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Bhagavad Gita As It Is DAY-36 (9.14-23)

Total questions: 23

Worksheet time: 2hrs 5mins

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1.

भगवान् किस श्लोक में कहते हैं कि अनन्य भक्तों की जो आवश्यकताएँ होती हैं, उन्हें मैं पूरा करता हूँ और जो कुछ उनके पास है, उसकी रक्षा करता हूँ ?

a)

सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रता: ।

नमस्यन्तश्च मां भक्त्य‍ा नित्ययुक्ता उपासते ॥ 9.14 ॥

b)

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते ।

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥ 9.22 ॥

2.

भगवद्गीता के अनुसार महात्मा के क्या लक्षण हैं? (9.14)

a)

कृष्ण के गुण-गान के अलावा कोई दूसरा कार्य नहीं रहता

b)

परमेश्वर के निराकार ब्रह्मज्योति के प्रति आसक्त होता है

c)

अपने सारे कार्यकलाप भगवान् कृष्ण की सेवा में लगाता है

d)

उपवास के विधि-विधानों का दृढ़ता से पालन नहीं करता है

e)

सदैव विष्णु के श्रवण-कीर्तन आदि में व्यस्त रहता है

3.

सततं कीर्तयन्तो मां - में किसका कीर्तन किया जाता है? (9.14)

a)

भगवान् के पवित्र नाम का

b)

भगवान् के नित्य रूप का

c)

भगवान् के दिव्य गुणों का

d)

भगवान् की असामान्य लीलाओं का

e)

भगवान् के निराकार रूप, ब्रह्मज्योति का

4.

एक महात्मा किसके लिए दृढ़व्रत या दृढ़संकल्प होकर प्रयास करता है? (9.14)

a)

भगवान् के पाँच दिव्य रसों में से किसी एक रस में उनका सान्निध्य प्राप्त करने के लिए

b)

सारे विधि-विधान यथा प्रत्येक एकादशी को तथा भगवान् के आविर्भाव दिवस (जन्माष्टमी) पर उपवास करना

c)

सुखसुविधापूर्ण जीवन के लिए धनोपार्जन

5.

क्या भगवान् की भक्ति करके वास्तव में महात्मा बनना सरल है? (9.14)

a)

बिलकुल नहीं, कठिन तपस्या करने की आवश्यकता पड़ती है

b)

हाँ, मनुष्य सक्षम गुरु के निर्देशन में इस जीवन को गृहस्थ, संन्यासी या ब्रह्मचारी रहते हुए भक्ति में बिता सकता है

6.

विभिन्न प्रकारों से कृष्ण की पूजा करने वालों में सबसे निम्न स्तर क्या है? (9.15)

a)

महात्मा, जो कृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी को नहीं जानते

b)

आर्त, अर्थार्थी, ज्ञानी तथा जिज्ञासु

c)

परमेश्वर तथा अपने को एक मानकर पूजा करने वाले

d)

परमेश्वर के किसी मनोकल्पित रूप, देवपूजा करने वाले

e)

भगवान् के विश्व रूप, ब्रह्माण्ड की पूजा करने वाले

7.

विभिन्न प्रकारों से कृष्ण की पूजा करने वालों में सबसे श्रेष्ठ स्तर क्या है? (9.15)

a)

महात्मा, जो कृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी को नहीं जानते

b)

आर्त, अर्थार्थी, ज्ञानी तथा जिज्ञासु

c)

परमेश्वर तथा अपने को एक मानकर पूजा करने वाले

d)

परमेश्वर के किसी मनोकल्पित रूप, देवपूजा करने वाले

e)

भगवान् के विश्व रूप, ब्रह्माण्ड की पूजा करने वाले

8.

वेदों में कर्मकाण्ड भाग में प्रतिपादित वैदिक यज्ञ; ज्योतिष्टोम, महायज्ञ, अग्नि, घी, आदि भी पूर्णरूप से कृष्ण हैं - इससे कृष्ण-भक्तों को क्या समझना चाहिए? (9.16)

a)

कृष्ण भक्ति के साथ-साथ खूब जोर-शोर से कर्मकाण्ड इत्यादि का भी पालन करना चाहिए

b)

जो लोग कृष्ण की भक्ति में लगे हुए हैं उन्होंने पहले ही सारे वेदविहित यज्ञ सम्पन्न कर लिए हैं

9.

प्रकृति की सृष्टि में विभिन्न जीवों में से कुछ हमारे माता, पिता के रूप में उत्पन्न होते हैं, ये जीव वास्तव में कौन हैं? (9.17)

a)

कृष्ण

b)

कृष्ण के अंश

10.

इनमें से कौन कृष्ण का अंश (शक्ति) होने के कारण कृष्ण समझा जाता है? (9.17)

a)

ज्ञेय (जानने योग्य)

b)

जिज्ञासु

c)

ॐ शब्द, जिसे प्रणव कहा जाता है

d)

शुद्धिकर्ता

11.

कृष्ण की विभिन्न शक्तियों तक पहुँचने का अर्थ है _______________ (9.18)

a)

अप्रत्यक्षतः कृष्ण तक पहुँचना

b)

प्रत्यक्षतःकृष्ण तक पहुँचना

12.

कृष्ण को न जानकर जो देवताओं को ही अपना लक्ष्य बनाते हैं, उनके लिए क्या समस्या है? (9.18)

a)

वह पथभ्रष्ट हो जाता है, उसकी तथाकथित प्रगति आंशिक होती है या फिर भ्रमपूर्ण

b)

ऊँची एलीवेटर(लिफ्ट) होने पर भी एक-एक सीढ़ी करके ऊपर क्यों न चढ़ा जाये? समय-शक्ति तो अधिक लगेगा पर सीढ़ियां कब काम आएंगी?

13.

अपनी रक्षा या अपने कष्टों के विनाश के लिए परम गंतव्य कृष्ण की ही शरण क्यों ग्रहण करें? (9.18)

a)

सब कुछ कृष्ण की शक्ति पर आश्रित है

b)

प्रत्येक जीव के हृदय में स्थित कृष्ण परम साक्षी हैं

c)

हमारा घर, देश या लोक, सब कुछ कृष्ण का है

d)

कृष्ण से बढ़कर न तो कोई मित्र हो सकता है, न शुभचिन्तक

e)

आश्रय कोई जीवित शक्ति होनी चाहिए, कृष्ण परमजीव हैं

14.

इनमें से किस का स्त्रोत कृष्ण हैं? (9.19)

a)

अमरत्व

b)

साक्षात् मृत्यु

c)

आत्मा

d)

पदार्थ

e)

वर्षा को रोकना तथा लाना

15.

त्रैविद्याः शब्द में कौन सा वेद सम्मिलित नहीं है? (9.20)

a)

सामवेद

b)

यजुः वेद

c)

ऋग्वेद

d)

अथर्ववेद

16.

भक्ति का सूत्रपात कैसे होता है? (9.20)

a)

हरे कृष्ण मन्त्र के कीर्तन से

b)

कृष्ण को वास्तव में समझने के प्रयास से

c)

इन्द्र तथा चन्द्र जैसे विभिन्न देवों को आहुति प्रदान करने से

17.

उच्चतर लोकों, यथा महर्लोक, जनलोक, तपलोक आदि को प्राप्त करने से क्या लाभ मिलता है? (9.20)

a)

लाखों गुणा अच्छी तरह इन्द्रियों की तुष्टि होती है

b)

देवताओं का सा आनन्द भोगते हैं

c)

सोमरस का पान करते हैं

d)

प्रकृति के निम्न गुणों के कल्मष से शुद्ध हो जाते हैं

18.

जब उच्च लोकों में इतना विस्तृत स्वर्गिक इन्द्रियसुख मिलता है तो वहां जाने के लक्ष्य में क्या खराबी है? (9.21)

a)

पुण्यकर्मों के फल क्षीण होने पर मृत्युलोक में पुनः लौटना पड़ता है

b)

स्वर्ग तथा मृत्युलोक के बीच जन्म-मृत्यु चक्र में घूमता रहता है

19.

योग का क्या अर्थ है? (9.22)

a)

भगवान् द्वारा दुखमय बद्धजीवन में गिरने से रक्षा करना

b)

भगवान् द्वारा कृपामय संरक्षण

c)

भगवान् का सान्निध्य प्राप्त करना

d)

भगवान् द्वारा पूर्णकृष्णभावनाभावित होने में सहायता

20.

क्षेम का क्या अर्थ है? (9.22)

a)

भगवान् द्वारा दुखमय बद्धजीवन में गिरने से रक्षा करना

b)

भगवान् द्वारा कृपामय संरक्षण

c)

भगवान् का सान्निध्य प्राप्त करना

d)

भगवान् द्वारा पूर्णकृष्णभावनाभावित होने में सहायता

21.

किन शब्दों में भगवान् कहते हैं कि देवताओं की पूजा त्रुटिपूर्ण है? (9.23)

a)

यजन्ते श्रद्धयान्विता:

b)

यजन्त्यविधिपूर्वकम्

c)

तेऽपि मामेव कौन्तेय

d)

येऽप्यन्यदेवताभक्ता

22.

भगवान् और देवताओं की तुलना के लिए क्या उदाहरण दिए गए हैं? (9.23)

a)

वृक्ष और उसकी टहनियां, पत्तियां

b)

आमाशय (पेट) और शरीर के विभिन्न अंग

c)

सरकार और उसके विभिन्न अधिकारी तथा निर्देशक

23.

देवताओं की पूजा किस प्रकार अविधिपूर्वक है? कारण लिखिए |

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