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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-32 (8.2-11)
Total questions: 24
Worksheet time: 2hrs 10mins
अर्जुन ने भगवान् से क्या प्रश्न पूछे? (8.2)
यज्ञ का स्वामी कौन है और वह शरीर में कैसे रहता है?
मृत्यु के समय भक्ति में लगे रहने वाले आपको कैसे जान पाते हैं?
अर्जुन ने भगवान् को मधुसूदन कहकर क्यों सम्बोधित किया? (8.2)
क्योंकि कृष्ण ने मधु नामक असुर का वध किया था
जिससे कृष्ण उस के मन में उठने वाली समस्त आसुरी शंकाओं को नष्ट कर दें
क्योंकि कृष्ण मधुवन में विहार करते हैं और मधु के समान मधुर हैं
कौन प्रार्थना करते हैं, “हे भगवान्! इस समय मैं पूर्ण स्वस्थ हूँ | अच्छा हो कि मेरी मृत्यु इसी समय हो जाय जिससे मेरा मन रूपी हंस आपके चरणकमलोंरूपी नाल के भीतर प्रविष्ट हो सके”? (8.2)
महाराज खट्वांग
महाराज मुचुकुन्द
महाराज कुलशेखर
महाराज चित्रकेतु
सही विकल्प पहचानें | (8.3)
ब्रह्म का अर्थ है भगवान् और परब्रह्म का अर्थ जीव है
भौतिक चेतना में जीव का स्वभाव पदार्थ पर प्रभुत्व जताना है
आध्यात्मिक चेतना या कृष्णभावनामृत में जीव की स्थिति परमेश्वर की सेवा करना है
वैदिक साहित्य में जीव को क्या-क्या कहा जाता है? (8.3)
आत्मा
जीवात्मा
परमात्मा
ब्रह्म
परब्रह्म
छांदोग्य उपनिषद् में दिए वैदिक यज्ञ-अनुष्ठानों के वर्णन के अनुसार कौन सी अग्नियां उनकी सही आहुति के साथ लिखी गयी हैं? (8.3)
स्वर्गलोक - श्रद्धा
बादल - सोम
पृथ्वी - वर्षा
मनुष्य - अन्न
स्त्री - वीर्य
अधिभूत, अधिदैव, अधियज्ञ की सही व्याख्या चुनिए | (8.4)
निरन्तर परिवर्तनशील यह भौतिक प्रकृति अधिदैव कहलाती है
भगवान् का विराट रूप, जिसमें सूर्य-चन्द्र जैसे समस्त देवता सम्मिलित हैं, अधिभूत (भौतिक अभिव्यक्ति) कहलाता है
प्रत्येक देहधारी के हृदय में परमात्मा स्वरूप स्थित परमेश्वर कृष्ण (यज्ञ का स्वामी) अधियज्ञ कहलाते हैं
भौतिक शरीर में, उत्पन्न होने से विलुप्त होने के बीच में, कौन-कौन सी अवस्थाएं होती हैं? (8.4)
बढ़ते हैं
कुछ काल तक रहते हैं
कुछ गौण पदार्थ उत्पन्न करते हैं
क्षीण होते हैं
अधिदैवत नामक भगवान् के विराट स्वरूप का चिन्तन किस के लिए है? (8.4)
जो भगवान् के परमात्मा स्वरूप तक नहीं पहुँच पाते
नवदीक्षित, नौसीखिए भक्तों के लिए
कृष्णभावनाभावित भक्तों के लिए
भगवान् द्वारा प्रयुक्त शब्द - मद्भावं - का क्या तात्पर्य है? (8.5)
कृष्णभावनामृत में अपना शरीर छोड़ने वाला परमेश्वर का दिव्य स्वभाव प्राप्त करता है
परमेश्वर शुद्धातिशुद्ध है, अतः कृष्णभावनाभावित व्यक्ति भी शुद्धातिशुद्ध होता है
भक्ति करते हुए शरीर छोड़ने वाला भक्त तुरंत भगवान् बन जाता है
श्रीकृष्ण के स्मरण के विषय में क्या सही है? (8.5)
यदि जीवन के अन्त में सफलता वांछनीय है तो कृष्ण का स्मरण अनिवार्य है
अशुद्ध व्यक्ति भी, जिसने कभी कृष्णभावनामृत का अभ्यास नहीं किया, कृष्ण का स्मरण कर सकता है
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे – का जप करने से कृष्ण स्मरण हो सकेगा
क्या मृत्यु के पश्चात सभी को एक समान ही स्थिति प्राप्त होती है? (8.6)
हाँ, मरने के बाद सब ख़त्म, पहले क्या किया या क्या नहीं उससे क्या?
जो व्यक्ति अन्त समय कृष्ण का चिन्तन करते हुए शरीर त्याग करता है, उसे परमेश्वर का दिव्य स्वभाव प्राप्त होता है
नहीं, महाराज भरत ने मृत्यु के समय एक हिरन का चिन्तन किया, अतः अगले जीवन में हिरन बनना पड़आ
मृत्यु के बाद अगला शरीर आध्यात्मिक हो, उसके लिए क्या करना होगा? (8.6)
जो अन्त समय कृष्ण-चिन्तन करते हुए शरीर त्यागता है, उसे परमेश्वर का दिव्य स्वभाव प्राप्त होता है
जीवन भर के संचित विचार मृत्यु के समय विचारों को प्रभावित करते हैं
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे का जप सर्वश्रेष्ठ विधि है
भौतिक कार्यों में व्यस्त रहने वाले समस्त व्यक्तियों के लिए भगवान् का क्या उपदेश है? (8.7)
अपने कर्तव्यों को त्याग दे
अपने कर्तव्यों को करते हुए साथ-साथ सदैव हरे कृष्ण का जप करें
मन तथा बुद्धि को कृष्ण में प्रवृत्त करें और बाकी कर्तव्य न करें
किस प्रकार मन से निरंतर स्मरण करें कि भगवान् को सुगमता से प्राप्त किया जा सके? (8.8)
हरे कृष्ण महामन्त्र का जप करने से कृष्ण की स्मृति हो आती है
जप तथा श्रवण के अभ्यास से मनुष्य के कान, जीभ तथा मन व्यस्त रहते हैं
आवश्यक है कि चंचल मन को बलपूर्वक कृष्ण-चिन्तन में लगाया जाय
हरे कृष्ण का जप करके निरंतर भगवान् का चिंतन करने से क्या होता है? (8.8)
ऐसा करने से व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है
फालतू समय व्यतीत करने का अच्छा तरीका है
जीवन के अन्त में भगवद्धाम को जाता है
जीवन के अन्त में कृष्ण का शरीर प्राप्त होगा
परमपुरुष को 'अचिन्त्य' कहने का क्या अर्थ है? (8.9)
निराकार या शून्य
हमारी कल्पना या विचार शक्ति के परे
भगवान् भौतिक जगत् में व्याप्त हैं फिर भी इससे परे हैं
जो अकल्पनीय है
तर्क, नीतिशास्त्र तथा दार्शनिक चिन्तन द्वारा अस्पृश्य
भगवान् परमात्मा के रूप में अणु आत्मा के ________________ (8.9)
ऊपर आवरण के रूप में रहते हैं
हृदय में प्रविष्ट रहते हैं
भगवान् कवि हैं अर्थात् ________________ (8.9)
वे अच्छी कवितायें लिखते हैं
वे भूत, वर्तमान तथा भविष्य के ज्ञाता हैं
वे सब कुछ जानने वाले नहीं हैं
भगवान् द्वारा संस्तुत षट्चक्रयोग के अनुसार मृत्यु के समय प्राणों को स्थित करने के लिए भौहों के बीच वाला स्थान क्या कहलाता है? (8.10)
मूलाधार चक्र
अनाहत चक्र
स्वाधिष्ठान चक्र
आज्ञा चक्र
मणिपुर चक्र
क्या भक्तियोगी को मृत्यु के समय भगवान् का स्मरण करके दिव्य स्थिति प्राप्त करने के लिए षट्चक्रयोग का पालन आवश्यक है? (8.10)
नहीं, शुद्ध भक्त भगवत्कृपा से मृत्यु के समय योगाभ्यास के बिना भगवान् का स्मरण कर सकता है
किसी भी योग की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कोई भी मृत्यु-समय परमेश्वर का सहसा स्मरण कर सकता है
बिल्कुल, भक्तियोगी कोई विशेष है क्या? भगवान् ने यह विधि फिर दी ही किसलिए?
ज्ञान की वैदिक पद्धति में छात्रों को प्रारम्भ से क्या शिक्षा दी जाती थी? (8.11)
ब्रह्मचर्य व्रत का पालन
ओंकार का उच्चारण
परमनिर्विशेष ब्रह्म की शिक्षा
धनोपार्जन
इस कलियुग के लिए शास्त्रों के आदेशानुसार परमेश्वर के साक्षात्कार का क्या उपाय है? (8.11)
भगवान् कृष्ण के पवित्र नाम – हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे – का जप
ब्रह्मचर्य के बिना आध्यात्मिक जीवन में उन्नति करना
आप – हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे – के जप से क्या लाभ का अनुभव करते हैं?
