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Worksheetsधर्म की आड़ पाठ
Total questions: 31
Worksheet time: 8hrs 45mins
धर्म आपकी नज़र में क्या हैं ?
लेखक के अनुसार स्वतंत्रता के समय में क्या गलती हुई?
सच्चाई को स्थान देना
धर्माचारियों को उच्च स्थान देना
धन को स्थान देना
ईमान को स्थान देना
देश में धर्म की धूम है – का आशय धर्म की आड़ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
क्या धर्म ही सब कुछ होता हैं ?
हाँ
ना
पता नहीं
धर्म और ईमान के नाम पर होने वाले व्यापार को कैसे रोकना चाहिए?
प्रेम और विश्वास के साथ
सद्भावना के साथ
शक्ति के साथ
साहस और दृढ़ता के साथ
दोसरो से लड़के
आनेवाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?
आडंबरपूर्ण धर्म
परोपकार करने वाले
आत्मा को शुद्ध करने वाले
इनमें से कोई नहीं
गणेश शंकर विद्यार्थी जी का जन्म कब हुआ था?
सन् 1890 अक्टूबर में
सन् 1861 जनवरी में
सन् 1871 मार्च में
सन् 1881 दिसंबर में
क्या आप किसी धर्म को मानते हैं ?
हाँ
बिलकुल भी नहीं
महात्मा गांधी जिस तरह से धर्म का स्वरूप माने जाते है , आप अपने जीवन में कैसे वह सवरूप अपनाएगे ?
धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या है ?
शुद्धाचरण और सदाचार
पवित्रता और अनुशासन
सच्चाई और ज़िम्मेदारी
खिलाफ़त का अर्थ क्या है ?
खलीफा का पद
खलीफा का कर्म
खलीफा का धर्म
क्या धर्म गुरु हमेशा सही होते हैं ?
क्या धर्म की उपासना के मार्ग में कोई भी रूकावट आनी चाहिए ?
हाँ
नहीं
मूर्ख व्यक्ति किसकी दुहाई देते रहते हैं ?
परिवार की
समाज की
धर्म की
इनमें से कोई नहीं
हमारे देश में,इस समय,धनपतियों का इतना जोर क्यों नहीं हैं ?
आपके हिसाब से धर्म बढ़ा है या कर्म ?
धर्म
कर्म
धर्म,कर्म दोनों
क्या आप किसी धर्म को मानते हैं ? (हाँ/ना)
लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए
धर्म की आड़ पाठ के आलोक में चालाक लोग सामान्य आदमियों से किस तरह फायदा उठा लेते हैं?
धर्म के नाम पर उन्मादी लोग क्या कुछ करने को तैयार रहते हैं ?
वे परोपकार के लिए अपना सब कुछ लोटा देते हैं
वे अपनी सारि संपत्ति दान कर देते हैं
वे अपने प्राण देने से नहीं घबराते
वे लोगो को प्राण दान देते हैं
'धर्म की आड़' पाठ मैं लेखक ने किन लोगो को बेनकाब किया हैं
जो धर्म की आड़ मैं कुटिल चालें चलते हैं
जो धर्म की आड़ को लेकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं
उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं
लेखक के विचार कितने कारगर सिद्ध हो सकते हैं ?
लेखक के विचारो का अनुसरण करके मानवता का कल्याण हो सकता हैं
धर्म को बढ़ावा मिल सकता हैं
उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं
लेखक ने किस बात पर बल दिया हैं ?
शंख बजाना
शुद्धाचरण रखना
आरती करना
खूब जब-तप करना
पाश्चात्य देशों में, धनी लोगों की क्या चीज़ गरीब मज़दूरों की झोंपड़ी का मज़ाक उड़ाती हैं ?
धन के कारण
ऊँचे-ऊँचे मकान
ईमान के कारण
सच्चाई के कारण
बुद्धि की मार के संबंध मैं लेखक के क्या विचार हैं,वह किसी की गलती मानते हैं ?
आप को क्या लगता है हमरे देश में केवल बुद्धि की मार होती है धन की नहीं ? क्या आप लेखक के विचार से सहमत है ?
यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना भिड़ाना।
अब तो, आपका पूजा-पाठ न देखा जाएगा, आपकी भलमनसाहत की कसौटी केवल आपका आचरण होगी इस पंक्ति का अपने हिसाब से अर्थ स्पष्ट कीजिये
क्यों साधारण आदमी के दील मैं यह बात अच्छी तरह से बैठी होइ हैं की धर्म और ईमान की रक्षा मैं प्राण देना उचित हैं ?
उनको लगता हैं की धर्म ही सब कुछ हैं
उनको लगता हैं की अपने धर्म के लिए वह जान दे तो उनका नाम उच्चा हो जाएगा और ईश्वर को अच्छा लगेगा
उनको भड़काया जाता हैं
वह जन्नत जाना चाहते हैं
देश की स्वाधीनता के लिए जो उद्योग किया जा रहा था,उसका वह दिन
नि ः संदेह अत्यंत बोरा था लेखक ऐसा क्यों कहते हैं अपने विचार स्पष्ट कीजिये|
क्या आप किसी से प्यार करते हैं या आप सबको प्यार करते हैं, धर्म को छोडते हैं, किसी को भी धर्म का पालन नहीं करते हैं।
क्या यार फ़िर अपना लर गाओ ?
