निम्न में से प्रत्यक्ष एवं पूर्णयोगी कौन होता है ?

a)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति

b)

निर्विशेषवादी

c)

ध्यानयोगी

d)

परमात्मावादी

16.

निम्न में से कलियुग के जीवों की क्या विशेषताएँ हैं ?

a)

कलियुग के जीव अल्पायु होते हैं ।

b)

कलियुग के जीव आत्म-साक्षात्कार के प्रति मंद होते हैं ।

c)

कलियुग के जीव चिंताओं से व्यग्र रहते हैं ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

17.

हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम् ।

कलौ नास्त्यैव नास्त्यैव नास्त्यैव गतिरन्यथा ।।

यह श्लोक निम्न में से किस पुराण में कहा गया है ?

a)

आदि पुराण

b)

भविष्य पुराण

c)

विष्णु पुराण

d)

बृहन्नारदीय पुराण

18.

मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य क्या है ?

a)

कृष्ण को जानना ।

b)

स्वयं को जानना ।

c)

कर्मबंधन को जानना ।

d)

मोक्ष को जानना ।

19.

प्रत्येक के हृदय में निवास करने वाले अन्तर्यामी विष्णुमूर्ति वास्तव में कौन हैं ?

a)

कृष्ण का स्वांश रूप

b)

गर्भोदकशायी विष्णु का स्वांश रूप

c)

अनन्त विष्णु का स्वांश रूप

d)

माया के स्वांश का छद्मरूप

20.

अष्टाँगयोग का प्रमुख प्रयोजन क्या है ?

a)

अन्तर्यामी विष्णुमूर्ति की खोज करना और उन्हें देखना ।

b)

मन व इन्द्रियों को वश में करके मानसिक शान्ति प्राप्त करना ।

c)

विश्व विख्यात होने के लिए विभिन्न प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त करना ।

d)

पर्याप्त इन्द्रियभोग हेतु अपने भौतिक शरीर की आयु वृद्धि करना ।

21.

मैं एक गृहस्थ हूँ । यदि मैं नित्यप्रति अपनी पत्नी व अन्य स्त्रियों के साथ मैथुन एवं अश्लील फिल्में देखकर हस्तमैथुन करता हूँ और प्रतिदिन योग्य गुरु के निर्देशन में योगाभ्यास भी करता हूँ । तो क्या मैं योगी बन सकता हूँ ?

a)

नहीं, कदापि नहीं - क्योंकि योग अर्थात् हृदय के भीतर अन्तर्यामी विष्णुमूर्ति की अनुभूति प्राप्त करने के लिए ब्रह्मचर्यव्रत अनिवार्य होता है ।

b)

हाँ, क्योंकि एक प्रसिद्ध योग गुरु का कथन है कि संभोग से निवृत्त मन द्वारा योगाभ्यास करने से समाधि की अवस्था सुगमता से प्राप्त की जा सकती है ।

c)

नहीं, कदापि नहीं - क्योंकि मैथुन के प्रति मन की ऐसी व्यग्रता निश्चित ही योग में बाधक होती है ।

d)

हाँ, मैथुन का नियमित उपभोग ही मन को मैथुनाकर्षण से विमुख कर सकता है । इस प्रकार निवृत्त मन को योग द्वारा वश में किया जा सकता है ।

22.

गृहस्थ-ब्रह्मचारी से आपका क्या अभिप्राय है ?

a)

जो व्यक्ति विवाहित जीवन के विधि- विधानों का करते हुए केवल अपनी पत्नी के साथ ही मैथुन-संबंध रखता है । वह गृहस्थ ब्रह्मचारी कहलाता है ।

b)

जो व्यक्ति गृहस्थाश्रम के बाद ब्रह्मचर्याश्रम का पालन करता है, वह गृहस्थ-ब्रह्मचारी कहलाता है ।

c)

वह व्यक्ति गृहस्थ-ब्रह्मचारी कहलाता है जिसकी पत्नी पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करती है ।

d)

जो व्यक्ति विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त रहता है और अपनी पत्नी के साथ ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है । वह गृहस्थ-ब्रह्मचारी कहलाता है ।

23.

आध्यात्मिक उत्थान के लिए निम्न में से कौन गृहस्थ-ब्रह्मचारी को स्वीकार करता है ?

a)

भक्ति सम्प्रदाय

b)

ज्ञान सम्प्रदाय

c)

ध्यान सम्प्रदाय

d)

गृहस्थ सम्प्रदाय

24.

ज्ञानयोग एवं ध्यानयोग की तुलना में भक्तियोग (कृष्णभावनामृत) का अनुशीलन करने वाले योगी किस प्रकार लाभान्वित होते हैं ?

a)

भक्तियोग में रत योगियों की इन्द्रियों का निग्रह स्वतः ही होता है । इसके लिए उन्हें कोई भी अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता है ।

b)

भक्तियोग में रत योगियों के हृदय का शुद्धीकरण स्वतः ही होता है । इसके लिए उन्हें कोई भी अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता है ।

c)

भक्तियोग में रत योगियों का हृदय स्वतः ही परमसत्य के पूर्णज्ञान से प्रकाशित हो जाता है । इसके लिए उन्हें कोई भी अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

25.

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार इनमें से कौन सा व्यक्ति योगी नहीं है ?

a)

जो व्यक्ति योगाभ्यास के द्वारा भौतिक सुविधा प्राप्त करना चाहता है ।

b)

जो व्यक्ति योगाभ्यास के द्वारा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करना चाहता है ।

c)

जो व्यक्ति योगाभ्यास के द्वारा भौतिक सिद्धि प्राप्त करना चाहता है ।

d)

ये सभी व्यक्ति योगी नहीं हैं ।

26.

क्या इस संसार से मुक्त होने पर जीव शून्य में विलीन हो जाता है ?

a)

नहीं, क्योंकि भगवान् की सृष्टि में कहीं भी शून्य नहीं है । यह एक कोरी कपोलकल्पना है ।

b)

हाँ, क्योंकि निर्विशेषवादियों का तो यही कथन है ।

c)

नहीं, भौतिक अस्तित्व के समाप्ति के उपरान्त जीव स्वर्गलोक में प्रवेश करता है, न कि किसी शून्य में ।

d)

हाँ, आध्यात्मिक जगत् को ही शून्य कहते हैं ।

27.

चिन्मयव्योम से आपका क्या अभिप्राय है ?

a)

आध्यात्मिक जगत्

b)

शाश्वत् प्रकाश

c)

शाश्वत् ज्ञान

d)

सात्विक व्यंजन

28.

इनमें से वास्तविक शान्ति किसे प्राप्त होती है ? और क्यों ?

a)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति या भक्त - क्योंकि उसे भगवान् श्रीकृष्ण का पूर्ण ज्ञान होता है ।

b)

परमात्मावादी या योगी - क्योंकि उसे अन्तर्यामी परमात्मा का पूर्ण ज्ञान होता है ।

c)

निर्विशेषवादी या ब्रह्मवादी या ज्ञानी - क्योंकि उसे निराकार ब्रह्म का संपूर्ण ज्ञान होता है ।

d)

यह सभी कथन सही हैं ।

29.

भगवान् श्रीकृष्ण अपनी कौन सी शक्तियों के द्वारा सर्वव्यापी ब्रह्म तथा अन्तर्यामी परमात्मा के रूप में विस्तार करते हैं ?

a)

परा-आध्यात्मिक शक्तियों

b)

अपरा-भौतिक शक्तियों

c)

लीला-आध्यात्मिक शक्तियों

d)

संकर्षण-आध्यात्मिक शक्तियों

30.

वैकुण्ठ या भगवान् श्रीकृष्ण के नित्यधाम गोलोक वृन्दावन में प्रवेश करने की मूल योग्यता क्या है ?

a)

कृष्ण तथा विष्णु रूप में उनके पूर्ण विस्तार के विषय में समुचित ज्ञान होना ।

b)

भौतिक अस्तित्व से मुक्ति प्राप्त करना ।

c)

अष्टाँगयोग का समुचित क्रियान्वयन ।

d)

यह सभी कथन उचित हैं ।

31.

"स वै मनः कृष्णपदारविंदयोः" का क्या तात्पर्य है ?

a)

उस (योगी) का मन सदैव कृष्ण के कार्यकलापों में तल्लीन रहता है ।

b)

उस (योगी) का मन सदैव कृष्ण के अरविंदो में तल्लीन रहता है ।

c)

उस (योगी) का मन सदैव कृष्ण के गोप-गोपियों में तल्लीन रहता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

32.

जन्म-मृत्यु के जिस चक्र में हम जीव अनादि काल से एक भौतिक शरीर से दूसरे भौतिक शरीर में देहान्तरण करते हुए घूम रहे हैं । इस चक्र को रोकने अर्थात् इससे मुक्ति प्राप्त करने का क्या उपाय है ? स्पष्ट करें ।

a)

जिन भगवान् श्रीकृष्ण को विस्मृत कर दिया है, उनकी संपूर्ण स्मृति को पुनः प्राप्त करना ।

b)

इस संसार में पुण्य अर्जित करना ही एकमात्र उपाय है ।

c)

इस संसार में सर्वोच्च उपाधि को प्राप्त करना ही एकमात्र उपाय है ।

d)

इस संसार की सत्ता को प्राप्त करने के लिए कठिन से कठिन प्रयास करना ही एकमात्र उपाय है ।

33.

योगाभ्यास में भोजन व नींद के संबंध को स्पष्ट करें ।

a)

जो व्यक्ति आवश्यकता से अधिक खाता है वह अधिक सोता है और उसके लिए ऐसे में योगाभ्यास दुःसाध्य होता है ।

b)

जो व्यक्ति कम खाता है वह पर्याप्त नींद नहीं सो पाता है । अतः ऐसे में उसके लिए योगाभ्यास दुःसाध्य हो जाता है ।

c)

पर्याप्त भोजन से पर्याप्त नींद प्राप्त होती है । भोजन और नींद का ऐसा संतुलन योगाभ्यास के लिए उत्तम होता है ।

d)

यह सभी तथ्य योगाभ्यास के संदर्भ में भोजन व नींद के संबंध को स्पष्ट करते हैं ।

34.

निम्नलिखित में से कौन सा भोजन पाप कर्मों का भोग करने के समान है ?

a)

कृष्ण को अर्पित किए बिना ग्रहण किया जाने वाला भोजन ।

b)

माँसाहार करना ।

c)

केवल मात्र इन्द्रिय सुख के लिए किया जाने वाला भोजन ।

d)

यह सभी प्रकार के भोजन पापकर्मों का भोग करने के समान हैं ।

35.

निम्न में से मांसाहार करने के क्या परिणाम होते हैं ?

a)

मांसाहार से तमोगुण बढ़ता है ।

b)

मांसाहार से पाप कर्म बढ़ते हैं ।

c)

दयाभाव कम होता है ।

d)

यह सभी कथन उचित हैं ।

36.

निम्न में से सबसे उत्तम भोजन क्या है ?

a)

सात्विक भोजन ।

b)

अन्न, शाक, फल, तथा दुग्ध इत्यादि ।

c)

कृष्ण को अर्पित भोजन का उच्छिष्ट भाग ।

d)

शाकाहार के विभिन्न प्रकार के आकर्षक व्यंजन ।

37.

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति ही क्यों योगाभ्यास के लिए पूर्णतः योग्य है ?

a)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति आवश्यकता से अधिक भोजन नहीं करता है ।

b)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति शास्त्रों द्वारा अनुमोदित उपवास ही करता है ।

c)

क्योंकि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति पर्याप्त नींद लेता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

38.

योगाभ्यास में अनुशासन का क्या महत्व है ?

a)

जैसे भौतिक जीवन में सफलता के लिए अनुशासन आवश्यक होता है ठीक वैसे ही योग में सफलता के लिए भी अनुशासन आवश्यक होता है ।

b)

अष्टाँग योग के पहले पाँच अंगों में साधक अपनी सोने, खाने, आमोद-प्रमोद तथा कर्म करने की आदतों को अनुशासित करता है ।

c)

मन तथा इंद्रियों को वश में करने के लिए साधक का अनुशासित होना अति आवश्यक है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

39.

निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है ?

a)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति प्रसादम् के द्वारा, अपने भोजन करने की आदत को अनुशासित करता है ।

b)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति कृष्णभावनामृत में निरंतर कर्म करने के अतिरिक्त एक भी क्षण को व्यर्थ न गंवाकर, अपनी सोने की आदत को अनुशासित करता है ।

c)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति केवल कृष्ण से संबंधित कार्यों करके, अपने काम करने की आदतों को अनुशासित करता है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

40.

अव्यर्थ-कालत्वम का क्या तात्पर्य है ?

a)

समय व्यर्थ न गंवाना ।

b)

काल कभी भी किसी की इह लीला को समाप्त कर सकता है ।

c)

काल को वश में करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है ।

d)

इन्द्रियभोग में समय का व्यर्थ निवेश करना।

41.

नामाचार्य श्रील हरिदास ठाकुर जी को "नामाचार्य" की उपाधि किसने दी थी ?

a)

श्री चैतन्य महाप्रभु

b)

श्री श्री राधा पार्थसारथी

c)

श्रील रूप गोस्वामी

d)

श्रील सनातन गोस्वामी

42.

नामाचार्य श्रील हरिदास ठाकुर जी प्रतिदिन भगवान् श्रीकृष्ण के कितने नामों का जप किया करते थे ?

a)

3,00,000 नामों का

b)

30,000 नामों का

c)

30,00,000 नामों का

d)

3,000 नामों का

43.

श्रील प्रभुपाद जी ने श्लोक संख्या 6.15 के तात्पर्य में किन दो वैष्णव आचार्यों का उदाहरण प्रस्तुत किया है ?

a)

श्रील रूप गोस्वामी एवं नामाचार्य श्रील हरिदास ठाकुर ।

b)

श्रील रूप गोस्वामी एवं श्रील सनातन गोस्वामी ।

c)

श्रील सनातन गोस्वामी एवं नामाचार्य श्रील हरिदास ठाकुर ।

d)

श्रील जीव गोस्वामी एवं नामाचार्य श्रील हरिदास ठाकुर ।