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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-35 (9.4-13)
Total questions: 23
Worksheet time: 2hrs 55mins
किस श्लोक में भगवान् बताते हैं कि भौतिक प्रकृति उनकी अध्यक्षता में कार्य करती है?
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।
मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थित: ॥ 9.4 ॥
मयाध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम् ।
हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते ॥ 9.10 ॥
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् ।
परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् ॥ 9.11 ॥
महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिता: ।
भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ॥ 9.13 ॥
भगवान् श्रीकृष्ण के नाम, यश, लीलाओं आदि के द्वारा भगवत-साक्षात्कार किसे नहीं हो पाता? (9.4)
जो समुचित निर्देशन से भक्ति में लगा रहता है
जो भौतिक इन्द्रियों से जानने का प्रयास करता है
जिसने भगवान् के प्रति दिव्य प्रेमाभिरूचि उत्पन्न कर ली है
अव्यक्तमूर्तिना शब्द क्या सूचित करता है, जिसके लिए सूर्यप्रकाश का उदाहरण भी दिया गया है? (9.4)
भगवान् सर्वव्यापी हैं और सर्वत्र उपस्थित रहते हैं
भगवान् की शक्ति सम्पूर्ण सृष्टि में फैली है
सब कुछ भगवान् पर ही आश्रित है
भगवान् भौतिक इन्द्रियों द्वारा अनुभवगम्य नहीं हैं
भगवान् ने अपनी व्यक्तिगत सत्ता खो दी है
ये समझने के लिए क्या उदाहरण दिया गया है कि भगवान् सर्वत्र हैं, प्रत्येक वास्तु उनमें है पर फिर भी वे पृथक हैं? (9.4)
राजा की क्षमता पर सारे विभाग निर्भर हैं पर राजा स्वयं उपस्थित नहीं होता
गवर्नर के हस्ताक्षर से सरकारी नोट मान्य होता है
मुख्य अभियंता सारी इमारत के कोने-कोने से अवगत रहता है
कौन सा शब्द भगवान् को समस्त जीवों का पालक (भर्ता) के रूप में प्रस्तुत करता है? (9.5)
मत्स्थानि
भूतभृत
भूतस्थः
भूतभावनः
भगवान् का अचिन्त्य योगमैश्वरम् क्या है? (9.5)
यद्यपि सारी वस्तुएँ उन पर टिकी हैं, किन्तु वे पृथक् रहते हैं
वे समस्त सृष्टि के पालन तथा धारणकर्ता हैं, किन्तु वे इस सृष्टि का स्पर्श नहीं करते
वे प्रत्येक वस्तु में उपस्थित हैं, किन्तु सामान्य व्यक्ति यह नहीं समझ पाता कि वे साकार रूप में किस तरह उपस्थित हैं
इतनी विशाल सृष्टि भगवान् पर किस प्रकार आश्रित है? (9.6)
वायु महान होते हुए भी आकाश के अन्तर्गत ही स्थित रहती है, वह आकाश से परे नहीं होती
समस्त विचित्र विराट अभिव्यक्तियों का अस्तित्व भगवान् की परम इच्छा के फलस्वरूप है
सूर्य में अपार शक्ति है, तो भी यह गोविन्द की परम इच्छा और आदेश के अनुसार अपनी कक्षा में घूमता है
यदि प्रत्येक वस्तु भगवान् की इच्छा के अधीन गतिशील है, उनकी ही इच्छा से सारी वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं, उनका पालन होता है और उनका संहार होता है, तो वे सबसे पृथक कैसे हैं? (9.6)
जिस प्रकार वायु के कार्यों से आकाश रहता है
जिस प्रकार प्रजा के कार्यों से राजा रहता है
जिस प्रकार नौकर के कार्यों से मालिक रहता है
जिस प्रकार पत्नी के कार्यों से पति रहता है
कल्पक्षये का क्या अर्थ है? (9.7)
ब्रह्मा की मृत्यु होने पर
ब्रह्मा का एक दिन
ब्रह्मा का एक महीना
ब्रह्मा का एक वर्ष
एक सौ वर्षों के बाद जब ब्रह्मा की मृत्यु होती है तो प्रलय हो जाता है, इसका क्या अर्थ है? (9.7)
भगवान् द्वारा प्रकट शक्ति पुनः सिमट कर उन्हीं में चली जाती है जो पुनः उनकी इच्छा से प्रकट होती है
सारे प्राणी भगवान् में मिलकर भगवान् बन जाते हैं, दोबारा सृष्टि करनी होती है तो वे दोबारा टूट कर अलग हो जाते हैं
भौतिक जगत् भगवान् की ________ शक्ति की अभिव्यक्ति है |(9.8)
अपरा
परा
__________ कारणार्णव में शयन करते रहते हैं और अपने श्वास से असंख्य ब्रह्माण्ड निकालते हैं | (9.8)
महाविष्णु
गर्भोदकशायी विष्णु
क्षीरोदकशायी विष्णु
सृष्टि के प्रारम्भ में सबसे पहले कौन सी योनियाँ विकसित होती हैं? (9.8)
पशु
पक्षी
मनुष्य
सरीसर्प
सारी की सारी योनियाँ ब्रह्माण्ड की सृष्टि के साथ ही उत्पन्न होती हैं
भगवान् किस प्रकार इस सृष्टि करते हुए भी सभी भौतिक कार्यों के प्रति उदासीन रहते हैं? (9.9)
भौतिक कार्यों से उनका कोई सरोकार नहीं रहता
ये कार्य उनकी विभिन्न शक्तियों द्वारा सम्पन्न होते रहते हैं
छोटे से छोटे भौतिक कार्य पर उनका नियन्त्रण रहता है
न्यायाधीश को हानि-लाभ से कुछ भी लेना-देना नहीं रहता
जगत् की सृष्टि तथा प्रलय में भगवान् की आसक्ति रहती है
कृष्ण किस प्रकार प्रकति के गर्भ में जीवों को प्रविष्ट करते हैं? (9.10)
अपनी चितवन मात्र से/दृष्टिपात से
भौतिक प्रकृति का संग करके
जब भगवान् इस प्रकति के गर्भ में जीवों को प्रविष्ट करते हैं तो वे इस जगत् से प्रत्यक्ष रूप में आसक्त कैसे नहीं होते? (9.10)
वे प्रकृति पर दृष्टिपात करते हैं, इस तरह प्रकृति क्रियाशील हो उठती है और तुरन्त ही सारी वस्तुएँ उत्पन्न हो जाती हैं
परमेश्वर की ओर से तो निःसन्देह क्रिया होती है, किन्तु भौतिक जगत् के प्राकट्य से उन्हें कुछ लेना-देना नहीं रहता
फूल से सुगन्धि मिलती रहती है, किन्तु फूल और सुगन्धि एक दूसरे से विलग हैं, ऐसा ही सम्बन्ध भौतिक जगत् तथा भगवान् के बीच भी है
परमेश्वर की अध्यक्षता के बिना प्रकृति कुछ भी नहीं कर सकती, तो भी भगवान् समस्त कार्यों से पृथक् रहते हैं
इनमें से क्या सही नहीं है? (9.11)
यद्यपि भगवान् मनुष्य रूप में प्रकट होते हैं, किन्तु वे सामान्य व्यक्ति नहीं होते
भौतिक जगत् तथा वैकुण्ठलोक दोनों में ही कई-कई निर्देशक होते हैं, किन्तु कृष्ण परम नियन्ता हैं
कृष्ण का शरणागत जीव माया के प्रभाव से बाहर निकल सकता है पर कृष्ण का शरीर तो माया का ही है
प्रत्येक व्यक्ति का समुचित सम्मान क्यों करना चाहिए? (9.11)
क्या पता कब किसकी आवश्यकता पड़ जाये
चूँकि कृष्ण परमात्मा रूप में प्रत्येक जीव के हृदय में विद्यमान हैं
प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर का निवास या मन्दिर है
जो कृष्ण को सामान्य पुरुष कहकर उनका उपहास करते हैं, उनके लिए भगवान् ने क्या शब्द प्रयोग किया है? (9.11)
मूढ क्योंकि वे कृष्ण के गुह्य कार्यों तथा उनकी विभिन्न शक्तियों से अपरिचित होते हैं
विद्वान क्योंकि वह अपने पूर्व पुण्यों के कारण असाधारण व्यक्ति के रूप में पैदा है
जो अपने को कृष्णभावनामृत तथा भक्ति में रत दिखलाते हैं, किन्तु अन्तःकरण से वे भगवान् कृष्ण को परब्रह्म नहीं मानते, ऐसे लोगों को क्या फल प्राप्त होता है? (9.12)
भगवद्धाम गमन
भवबन्धन से मुक्ति
कृष्ण से समता
घोर अपराध
जन्म-जन्मान्तर नास्तिक तथा असुर योनियों में रहना
भगवान् के शरणागत होने वाले मोहमुक्त महात्मा के क्या लक्षण हैं? (9.13)
वे पूर्णतः भक्ति में निमग्न रहते हैं
वे आध्यात्मिक प्रकृति के संरक्षण में रहते हैं
वे कृष्ण को काल्पनिक मानते हुए भौतिक मनुष्यों की सेवा करते हैं
एक महात्मा या शुद्धभक्त कैसे प्रगति करता है? (9.13)
अपने नाम के आगे महात्मा लिखवाकर
अन्य महात्माओं या शुद्धभक्तों की संगति से
कृष्ण को छोड़कर देवताओं या मनुष्यों का ध्यान करते हुए
मानव (नर) सेवा को माधव (नारायण) सेवा से श्रेष्ठ मानकर
कोई उदाहरण दीजिये कि आप कैसे समझते हैं कि कृष्ण हर जगह भी हैं पर फिर भी आदिपरमपुरुष के रूप में अपने धाम गोलोकवृन्दावन में निवास करते हैं |
