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Bhagavad Gita As It Is DAY-26 (6.19-28)

Total questions: 26

Worksheet time: 2hrs 16mins

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Date
1.

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति अपने आराध्य देव के चिन्तन में किस प्रकार अविचलित रहता है? (6.19)

a)

जिस प्रकार वायुरहित स्थान में एक दीपक रहता है

b)

जिस प्रकार लहरों के बीच समुद्र में नौका बहती है

c)

जिस प्रकार गड्ढे वाली सड़क पर गाड़ी चलती है

d)

जिस प्रकार शत्रुओं से घिरा राजा राज्य करता है

2.

भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णित योगाभ्यास किस पद्धति पर आधारित है? (6.20-23)

a)

पतञ्जलि

b)

अद्वैतवाद

c)

बुद्ध

d)

कर्मकाण्ड

3.

योगाभ्यास के द्वारा योगी का समाधि में स्थित होने का क्या अर्थ है? (6.20-23)

a)

दिव्य मन तथा बुद्धि के द्वारा अपने आपको परमात्मा समझने का भ्रम

b)

दिव्य मन तथा बुद्धि के द्वारा परमात्मा की अनुभूति

4.

अप्रामाणिक भाष्यकार और अद्वैतवादी क्या मनगढंत धारणाएं करते हैं जो पतञ्जलि के योगशास्त्र व भगवान् कृष्ण के वक्तव्यों के बिलकुल विपरीत हैं? (6.20-23)

a)

जीवात्मा तथा परमात्मा में अभेद स्थापित करने को मुक्ति मानते हैं

b)

दिव्य इन्द्रियों द्वारा अनुभूत दिव्य आनन्द को स्वीकार नहीं करते

5.

पुरुषार्थ का तात्पर्य क्या है? (6.20-23)

a)

धर्म

b)

अर्थ

c)

काम

d)

मोक्ष

6.

मोक्ष, कैवल्यं या मुक्ति को श्रीमद्भागवत में किन शब्दों में कहा गया है? (6.20-23)

a)

परब्रह्म से तादात्म्य

b)

स्वाभाविक स्थिति से अवगत कराने वाली दिव्य शक्ति

c)

चेतोदर्पणामार्जनम् अर्थात् मन रूपी मलिन दर्पण का मार्जन

d)

स्वरूपेण व्यवस्थितिः

7.

इनमें से क्या सही नहीं है? (6.20-23)

a)

भौतिक दूषण से अध्यात्मिक जीवन के कल्मष युक्त होने की अवस्था माया है

b)

भौतिक दूषण से मुक्ति का अभिप्राय जीवात्मा की मूल दिव्य स्थिति का विनाश है

8.

वेदान्तसूत्र किन शब्दों में वर्णन करता है कि दिव्य आनन्द ही वास्तविक जीवन है? (6.20-23)

a)

कैवल्यं स्वरूपप्रतिष्ठा वा चितिशक्तिरिति

b)

आनन्दमयोभ्याऽसात्

c)

स्वरूपेण व्यवस्थितिः

9.

योगपद्धति के अनुसार संसारी आनन्द व इन्द्रियों से प्राप्त होने वाले सभी प्रकार के सुखों से परे की स्थिति कौन सी समाधि कहलाती है? (6.20-23)

a)

सम्प्रज्ञात

b)

असम्प्रज्ञात

10.

योगी होकर यदि कोई मैथुन तथा मादकद्रव्य सेवन में अनुरक्त होता है तो यह कैसा है? (6.20-23)

a)

योग के सर्वथा विपरीत है

b)

उपहासजनक है

c)

सिद्ध अवस्था को प्राप्त करना है

d)

योग में आरूढ़ (स्थित) होना है

11.

इस दम्भ-प्रधान युग में कौन सी योग विधि अवरोध या निराशा उत्पन्न करने वाली न होकर इतना आनंद प्रदान करती है कि किसी अन्य सुख की आकांशा नहीं रह जाती? (6.20-23)

a)

हठयोग

b)

ध्यानयोग

c)

ज्ञानयोग

d)

भक्तियोग

12.

आहार, निद्रा, भय तथा मैथुन – को क्यों पूरा करना होता है? (6.20-23)

a)

क्योंकि ये शरीर की आवश्यकताएँ हैं

b)

क्योंकि ये आत्मा की आवश्यकताएँ हैं

13.

शुद्ध भक्तियोग में स्थित व्यक्ति शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति करते समय कैसे व्यवहार करता है? (6.20-23)

a)

इन्द्रियों को उत्तेजित करके स्वयं भी उत्तेजित हो जाता है

b)

जीवन की न्यूनतम आवश्यकतापूर्ति में संतुष्ट नहीं होता

c)

दुर्घटनाओं में कर्तव्य-पथ से विचलित हो जाता है

d)

रोगों, अभावों और मृत्यु के प्रति भी निरपेक्ष रहता है

e)

भक्तियोग सम्बन्धी कर्मों को पूरा करने में सचेष्ट रहता है

14.

भगवान् का योगी के प्रति क्या निर्देश है? (6.24)

a)

मनोधर्म से उत्पन्न समस्त इच्छाओं को पूरा करे

b)

मन के द्वारा सभी इन्द्रियों के वश में रहे

c)

अंततः योगपथ से विचलित हो जाए

d)

संकल्प तथा श्रद्धा के साथ योगाभ्यास में लगे

15.

गरुड़ उस नन्हीं गौरैया के किस गुण से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसकी सहायता करने का वचन दिया? (6.24)

a)

उत्साह

b)

निश्चय

c)

धैर्य

d)

प्रार्थना

16.

कृष्णभावनामृत में भक्तियोग का अभ्यास करने वाले के लिए क्या सही है? (6.24)

a)

सफलता मिलने में विलम्ब हो तो निरुत्साहित न हो क्योंकि दृढ़ अभ्यासी की सफलता सुनिश्चित है

b)

जो कोई संकल्प के साथ नियमों का पालन करता है, भगवान् निश्चित रूप से उसकी सहायता करते हैं

17.

धीरे-धीरे सारे इन्द्रियकर्म करने बन्द कर देना क्या कहलाता है? (6.25)

a)

प्रत्याहार

b)

प्राणायाम

c)

धारणा

d)

ध्यान

e)

आसन

18.

इनमें से क्या सही है? (6.25)

a)

मन को विश्वास, ध्यान तथा इन्द्रिय-निवृत्ति द्वारा वश में करते हुए समाधि में स्थिर करना चाहिए

b)

जब तक इस शरीर का अस्तित्व है तब तक पदार्थ में लगे रहकर इन्द्रियतृप्ति के विषय में ही सोचना चाहिए

c)

परमात्मा के आनन्द के अतिरिक्त किसी अन्य आनन्द का चिन्तन नहीं करना चाहिए

19.

मन अपनी चंचलता तथा अस्थिरता के कारण जहाँ कहीं भी विचरण करता हो तब मनुष्य क्या करे, उसके लिए भगवान् का क्या उपदेश है? (6.26)

a)

उसे वहाँ से खींचे और अपने वश में लाए

b)

उसके पीछे-पीछे लुढ़के और शांत होने का इन्तजार करे

20.

जो मन के वशीभूत व इन्द्रियों का सेवक होता है, वह क्या कहलाता है? (6.26)

a)

गोस्वामी

b)

गोदास

21.

इन्द्रियों के स्वामी के रूप में भगवान् कृष्ण का क्या नाम है? (6.26)

a)

गोविन्द

b)

हृषिकेश

c)

गोपाल

d)

मधुसूदन

22.

कृष्णभावनामृत, योगाभ्यास की परम सिद्धि अर्थात दिव्य इन्द्रियसुख क्या है? (6.26)

a)

शुद्ध इन्द्रियों के द्वारा कृष्ण की सेवा

b)

मन की इच्छानुसार इन्द्रियों की तृप्ति

23.

रजोगुण तथा भौतिक कल्मष से मुक्त होना क्या है? (6.27)

a)

मन का भगवान् के चरणकमलों में स्थिर होना

b)

भगवान् की दिव्य प्रेमभक्ति में निरन्तर प्रवृत्त रहना

c)

कृष्णभावनामृत में रहना

24.

भौतिक कल्मष से मुक्त होकर भगवान् की दिव्यसेवा में स्थित होना कौन सी अवस्था है? (6.27)

a)

ब्रह्मभूत

b)

ब्रह्मप्रेत

c)

ब्रह्मात्मा

d)

ब्रह्मराक्षस

25.

इनमें से क्या सही नहीं है? (6.28)

a)

आत्म-साक्षात्कार का अर्थ है – भगवान् के सम्बन्ध में अपनी स्वाभाविक स्थिति को जानना

b)

जीव (आत्मा) भगवान का अंश है और उसकी स्थिति भगवान् की बजाय स्वयं भोग करते रहना है

c)

ब्रह्म के साथ दिव्य सान्निध्य ही ब्रह्म-संस्पर्श कहलाता है

26.

मन जब अगली बार मुझे तंग करेगा तो मैं _________________________

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