WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-14 (3.13-22)
Total questions: 25
Worksheet time: 2hrs 15mins
कौन सा श्लोक बताता है कि भक्त भगवान् को अर्पित भोजन प्रसाद के रूप में स्वीकार करने से सभी पापों से बच जाते हैं, अन्य लोग केवल पाप खाते हैं?
यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः
भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् || 3.13 ||
अन्नाद्भवति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः |
यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः || 3.14 ||
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः |
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते || 3.21 ||
भगवद्गीता व ब्रह्मसंहिता आदि वैदिक शास्त्रानुसार 'संत' किसे कहते हैं? (3.13)
अभक्तों या कृष्ण विरुद्ध पुरुषों को सन्त कहा जाता है
वे सदैव भगवत्प्रेम में निमग्न रहते हैं
कोई भी वस्तु परमपुरुष को अर्पित करने के बाद ग्रहण नहीं करते
वे संसार की सम्पूर्ण पापमयी संगति के कल्मष में ही रहते हैं
संसार में शान्ति या सुख कैसे/किसे प्राप्त हो सकता है? (3.13)
इन्द्रियतृप्ति के लिए भोजन बनाने वाले चोर को
सभी प्रकार के पापों को खाने वाले को
पूर्ण कृष्णभावनामृत में संकीर्तन-यज्ञ की सरल विधि करने वाले को
सारे प्राणी अन्न पर आश्रित हैं, जो वर्षा से उत्पन्न होता है, तो इनमें से क्या सही है? (3.14)
वर्षा करने से यज्ञ सम्पन्न होते हैं
वर्षा करने से नियतकर्म सम्पन्न होते हैं
यज्ञ नियत कर्मों से उत्पन्न होता है
भगवान् विष्णु को अर्पित करके ग्रहण किया जाने वाला भोजन हमें भौतिक संदूषण से निरापद बनाता है - इसके लिए कौन सा उदाहरण दिया गया है? (3.14)
भगवान् सभी देवताओं के स्वामी हैं और जिस प्रकार शरीर के अंग पूरे शरीर की सेवा करते हैं, उसी तरह सारे देवता उनकी सेवा करते हैं
जब कोई छूत का रोग फैलता है तो इसके आक्रमण से बचने के लिए रोगाणुरोधी टीका लगाया जाता है
जो केवल कृष्ण को अर्पित किया भोजन नहीं करता है, उसका क्या होता है? (3.14)
वह अपने पुण्य कर्म को बढाता रहता है
पापफलों को भोगने के लिए अगला शरीर कूकरों-सूकरों के समान मिलता है
आत्म-साक्षात्कार के मार्ग में बाधक, भौतिक जगत् के नाना कल्मषों के आक्रमण से बच जाता है
शाकाहारी या मांसाहारी दोनों को भोजन के लिए अन्ततोगत्वा किस के उत्पादन पर आश्रित रहने की आवश्यकता होती है? (3.14)
बड़ी-बड़ी फैक्टरियों के उत्पादन पर
खेतों के उत्पादन पर
यज्ञ-चक्र के नियमानुसार, भोजन के अभाव से बचने के लिए, मांसाहारी हो या शाकाहारी, सबको क्या करना चाहिए? (3.14)
फैक्ट्रियां लगानी चाहियें
बादलों पर नमक डालकर वर्षा करनी चाहिए
संकीर्तन-यज्ञ करना चाहिए
बगैर वर्षा के खेती की विधि विकसित करनी चाहिए
वेदों के निर्देश के बिना किया गया कोई भी कर्म ______ कहलाता है| (3.15)
सकाम कर्म
अकर्म
विकर्म
“चारों वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद – भगवान् के _______ से अद्भुत हैं |” (बृहराण्यकउपनिषद् ४.५.११) (3.15)
हाथ
पाँव
आँख
श्वास
भगवद्गीता में वर्णित यज्ञ-चक्र का क्या निष्कर्ष है? (3.16)
कठोर परिश्रम करो और इन्द्रियतृप्ति का आनन्द लो
यज्ञ-चक्र का पालन करने वाले का जीवन अत्यन्त संकटपूर्ण रहता है
यज्ञ पद्धति के द्वारा विषयोन्मुख लोग विषयों के फल में फँसे बिना अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकते हैं
इनमें से किस विधि का पालन करने वाले को यज्ञ पद्धति का पालन करने की आवश्यकता है? (3.16)
कर्मयोग
ज्ञानयोग
भक्तियोग
जो लोग इन्द्रियतृप्ति में जुटे हुए हैं, भोग करना चाहते हैं
संसार की सम्पन्नता किस निर्भर है? (3.16)
हमारे प्रयासों पर
परमेश्वर की पृष्ठभूमि-योजना पर
यज्ञ के विषय में क्या सही है? (3.16)
अप्रत्यक्ष रूप में यह कृष्णभावनामृत का ही अभ्यास है
यज्ञों में दक्षता प्राप्त करने वाला अवश्य ही कृष्णभावनाभावित हो जाता है
यदि यज्ञ करने से कोई कृष्णभावनाभावित नहीं हो पाता तो इसे कोरे रीति-रिवाज मानना चाहिए
कृष्णभावनामृत के कार्यों से पूर्णतया सन्तुष्ट रहने वाले के विषय में क्या सही है? (3.17)
उसे कुछ भी नियत कर्म नहीं करना होता
उसके हृदय का सारा मैल तुरन्त धुल जाता है
भगवत्कृपा से उसका कार्य स्वयंप्रकाशित हो जाता है
वैदिक आदेशों के प्रति उसका कर्तव्य निःशेष हो जाता है
कभी भी भौतिक कार्यों में रूचि नहीं लेता
स्वरूपसिद्ध कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को क्या करना होता है? (3.18)
कुछ नहीं, क्योंकि कृष्णभावनामृत निष्क्रियता है
कृष्णभावनाभावित कर्म के अतिरिक्त सब कुछ
मनुष्यों व देवताओं की शरण ग्रहण
कर्तव्य-सम्पादन
इनमें से क्या व्यक्तिगत आसक्ति नहीं है, जिसकी संस्तुति भगवान् कृष्ण ने की है? (3.19)
उत्तम व्यक्ति होना
अहिंसक होना
इन्द्रियतृप्ति के उद्देश्य से किये गए
केवल कृष्ण के लिए कार्य
उच्चतम कोटि का पूर्ण कर्म क्या है जिसकी संस्तुति भगवान् कृष्ण ने अर्जुन से की है? (3.19)
समुचित पथप्रदर्शन पाकर
कर्मफल से अनासक्त होकर
कृष्ण के लिए या कृष्णभावनामृत में कार्य
कृष्ण की इच्छा से कुरुक्षेत्र के युद्ध में लड़े
कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को संसार में कोई रूचि हो नहीं सकती तो भी वह नियत कर्म क्यों करता रहता है? (3.20)
वह वेदानुमोदित कर्म करने के लिए बाध्य है
सामान्यजनों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करने के उद्देश्य से
राजा जनक के विषय में क्या सही है? (3.20)
सीताजी के ससुर
भगवान् श्रीराम के पिता
मिथिला के राजा
स्वरुपसिद्ध व्यक्ति
एक शिक्षक एवं नेता के लिए क्या योग्यता वांछनीय है? (3.21)
शिक्षक को ठीक-ठीक आचरण करना चाहिए
स्वयं शास्त्रीय सिद्धान्तों का पालन करे
प्रमाणिक ग्रंथों के विपरीत नियम बनाना आना चाहिए
उपदेश आदर्श शास्त्रों के नियमों पर आधारित होना चाहिए
महान भक्तों के पदचिन्हों का अनुसरण करना चाहिए
कौन-कौन अबोध जनता के स्वाभाविक नेता माने जाते हैं जिन्हें नैतिक तथा आध्यात्मिक संहिता सम्बन्धी आदर्श ग्रंथों से सुपरिचित होना ही चाहिए? (3.21)
राजा
राज्य का प्रशासनाधिकारी
पिता
शिक्षक
नौटंकी करने वाला
किस उपनिषद के सन्दर्भ से बताया गया है कि भगवान् के लिए कोई भी कर्म नियत नहीं है परन्तु फिर भी उनकी विविध शक्तियों के द्वारा सारे कर्म स्वाभाविक रूप से संपन्न किये जाते हैं? (3.22)
मुण्डक
ईश
केन
कथा
श्वेताश्वतर
वैदिक साहित्य के अनुसार भगवान् के विषय में क्या सही नहीं है? (3.22)
वे सभी देवताओं द्वारा पूज्य हैं
समस्त संचालकों के भी संचालक हैं
उनका शारीरिक स्वरूप सामान्य जीव जैसा नहीं होता
उनके शरीर तथा आत्मा में अन्तर है
न तो कोई उनसे बढ़कर है, न ही उनके तुल्य है
एक इन्द्रियतृप्ति में रत व्यक्ति के लिए निर्दिष्ट यज्ञ-कर्म और कृष्णभावनाभावित व्यक्ति के कर्मों में अंतर जानने के बाद आप अपने सांसारिक कर्तव्यों को कैसे देखते हैं?
