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Bhagavad Gita As It Is DAY-58 (16.1-10)

Total questions: 31

Worksheet time: 3hrs 45mins

Name
Class
Date
1.

भगवद्गीता यथारूप के सोलहवें अध्याय का क्या शीर्षक है?

a)

प्रकृति के तीन गुण

b)

पुरुषोत्तम योग

c)

दैवी तथा आसुरी स्वभाव

d)

श्रद्धा के विभाग

e)

उपसंहार – संन्यास की सिद्धि

2.

अभयं से लेकर नातिमानिता तक दैवी प्रकृति से सम्पन्न देवतुल्य पुरुषों में पाये जाने कितने दिव्य गुणों का उल्लेख किया गया है? (16.1-3)

a)

20

b)

23

c)

24

d)

25

e)

26

3.

कैसे कार्यों को दैवी प्रकृति कहा जाता है? (16.1-3)

a)

सतोगुण में किये गये सारे कार्य

b)

रजो तथा तमोगुण में रहकर किये गये कार्य

c)

जो मुक्तिपथ में प्रगति के लिए शुभ माने जाते हैं

d)

जिनमें मुक्ति की कोई सम्भावना नहीं रहती

e)

जिससे इसी जगत में निम्न योनियों में जाना पड़ता है

4.

वैदिक शास्त्रों के अनुसार, सामाजिक जीवन में मनुष्यों के लिए पालन किये जाने वाले दस संस्कारों में से एक, दिव्यगुणों से युक्त सन्तान उत्पन्न करने को क्या कहा जाता है? (16.1-3)

a)

जातकर्म संस्कार

b)

अन्नप्राशन संस्कार

c)

सीमन्तोनयन संस्कार

d)

पुंसवन संस्कार

e)

गर्भाधान संस्कार

5.

मैथुन-जीवन गर्हित नहीं है, यदि इसका कृष्णभावनामृत में प्रयोग किया जाय - कैसे? (16.1-3)

a)

अच्छी कृष्णभावनाभावित सन्तान उत्पन्न करने के निमित्त मैथुन-जीवन साक्षात् कृष्ण है

b)

कृष्णभावनाभावित लोगों को कुत्ते-बिल्लियों की तरह सन्तानें उत्पन्न नहीं करनी चाहिए

c)

कृष्णभावनामृत में तल्लीन माता-पिता से उत्पन्न सन्तानों को इतना लाभ तो मिलना ही चाहिए

6.

वर्णाश्रमधर्म नामक सामाजिक संस्था किस आधार पर समाज को सामाजिक जीवन के चार विभागों एवं काम-धन्धों अथवा वर्णों के चार विभागों में विभाजित करती है? (16.1-3)

a)

जन्म के अनुसार

b)

शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर

7.

समाज में शान्ति तथा सम्पन्नता बनाये रखने के निमित्त वर्णाश्रम संस्था में किसे समस्त सामाजिक वर्णों तथा आश्रमों में प्रधान या गुरु माना जाता है? (16.1-3)

a)

ब्राह्मण

b)

संन्यासी

c)

क्षत्रिय

d)

गृहस्थ

e)

ब्रह्मचारी

8.

भगवान् कृष्ण द्वारा इन दिव्य गुणों का उल्लेख करने का क्या उद्देश्य है? (16.1-3)

a)

आध्यात्मिक ज्ञान में प्रगति

b)

जिससे आध्यात्मिक जगत् से मुक्त हो सकें

c)

जिससे भौतिक जगत् से मुक्त हो सकें

d)

भौतिक ज्ञान में प्रगति

9.

अभयं सत्त्वसंश‍ुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः - निर्भयता, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक ज्ञान का अनुशीलन विशेषरूप से किसके दिव्य गुण या आवश्यक योग्यताएं बतायी गयी हैं? (16.1-3)

a)

संन्यासी

b)

गृहस्थ

c)

वानप्रस्थ

d)

वणिक वर्ग

e)

श्रमिक वर्ग

10.

इनमें से कौन संन्यास स्वीकार करने के योग्य है? (16.1-3)

a)

जो यह सोचता है कि सारे सम्बन्ध तोड़ लेने के बाद मेरी रक्षा कौन करेगा

b)

जो भौतिक सम्पत्ति तथा स्त्री की ओर इन्द्रियतृप्ति के लिए देखता है

c)

जिसका जीवन गृहस्थों तथा उन सबों को, जो आध्यात्मिक जीवन को भूल चुके हैं, ज्ञान वितरित करने के लिए होता है

11.

इनमें से कौन सी बातें गृहस्थ के लिए आवश्यक हैं? (16.1-3)

a)

दान

b)

वेदाध्ययन

c)

इन्द्रियसंयम

d)

तपस्या

e)

यज्ञ करना

12.

गृहस्थ के लिए इनमें से क्या सही है? (16.1-3)

a)

कमाई का पचास प्रतिशत विश्व भर में कृष्णभावनामृत के प्रचार में खर्च करे

b)

यदि सन्तान नहीं चाहता, तो अपनी पत्नी के साथ भी विषय-भोग में लिप्त न हो

c)

गृहस्थों का स्त्रियों से किसी प्रकार सम्बन्ध नहीं होना चाहिए

13.

अपैशुनम् का क्या अर्थ है? (16.1-3)

a)

किसी जीव के प्रगतिशील जीवन को न रोकना

b)

अपने स्वार्थ के लिए सत्य को ताड़ना-मरोड़ना

c)

दूसरे के दोष न निकाले और व्यर्थ सही न करे

d)

यदि कोई क्षुब्ध बनावे तो भी सहिष्णु बने

e)

किसी असफल प्रयास से विचलित या उदास न हो

14.

कौन सा गुण शूद्रों अर्थात् श्रमिक वर्ग के लिए है? (16.1-3)

a)

शौचम् (पवित्रता) जो मन, शरीर व व्यवहार में भी हो

b)

नाति-मानिता अर्थात् सम्मान की आशा न करना

c)

तेजस् - अत्यन्त बलशाली हो व निर्बलों की रक्षा करे

d)

सरलता (आर्जवम्)

e)

तपस् या तपस्या

15.

नरक के राजमार्ग का वर्णन करने वाले आसुरी स्वभाव वालों के गुण क्या हैं? (16.4)

a)

दम्भ - धर्म, आत्मविद्या की प्रगति का आडम्बर रचते हैं

b)

किसी शिक्षा या सम्पत्ति का अधिकारी होने का दर्प करते हैं

c)

अभिमान - लोग पूजा करें, भले ही वे सम्मान के योग्य न हों

d)

कठोरता - खरी-खोटी सुनाते हैं और नम्रता से नहीं बोलते

e)

अज्ञान - स्वैच्छिक सनकवश कार्य करते हैं, प्रमाण न मानते

16.

असुर अपनी आसुरी सम्पदा/गुण (सम्पदमासुरीम्) कब प्राप्त करते हैं? (16.4)

a)

जब वे अपनी माताओं के गर्भ में होते हैं, तभी से

b)

संग का प्रभाव है वर्ना माता के गर्भ में तो हर बच्चा शुद्ध/पवित्र ही होता है

c)

जन्म से ही और ज्यों-ज्यों वे बढ़ते हैं, त्यों-त्यों ये अशुभ गुण प्रकट होते हैं

17.

दिव्य और आसुरी गुणों में क्या अंतर है? (16.5)

a)

दिव्य गुण मोक्ष के लिए अनुकूल हैं

b)

आसुरी गुण बन्धन दिलाने के लिए हैं

c)

दिव्य गुण बन्धन दिलाने के लिए हैं

d)

आसुरी गुण मोक्ष के लिए अनुकूल हैं

18.

अर्जुन के लिए शोक (संताप) करने का कोई कारण क्यों न था कि भगवान् ने भी उसे कहा "हे पाण्डुपुत्र! तुम चिन्ता मत करो - मा शुचः"? (16.5)

a)

क्योंकि वह आसुरी गुणों के साथ नहीं वरन दैवी गुणों से युक्त होकर जन्मा है

b)

जो कोई भी जीवन के विभिन्न आश्रमों के विधानों का पालन करता है, वह दिव्य पद पर स्थित होता है

c)

क्षत्रिय के लिए शत्रु पर बाण बरसाना आसुरी माना जाता है और ऐसे कर्तव्य से विमुख होना दिव्य

19.

अर्जुन का युद्ध में सम्मिलित होना कैसे आसुरी नहीं है, वहां तो उसे कितना नरसंहार करना होगा? (16.5)

a)

वह गुण-दोषों पर विचार कर रहा था कि भीष्म-द्रोण जैसे महापुरुषों का वध किया जाये या नहीं

b)

वह न तो क्रोध के वशीभूत होकर कार्य कर रहा था, न झूठी प्रतिष्ठा या निष्ठुरता के अधीन होकर

20.

बद्धजीवोँ की दो श्रेणियों में से कौन दैवी प्रकृति से सज्जित दिव्य गुणों वाले कहलाते हैं? (16.6)

a)

नियमित जीवन बिताते हैं

b)

शास्त्र विहित विधानों को नहीं मानता

c)

अपनी सनक के अनुसार कार्य करता है

d)

शास्त्रों तथा विद्वानों के आदेशों का निर्वाह करते हैं

21.

इनमें से कौन-कौन से लक्षण या व्यवहार आसुरी हैं? (16.7)

a)

शास्त्रीय नियमों को जानते हैं, पालन करते हैं

b)

वैदिक आदेशों में कोई श्रद्धा नहीं होती

c)

स्नान, दंतमंजन, वस्त्र बदलकर स्वच्छ नहीं रहते

d)

हरे कृष्ण महामन्त्र का स्मरण-कीर्तन नहीं करते

e)

स्त्रियों को सुरक्षा के बजाय पुरुषों जैसे स्वतन्त्रता देना

22.

आज भी सारे हिन्दू समाज में किस ग्रंथ से उत्तराधिकार तथा अन्य विधि सम्बन्धी बातें ग्रहण की जाती हैं? (16.7)

a)

चरक संहिता

b)

भृगु संहिता

c)

रावण संहिता

d)

गर्ग संहिता

e)

मनु संहिता

23.

मनुसंहिता में स्त्रियों के विषय में क्या स्पष्ट कहा गया है? (16.7)

a)

स्त्री को स्वतन्त्रता न प्रदान की जाय

b)

स्त्रियों को दासी बना कर रखा जाय

c)

स्त्रियों को पुरुषों के समान ही स्वतन्त्रता प्रदान की जाय

d)

स्त्री को प्रत्येक अवस्था में सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए

24.

निर्धारित विधि-विधानों के अनुसार, बालकों की तरह स्वतंत्रता न देकर, स्त्रियों को किस प्रकार सुरक्षा दी जानी चाहिए? (16.7)

a)

बाल्यकाल में पिता द्वारा

b)

तारुण्य में पति द्वारा

c)

बुढ़ापे में बड़े पुत्रों द्वारा

d)

जूडो-कराटे सिखाकर

25.

असुरों द्वारा वैदिक आदेशों की उपेक्षा और स्त्री-पुरुष समानता की सोच का क्या प्रभाव पड़ा है?(16.7)

a)

संसार की सामाजिक स्थिति में अत्यंत सुधार हुआ है, अब हस्तिनापुर जैसा चीर-हरण कहाँ?

b)

स्त्रियों की नैतिकता में अत्योशित वृद्धि हुई है, अश्लील साहित्यों की संख्यात्मक तुलना कर लो

c)

आधुनिक शिक्षा ने नारी जीवन का एक अतिरंजित अहंकारपूर्ण बोध उपजा दिया है, अब विवाह एक कल्पना है

26.

आसुरी लोग इस संसार, इसकी विभिन्नताएं और उनकी उत्पत्ति के विषय में क्या कहते हैं? (16.8)

a)

यह जगत् मायाजाल है । इसका न कोई कारण है, न कार्य, न नियामक, न कोई प्रयोजन – हर वस्तु मिथ्या है

b)

आत्मा तथा पदार्थ में कोई अन्तर नहीं होता और जो भी सृष्टि दिखती है, वह केवल दृष्टि-भ्रम के कारण है

c)

जिस प्रकार शिशु केवल स्त्रीपुरुष के सम्भोग का फल है, उसी तरह यह संसार बिना किसी आत्मा के उत्पन्न हुआ है

27.

संसार की सृष्टि और शास्त्रों के सम्बन्ध में असुरों का ज्ञान कैसे अपूर्ण है? (16.8)

a)

प्रकृति ही इस संसार की कारणस्वरूपा है, अन्य कोई नहीं

b)

वे नहीं मानते – मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम्

c)

वे शास्त्रीय आदेशों के मानक ज्ञान में विश्वास नहीं करते

d)

वे शास्त्रों की एक व्याख्या दूसरी के ही समान मानते हैं

28.

भौतिकवादी, जिन्हें ईश्वर का कोई बोध नहीं होता, क्यों उन्हें आसुरी, बुद्धिहीन, संसार के शत्रु तथा समस्त विचारों से शून्य कहा गया है? (16.9)

a)

इन्द्रियतृप्ति के लिए लोग अधिकाधिक हिंसक तथा क्रूर होते जाते हैं– पशुओं के प्रति और अन्य मनुष्यों के प्रति भी

b)

वे नहीं जानते कि एक दूसरे से कैसे व्यवहार किया जाय, भौतिक अविष्कारों को मानवता का विकास माना जाता है

c)

वे अधिक से अधिक भोग करने का प्रयत्न करते हैं, अन्ततः ऐसा अविष्कार करते हैं जिससे सबका विनाश हो जाय

29.

आसुरी लोग किन अशुचि-व्रताः - अपवित्र आदतों की ओर आसक्त होते हैं? (16.10)

a)

मद्य

b)

वेश्यावृत्ति

c)

द्यूत क्रीडा

d)

हरिनाम का उच्चारण

e)

मांसाहार

30.

भौतिक भोग के लिए क्षणभंगुर वस्तुओं को स्वीकार करने के कारण असुर प्रवृत्ति के लोग कैसा व्यवहार करते हैं? (16.10)

a)

कभी तृप्त न होने पर भी भोग की इच्छाएँ बढ़ाते चले जाते हैं

b)

सदैव चिन्तामग्न हैं, तो भी मोहवश गलत दिशा में जाते हैं

c)

निजी ईश्वर, निजी मन्त्र बनाते हैं और उनका कीर्तन करते हैं

d)

कामभोग व धन संचय की ओर अधिकाधिक विरक्त होते हैं

e)

दर्प तथा अहंकार से रहित होकर स्वर्ग की ओर बढ़ते रहते हैं

31.

अपने अंदर झांककर देखें और एक-एक दैवी व आसुरी गुण ढूंढकर लिखें |

उनका क्या करना है वह आप बखूबी जानते हैं |

4 lines