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Bhagavad Gita As It Is DAY-25 (6.9-18)

Total questions: 26

Worksheet time: 2hrs 20mins

Name
Class
Date
1.

किन-किन को समान भाव से देखने पर व्यक्ति और भी उन्नत माना जाता है? (6.9)

a)

निष्कपट हितैषियों

b)

तटस्थों

c)

ईर्ष्यालुओं

d)

पुण्यात्माओं

e)

पापियों

2.

कृष्ण की अनुभूति किन-किन रूपों में होती है? (6.10)

a)

ब्रह्म

b)

परमात्मा

c)

श्रीभगवान्

d)

ब्रह्मा

e)

शिव

3.

इनमें से कौन अपूर्ण रूप में कृष्णभावनाभावित होते हैं? (6.10)

a)

कृष्ण की आध्यात्मिक किरण, निराकार ब्रह्म के प्रति आसक्त निर्विशेषवादी

b)

कृष्ण के सर्वव्यापी आंशिक विस्तार, अन्तर्यामी परमात्मा के प्रति आसक्त ध्यानयोगी

c)

भगवान् की दिव्य प्रेमाभक्ति में निरन्तर प्रवृत्त, प्रत्यक्ष कृष्णभावनाभावित व्यक्ति

4.

किस अवस्था में व्यक्ति परिग्रहत्व या संग्रह भाव से मुक्त हो सकता है? (6.10)

a)

पूर्ण संकल्प कर लेने पर उन व्यर्थ की वस्तुओं के पीछे नहीं पड़कर जो परिग्रह भाव में उसे फँसा लें

b)

प्रत्यक्षतः कृष्णभावनामृत, जिसका अर्थ है – आत्मोसर्ग जिसमें संग्रहभाव के लिए लेशमात्र स्थान नहीं होता

c)

जब मनुष्य किसी वस्तु के प्रति आसक्त न रहते हुए कृष्ण से सम्बन्धित हर वस्तु को स्वीकार कर लेता है

5.

मन को एकाग्र करने के लिए सदैव एकान्तवास करना चाहिए - का क्या अर्थ है? (6.10)

a)

सामाजिक दूरी के नियमों का पालन

b)

कृष्णभावनामृत से रहित व्यक्तियों से किसी प्रकार का सरोकार न रखना

6.

योगी का प्रमुख कर्तव्य क्या है? (6.10)

a)

सदैव कृष्ण का चिन्तन करना चाहिए

b)

एक क्षण के लिए भी उन्हें नहीं भुलाना चाहिए

c)

अनुकूल परिस्थियों को ग्रहण करे

d)

प्रतिकूल परिस्थितियों को त्याग दे

7.

योगाभ्यास के लिए कैसे स्थान में बैठने की संस्तुति की गयी है? (6.11-12)

a)

तथाकथित योगसमितियों के वातानुकूलित शिविर में

b)

हजारों लोगों से खचाखच भरे स्टेडियम में

c)

वेलवेट के मखमली गद्दे पर

d)

पवित्र तीर्थस्थान में जहाँ यमुना तथा गंगा प्रवाहित होती हैं

8.

बृहन्नारदीय पुराण के अनुसार कलियुग (वर्तमान युग) में भगवत्प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम क्या है? (6.11-12)

a)

अविचलित मन और संयमित साथ ध्यान का अभ्यास

b)

भगवान् के पवित्र नाम का कीर्तन

9.

प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में निवास करने वाले कृष्ण के स्वांश, अन्तर्यामी विष्णुमूर्ति, परमात्मा की कितनी भुजाएं हैं? (6.13-14)

a)

2

b)

4

c)

6

d)

8

10.

योगाभ्यास का प्रयोजन क्या है? (6.13-14)

a)

हृदय के भीतर अन्तर्यामी विष्णुमूर्ति की अनुभूति

b)

किसी कपटयोग के द्वारा अपने समय का अपव्यय

11.

भगवान् ने योगाभ्यास करने वाले को क्या निर्देश दिए हैं जो तथाकथित लोकप्रिय योग-समितियों से भिन्न हैं? (6.13-14)

a)

अपने शरीर, गर्दन तथा सिर को सीधा रखे, नाक के अगले सिरे पर दृष्टि लगाए

b)

अविचलित तथा दमित मन से अपने हृदय में भगवान् श्रीकृष्ण का चिन्तन करे

c)

भयरहित, विषयीजीवन से पूर्णतया मुक्त होकर भगवान् श्रीकृष्ण को ही अपना चरमलक्ष्य बनाए

12.

इनमें से कौन ब्रह्मचारी कहलाता है और भक्ति सम्प्रदाय में योगाभ्यास के लिए स्वीकार किया जा सकता है? (6.13-14)

a)

नित्यप्रति घर में या अन्यत्र मैथुन-भोग करते हुए और तथाकथित योग की कक्षा में जाने वाला

b)

सभी कालों में, सभी अवस्थाओं में तथा सभी स्थानों में मनसा वाचा कर्मणा मैथुन-भोग से पूर्णतया दूर रहने वाला

c)

जो व्यक्ति विवाहित जीवन के विधि-विधानों का पालन करता है और अपनी ही पत्नी से मैथुन-सम्बन्ध रखता है

13.

इनमें से क्या सही नहीं है? (6.13-14)

a)

मैथुन में प्रवृत्त रहकर योगाभ्यास नहीं किया जा सकता

b)

ज्ञान तथा ध्यान सम्प्रदाय के लिए पूर्ण ब्रह्मचर्य अनिवार्य नहीं है

c)

जीवन के परम लक्ष्य कृष्ण की अनुभूति के लिए ब्रह्मचर्यव्रत अनिवार्य है

14.

भक्ति सम्प्रदाय में गृहस्थ-ब्रह्मचारी को संयमित मैथुन की अनुमति क्यों रहती है? (6.13-14)

a)

ज्यादा कठोर नियम होंगे तो लोग भाग जाएंगे, वैसे भी भक्ति भोग करते रहने का सरल मार्ग है

b)

भक्ति सम्प्रदाय इतना शक्तिशाली है कि भगवान् की सेवा में लगे रहने से वह स्वतः ही मैथुन का आकर्षण त्याग देता है

15.

इन्द्रियसंयमन के विषय में भक्ति श्रेष्ठतम विधि कैसे है? (6.13-14)

a)

अन्यों को विषयभोग से दूर रहने के लिए बाध्य किया जाता है

b)

भगवद्भक्त भगवद्रसास्वादन के कारण इन्द्रियतृप्ति से स्वतः विरक्त हो जाता है

c)

भक्त को छोड़कर अन्य किसी को इस अनुपम भगवत-रस का ज्ञान नहीं होता

16.

बद्धजीव किस प्रकार विगत-भीः (भयरहित) हो सकता है? (6.13-14)

a)

कृष्ण के साथ अपने शाश्वत सम्बन्ध की पुनः स्मृति द्वारा

b)

पूर्ण कृष्णभावनाभावित हुए बिना मनुष्य निर्भय नहीं हो सकता

17.

भगवद्गीता के अनुसार योगाभ्यास का चरम लक्ष्य क्या है? (6.15)

a)

भौतिक सुविधा की प्राप्ति

b)

स्वास्थ्य-लाभ

c)

भौतिक संसार से विरक्ति प्राप्त करना

d)

शून्य में प्रवेश

e)

भगवद्धाम की प्राप्ति

18.

भगवद्गीता में भगवद्धाम का कैसे स्थान के रूप में स्पष्टीकरण किया गया है? (6.15)

a)

जहाँ न सूर्य की आवश्यकता है

b)

जहाँ न चाँद या बिजली की आवश्यकता है

c)

जहां के सारे लोक स्वतः प्रकाशित हैं

d)

जहाँ अंततः सब कुछ शून्य हो जाता है

19.

वेदों व उपनिषदों के अनुसार योग की पूर्णता किसमें है? (6.15)

a)

इन्द्रजाल अथवा व्यायाम के करतबों द्वारा जनता को मूर्ख बनाने में

b)

भगवान् कृष्ण को जानने पर जन्म तथा मृत्यु के पथ से मुक्ति प्राप्त करने में

20.

किसके योगी बनने की कोई सम्भावना नहीं है? (6.16)

a)

जो आवश्यकता से अधिक उपवास रखता है

b)

जो आवश्यकता से अधिक खाता है

c)

जो चौबीस घंटो में से छः घंटो से अधिक सोता है

d)

जो पर्याप्त नहीं सोता

e)

जो कृष्ण को अर्पित भोजन के उच्छिष्ट भाग को ही खाता है

21.

शरीर की किन आवश्यकताओं की अति करने से योगाभ्यास की प्रगति रुक जाती है? (6.17)

a)

खाने में

b)

सोने में

c)

रक्षा करने में

d)

मैथुन करने में

e)

काम करने की आदतों में

22.

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को कोई भौतिक दुःख क्यों नहीं सताता? (6.17)

a)

वह अपने कार्य, वचन, निद्रा, जागृति तथा अन्य शारीरिक कार्यों में नियमित रहता है

b)

अपना एक मिनट का समय भी भगवान् की सेवा के बिना नहीं बिताना चाहता

c)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति ऐसा कोई भी कार्य नहीं करता जो कृष्ण से सम्बन्धित न हो

23.

एक योगी कब योग में सुस्थिर कहा जाता है? (6.18)

a)

जब वह अपने मानसिक कार्यकलापों को वश में कर लेता है

b)

जब वह अध्यात्म में स्थित हो जाता है

c)

जब वह समस्त भौतिक इच्छाओं से रहित हो जाता है

24.

कृष्णभावनाभावित व्यक्तियों द्वारा स्वतः प्राप्त योग की सिद्धावस्था के लिए किसका उदाहरण दिया है? (6.18)

a)

राजा अम्बरीश

b)

राजा रहूगण

c)

राजा कौशिक

d)

राजा जरासंध

25.

महाराज अम्बरीष की जीवनचर्या से कृष्णभावनामृत की दिव्य-अवस्था प्राप्त करने के विषय में क्या सीख सकते हैं? (6.18)

a)

निरन्तर स्मरण द्वारा भगवान् के चरणकमलों में मन को स्थिर करने से ही दिव्यकार्य व्यावहारिक बन पाते हैं

b)

इन्द्रियों तथा मन को कुछ कार्य नहीं करना चाहिए, कोरा निग्रह ही व्यावहारिक है

c)

सामान्य लोगों के लिए इन्द्रियों तथा मन का दिव्यकार्य ही दिव्य सफलता की सही विधि है, जिसे युक्त कहा गया है

26.

मन को कृष्णभावनामृत में लगाने के लिए आप क्या व्यवहारिक कदम उठाते हैं?

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