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Bhagavad Gita As It Is DAY-47 (11.48-55, 12.1-2)

Total questions: 25

Worksheet time: 2hrs 15mins

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Class
Date
1.

देवता कौन हैं, केवल जिन्हें ही विश्वरूप को देखने के लिए दिव्यदृष्टि प्राप्त हो सकती है? (11.48)

a)

जो भगवान् विष्णु के भक्त हैं, वे देवता हैं (विष्णुभक्ताः स्मृता देवाः)

b)

जो नास्तिक हैं, अर्थात् जो विष्णु में विश्वास नहीं करते

c)

जो कृष्ण के निर्विशेष अंश को परमेश्वर मानते हैं

2.

भगवान् को इस संसार में विश्वरूप में कैसे देखा जा सकता है? (11.48)

a)

वेदाध्ययन के द्वारा

b)

यज्ञ के द्वारा

c)

दान-पुण्य के द्वारा

d)

कठिन तपस्या के द्वारा

e)

दिव्य बने बिना दिव्य-दृष्टि प्राप्त नहीं की जा सकती

3.

विश्वरूप का दर्शन करने के लिए एकमात्र योग्यता दिव्यता को प्राप्त व्यक्ति के विषय में क्या सही है? (11.48)

a)

कृष्ण का शुद्धभक्त बने बिना कोई दिव्य नहीं बन सकता

b)

दिव्य प्रकृति के भक्त भगवान् के विश्वरूप का दर्शन करने के लिए उत्सुक नहीं रहते

4.

अर्जुन जैसा भक्त कभी भी भगवान् का विश्वरूप देखने में क्यों रूचि नहीं लेता? (11.49)

a)

भक्त शान्त होते हैं और जघन्य कर्म नहीं कर सकते

b)

विश्वरूप से प्रेमानुभूति का आदान-प्रदान नहीं हो सकता

c)

विश्वरूप को देखकर भक्त भय के कारण अवसादग्रस्त हो सकता है

5.

भगवान् ने अर्जुन को अपने जिस सुन्दर दो भुजाओं वाले रूप को दिखाकर धैर्य बंधाया, उसे क्या कहा गया है? (11.50)

a)

स्वकं रूपं

b)

सौम्य-वपुः

6.

ब्रह्मसंहिता के अनुसार कौन कृष्ण के सौम्यरूप का दर्शन कर सकता है? (11.50)

a)

जिस व्यक्ति की आँखों में प्रेमरूपी अंजन लगा है

b)

जिसकी आँखों में सही नंबर का चश्मा लगा है

c)

जिसको भगवद्गीता के सारे श्लोक कंठस्थ हैं

d)

जिसके पास जिओ का इंटरनेट कनेक्शन है

7.

विश्वरूप को समाप्त करने के बाद भगवान् कृष्ण ने पहले अर्जुन को अपना कौन सा रूप दिखाया? (11.50)

a)

चतुर्भुज रूप

b)

दो भुजाओं वाला रूप

8.

जो लोग कृष्ण को सामान्य व्यक्ति मानकर कहते हैं कि कृष्ण के भीतर का निर्विशेष ब्रह्म बोल रहा है, उनका क्या? (11.51)

a)

यदि कृष्ण सामान्य मनुष्य होते तो उनके लिए पहले विश्वरूप और फिर चतुर्भुज नारायण रूप दिखा पाना कैसे सम्भव हो पाता?

b)

शुद्ध भक्त कभी भी ऐसी गुमराह करने वाली टीकाओं से विचलित नहीं होता, क्योंकि वह वास्तविकता से अवगत रहता है

c)

भगवद्गीता के मूलश्लोक सूर्य की भाँति स्पष्ट हैं, मूर्ख टीकाकारों को उन पर प्रकाश डालने की कोई आवश्यकता नहीं है

9.

भगवान् अपने किस रूप के लिए "सुदुर्दर्शमिदं रूपं" प्रयोग करते हैं और देवता भी जिसके दर्शनों की ताक में रहते हैं? (11.52)

a)

निर्विशेष (निराकार)

b)

विश्वरूप

c)

चतुर्भुज रूप

d)

द्विभुज श्यामसुंदर रूप

10.

भक्तियोग की प्रामाणिक विधि के द्वारा कृष्ण को न जानने वाले क्या-क्या मूर्खतापूर्ण व्यवहार करते हैं? (11.52)

a)

सामान्य जन समझकर उनका उपहास करते हैं कि इतने शक्तिमान होते हुए भी उन्हें भौतिक शरीर धारण करना पड़ा

b)

उनका सम्मान न करके उनके भीतर स्थित किसी निराकार ’कुछ’ का सम्मान करते हैं

c)

उनके साकार रूप को काल्पनिक व विश्वरूप को महत्त्वपूर्ण मानते हैं, भगवान् ने निराकार से ही साकार रूप धारण किया

11.

अध्यात्मिक आँखें खोलकर प्रकट रूप में कृष्ण का दर्शन करने की क्या वैदिक विधि है? (11.52)

a)

प्रामाणिक अधिकारी भक्त से कृष्ण विषय में बारम्बार श्रवण

b)

निरन्तर कृष्णभावनामृत से तथा कृष्ण की भक्ति से

c)

विभिन्न शास्त्रों का स्वतंत्र अध्ययन और मनोधर्मिक दार्शनिक चिंतन की भौतिक विधि से

12.

(भक्तिरहित) वेदाध्ययन, कठिन तपस्या, दान, पूजा से भगवान् कृष्ण के किस रूप का साक्षात्कार संभव है? (11.48, 53)

a)

द्विभुजी सौम्य कृष्ण रूप

b)

चतुर्भुजी वैकुण्ठवासी नारायण रूप

c)

अर्जुन को दिखाया गया विश्वरूप

d)

निराकार निर्विशेष स्वरुप

13.

कृष्ण के असली रूप को कौन समझ सकते हैं? (11.53)

a)

जो केवल व्याकरण विधि से या कोरी शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर वैदिक साहित्य का अध्ययन करते हैं

b)

जो औपचारिक पूजा करने के लिए मन्दिर जाते हैं

c)

केवल भक्तिमार्ग से

14.

भगवान् किन शब्दों में प्रमाणित करते हैं कि केवल अनन्य भक्ति द्वारा ही उनको यथारूप देखा जा सकता है? (11.54)

a)

भक्त्य‍ा त्वनन्यया शक्य

b)

अहमेवंविधोऽर्जुन

c)

ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्त्वेन

d)

प्रवेष्टुं च परन्तप

15.

वैदिक साहित्य के अनुभवी विद्यार्थी किन विधि विधानों का पालन करके भगवान् कृष्ण को जान सकते हैं? (11.54)

a)

केवल अनाधिकारी कल्पना के द्वारा

b)

कृष्णजन्माष्टमी तथा मास की दोनों एकादशियों को उपवास

c)

कृष्णभावनामृत का प्रचार करने वाले व्यक्तियों को दान

d)

भगवान् की भक्ति करते हुए मंदिर-पूजा

16.

कृष्ण के विश्वरूप के विषय में क्या सही है? (11.54)

a)

यह विश्वरूप शाश्वत तथा दिव्य है

b)

विश्वरूप सुदुर्दर्शम है - देख पाने में कठिन

c)

विश्वरूप को किसी ने नहीं देखा था

d)

भक्तों को विश्वरूप देखना अत्यंत आवश्यक है

17.

भगवान् का कौनसा रूप आदिरूप है जिस पर बाकी अन्य रूप, विस्तार व अवतार आश्रित हैं और जो वेदों, पुराणों, उपनिषदों द्वारा भी प्रमाणित है? (11.54)

a)

दो भुजा वाले कृष्ण का रूप

b)

हजारों हाथों तथा हजारों सिरों वाला विश्वरूप

c)

चतुर्भुजी रूप (जो महाविष्णु के नाम से विख्यात हैं)

d)

निर्विशेष रूप

18.

हजारों हाथों तथा हजारों सिरों वाला विश्वरूप किन लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए दिखलाया गया? (11.54)

a)

जिनका ईश्वर से तनिक भी प्रेम नहीं है

b)

जो विभिन्न दिव्य सम्बन्धों में भगवान् से प्रेम करते हैं

c)

जो अपने को सकाम कर्मों द्वारा ऊपर उठाना चाहते हैं

19.

कौन निश्चित ही भगवान् को प्राप्त करते हैं? (11.55)

a)

मत्कर्मकृत - भगवान् हेतु कर्म करने में रत

b)

मत्परमः - भगवान् को परम मानने वाले

c)

मद्भक्तः - भगवान् की भक्ति में रत

d)

सङ्गवर्जितः - सकामकर्म व मनोधर्म के कल्मष से मुक्त

e)

निर्वैरः सर्वभूतेषु - शत्रुतारहित होकर मैत्रीभाव रखने वाले

20.

भक्तिरसामृत सिन्धु का कौन सा श्लोक कृष्णकर्म के विषय में बताता है? (11.55)

a)

अनासक्तस्य विषयान् यथार्हमुपयुञ्जतः |

निर्बन्धः कृष्णसम्बन्धे युक्तं वैराग्यमुच्यते ||

b)

अन्याभिलाषिताशून्यं ज्ञानकर्माद्यानावृतम् |

आनुकूल्येन कृष्णानुशिलनं भक्तिरुत्तमा ||

21.

इनमें से क्या कृष्णकर्म नहीं है? (11.55)

a)

अपनी इन्द्रियतृप्ति के लिए विशाल भवन बनवाना

b)

कृष्ण के लिए सुन्दर मंदिर बनवाना

c)

तुलसी का पौधा लगाकर उसे सींचना

d)

कृष्ण-मन्दिर की सफाई में लगना

e)

केवल कृष्णप्रसाद ग्रहण करना

22.

कृष्णभावनाभावित शुद्धभक्त के विषय में क्या सही नहीं है? (11.55)

a)

शुद्धभक्त तो मोक्ष की भी कामना नहीं करता

b)

सर्वोच्च्लोक, गोलोक वृन्दावन भी नहीं जाना चाहता

c)

कृष्णभक्त प्रत्येक से मैत्रीभाव रखता है

d)

उसका एकमात्र उद्देश्य कृष्ण की सेवा करना है

e)

प्रतिकूल भाव से सदैव कृष्ण का चिन्तन

23.

अर्जुन अव्यक्त निर्विशेष ब्रह्म की पूजा व प्रत्यक्ष भगवान् की भक्ति के विषय में क्यों पूछता है? (12.1)

a)

वह अपनी स्थिति स्पष्ट कर लेना चाहता है, क्योंकि वह कृष्ण के सगुण रूप के प्रति अनुरक्त है

b)

वह निराकारब्रह्म के प्रति आसक्त नहीं है, अतः वह जान लेना चाहता है कि उसकी स्थितिसुरक्षित तो है

24.

कृष्णभावनाभावित भक्त किस प्रकार हर कार्य कृष्ण के लिए करता है व एक क्षण भी नहीं गँवाता? (12.2)

a)

कभी कीर्तन करता है, तो कभी श्रवण करता है

b)

कृष्ण विषयक कोई पुस्तक पढता है

c)

बाजार से कृष्ण के लिए कुछ मोल लाता है

d)

कभी प्रसाद तैयार करता है, कभी बर्तन धोता है

e)

कभी मन्दिर झाड़ता-बुहारता है

25.

आप कैसे किसी को समझा सकते हैं कि कृष्ण अपने मूल रूप से विश्वरूप व नारायण रूप को प्रकट करते हैं न कि उनका मनुष्य रूप निराकार ब्रह्म से उत्पन्न कोई भौतिक रूप है?

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