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41. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_9.13–9.18

Total questions: 45

Worksheet time: 1hrs 16mins

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Class
Date
1.

कृपया यहाँ पर अपना नाम लिखें।

4 lines
2.

कृपया यहाँ पर अपनी आयु लिखें।

4 lines
3.

कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल नं0 लिखें।

4 lines
4.

कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें।

4 lines
5.

श्लोक संख्या 9.13 में निम्न में से किसका वर्णन हुआ है ?

a)

महात्मा का

b)

भगवद्महिमा का

c)

दुरात्मा का

d)

महापुरुष का

6.

श्लोक संख्या 9.13 में वर्णित भक्त द्वारा दिव्यता प्राप्त करने का मूलभूत सूत्र क्या है ?

a)

भक्त का भगवान् श्रीकृष्ण के पूर्ण शरणागत् होना ।

b)

भक्त का निर्विशेष ब्रह्म में पूर्ण शरणागत् होना ।

c)

भक्त का ब्रह्मज्योति में पूर्ण विलीन हो जाना ।

d)

भक्त का भगवान् के विषय में शुष्क मानसिक चिंतन करना ।

7.

महात्मा का पहला लक्षण क्या है ?

a)

वह दैवी प्रकृति में स्थित रहता है ।

b)

वह भौतिक प्रकृति में स्थित रहता है ।

c)

वह अपरा प्रकृति में स्थित रहता है ।

d)

वह तटस्था प्रकृति का होता है ।

8.

महात्मा कौन कहलाता है ?

a)

आध्यात्मिक प्रकृति के निर्देशन में स्थित भगवान् के शरणागत् व्यक्ति महात्मा कहलाता है ।

b)

सामाजिक एवं जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए अपना जीवन, अपनी धन-सम्पति आदि को समर्पित करने वाला व्यक्ति महात्मा कहलाता है ।

c)

महात्मा गाँधी जैसा व्यक्ति जो अपना सारा जीवन देशहित के कार्यों के लिए न्यौछावर कर देता है वह महात्मा कहलाता है ।

d)

भौतिक प्रकृति के निर्देशन में स्थित भगवान् के शरणागत् व्यक्ति महात्मा कहलाता है ।

9.

निम्न में से कौन महात्मा है ?

a)

अनन्य भक्त

b)

अनन्य ज्ञानी

c)

अनन्य योगी

d)

अनन्य कर्मी

10.

निम्न में से कौन सा लक्षण महात्मा का नहीं है ?

a)

महात्मा सदैव भगवान् की महिमा के गुणगान में व्यस्त रहता है ।

b)

महात्मा पाँच रसों में से किसी एक में भगवान् की संगति प्राप्त करने के लिए दृढ़ता से प्रयास करता है ।

c)

महात्मा नवधा भक्ति के माध्यम से निरन्तर भगवान् की सेवा में संलग्न रहता है ।

d)

महात्मा भगवान् को मनोधर्म द्वारा समझने के लिए प्रतिक्षण शुष्क मानसिक चिंतन में अवशोषित रहता है ।

11.

एक साधारण भौतिकतावादी व्यक्ति महात्मा कैसे बनता है ?

a)

अन्य महात्माओं या शुद्ध भक्तों की संगति प्राप्त करके ।

b)

देश भक्तों या अन्य स्वतंत्रता सैनानियों की संगति प्राप्त करके ।

c)

जन-कल्याण के लिएअपना समस्त धन-सम्पत्ति, वैभव त्याग कर ।

d)

समस्त मानव जाति के भौतिक लाभ के उद्यम करके ।

12.

निम्न में से कौन सा लक्षण शुद्ध भक्त का नहीं होता है ?

a)

शुद्ध भक्त कृष्ण के श्याम सुन्दर रूप के अतिरिक्त किसी भी रूप के प्रति आकृष्ट नहीं होते हैं ।

b)

शुद्ध भक्त कृष्णभावनामृत में केवल कृष्ण का ही ध्यान करते हैं, विष्णु, शिव, ब्रह्मा या किसी देवता का नहीं ।

c)

शुद्ध भक्त कृष्णभावनामृत में निरंतर भगवान् की अविचल सेवा में ही लगे रहते हैं ।

d)

यह सभी एक शुद्ध भक्त के लक्षण हैं ।

13.

क्या किसी भी व्यक्ति को हम महात्मा कह सकते हैं ?

a)

नहीं, केवल पूर्ण कृष्णभावनाभवित व्यक्ति को ही महात्मा कहा जा सकता है ।

b)

हाँ, वह प्रत्येक व्यक्ति महात्मा कहलाता है जो अपने नियत कर्मों को अपने कर्त्तव्य समझकर निभाता है ।

c)

नहीं, केवल उसी व्यक्ति को महात्मा कहा जा सकता है जिसने अपने देश, मानव समाज आदि के लिए कोई अद्वितीय कार्य किया हो ।

d)

हाँ, भगवाँ वस्त्र धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति महात्मा कहलाता है ।

14.

महात्मा का मुख्य लक्ष्ण क्या होता है ?

a)

पूर्ण कृष्णभावनाभावित होना - महात्मा सदैव भगवान् श्रीकृष्ण के गुण-गान में व्यस्त रहता है ।

b)

अनुयायी बनाने में क्षमता - किसी भी महात्मा की पहचान उसके अनुयायियों की संख्या बल से होती है ।

c)

वैभव प्रदर्शन में कुशलता - किसी भी महात्मा की पहचान उसके वैभव से होती है ।

d)

भाष्य में दक्षता - किसी महात्मा की मुख्य पहचान उसकी ज्ञान तथा वाणी से होती है ।

15.

भगवान् का गुण-गान करने की प्रामाणिक विधि क्या है ?

a)

प्रामाणिक गुरु-परम्परा से भगवान् तथा भगवान् की महिमा का ज्ञान प्राप्त करना ।

b)

प्रामाणिक गुरु के निर्देशन में भक्तियोग का अनुशीलन करना ।

c)

भगवान् के पवित्र नाम, रूप, गुणों तथा लीलाओं की प्रशंसा करते हुए उनका महिमा मण्डन करना।

d)

यह सभी भगवान् का गुण-गान करने की प्रामाणिक विधि के महत्त्वपूर्ण अंग हैं ।

16.

जो व्यक्ति ब्रह्मज्योति, निराकार रूप की ओर आकर्षित होते हैं क्या वो महात्मा कहलाते हैं ?

a)

नहीं, भगवद्गीता में इन्हें महात्मा नहीं कहा गया है ।

b)

हाँ, निर्विशेषवादियों को भी महात्मा कहा जाता है ।

c)

नहीं, क्योंकि निर्विशेषवादी भगवाँ वस्त्र नहीं पहनते हैं ।

d)

हाँ, क्योंकि निर्विशेषवादी भी ज्ञान का अनुशीलन करते हैं ।

17.

पूर्ण कृष्णभावनामृत क्या होता है ?

a)

मन, वाणी, कर्म से अपने सारे कार्यकलापों को भगवान् श्रीकृष्ण की सेवा में लगाना पूर्ण कृष्णभावनामृत कहलाता है ।

b)

मन, बुद्धि, कर्म से अपने सारे कार्यकलापों को भगवान् श्रीकृष्ण की सेवा में लगाना पूर्ण कृष्णभावनामृत कहलाता है ।

c)

मन तथा धन से भगवान् श्रीकृष्ण की सेवा करना पूर्ण कृष्णभावनामृत कहलाता है ।

d)

यह सभी कथन मिथ्या हैं

18.

निम्न में से कौन से कार्य हैं जिन्हें भक्ति में दृढ़व्रत कहा गया है ?

a)

प्रत्येक एकादशी तथा जन्माष्टमी का उपवास करना ।

b)

वैष्णव आचार्यों का अनुकरण करना ।

c)

प्रसिद्ध आध्यात्मिक प्रवंचक बनने के लिए वैदिक शास्त्रों का अहर्निश अध्ययन करना ।

d)

यह सभी कार्य भक्ति में दृढ़व्रत कहलाते हैं ।

19.

क्या हम भी कभी महात्मा बन सकते हैं ?

a)

हाँ, यदि हम प्रामाणिक निर्देशन के अधीन श्रील प्रभुपाद जी की शिक्षाओं, निर्देशों तथा विधि-विधानों का दृढ़तापूर्वक पालन करते हैं, तो निश्चय ही हम महात्मा बन सकते हैं ।

b)

नहीं, हम जैसे सामान्य एवं योग्यताविहीन जीव कभी महात्मा नहीं बन सकते हैं ।

c)

हाँ, यदि हम श्रील प्रभुपाद जी की शिक्षाओं, निर्देशों तथा विधि-विधानों का दृढ़तापूर्वक पालन करते हैं, तो हम निश्चय ही महात्मा बन सकते हैं ।

d)

नहीं, हम सभी जीवात्माएँ पहले से ही महात्मा हैं, हमें महात्मा बनने के लिए किसी भी प्रकार के मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं है ।

20.

निम्न में से कौन सा ज्ञानी ज्ञानार्जन द्वारा भगवान् की उपासना में नहीं लगता है ?

a)

एकत्वेन

b)

पृथक्त्वेन

c)

विश्वतःमुखम

d)

अर्थार्थी

21.

श्लोक संख्या 9.15 में निम्न में से किसे एकत्वेन ज्ञानी कहा गया है ?

a)

परमेश्वर तथा अपने को एक मानकर पूजा करने वाले ।

b)

परमेश्वर के किसी मनोकल्पित रूप की पूजा करने वाले ।

c)

परमेश्वर के विश्व रूप की पूजा करने वाले ।

d)

परमेश्वर के ब्रह्मज्योति स्वरूप की पूजा करने वाले ।

22.

श्लोक संख्या 9.15 में निम्न में से किसे पृथक्त्वेन ज्ञानी कहा गया है ?

a)

परमेश्वर तथा अपने को एक मानकर पूजा करने वाले ।

b)

परमेश्वर के किसी मनोकल्पित रूप की पूजा करने वाले ।

c)

परमेश्वर के विश्व रूप की पूजा करने वाले ।

d)

परमेश्वर के ब्रह्मज्योति स्वरूप की पूजा करने वाले ।

23.

श्लोक संख्या 9.15 में निम्न में से किसे विश्वतःमुखम ज्ञानी कहा गया है ?

a)

परमेश्वर तथा अपने को एक मानकर पूजा करने वाले ।

b)

परमेश्वर के किसी मनोकल्पित रूप की पूजा करने वाले ।

c)

परमेश्वर के विश्व रूप की पूजा करने वाले ।

d)

परमेश्वर के ब्रह्मज्योति स्वरूप की पूजा करने वाले ।

24.

श्लोक संख्या 9.15 में वर्णित ज्ञानियों में से कौन सा ज्ञानी अधम होता है ?

a)

परमेश्वर तथा अपने को एक मानकर पूजा करने वाले ।

b)

परमेश्वर के किसी मनोकल्पित रूप की पूजा करने वाले ।

c)

परमेश्वर के विश्व रूप की पूजा करने वाले ।

d)

परमेश्वर के ब्रह्मज्योति स्वरूप की पूजा करने वाले ।

25.

अद्वैतवादियों को ज्ञानियों की श्रेणी में सबसे अधम माने जाने पर भी उनका एक भाव प्रशंसनीय है। वह कौन सा भाव है ?

a)

स्वयँ को शरीर न मानकर आत्मा मानने का भाव ।

b)

स्वयँ को भगवान् के तुल्य मानने का भाव ।

c)

परमेश्वर के रूप में अपनी पूजा करने का भाव ।

d)

परमपिता परमात्मा में विलीन हो जाने का भाव ।

26.

निम्न में से कौन से ज्ञानी हैं जो ब्रह्माण्ड को ही परम जीव या सत्ता मानकर उसकी उपासना करते हैं ?

a)

एकत्वेन

b)

पृथक्त्वेन

c)

विश्वतःमुखम

d)

अर्थार्थी

27.

महात्माओं, सुकृतिनः, ज्ञानियों के विषय में चर्चा के उपरांत श्लोक संख्या 9.16 में भगवान् श्री कृष्ण अब किसके विषय में बताते हैं ?

a)

दुष्कृतिनः के ।

b)

चाण्डालों के ।

c)

कर्मकाण्डियों के ।

d)

भक्तों के ।

28.

श्लोक संख्या 9.16 का क्यों महत्वपूर्ण है ?

a)

ताकि हम जैसे कर्मकांडी व्यक्ति यह जान सकें कि देवताओं को प्रसन्न करके मनवांछित फल प्राप्त करने हेतु जो यज्ञ, यज्ञ-विधि, यज्ञ-सामग्री, प्रयुक्त होती है वह भी कृष्ण ही हैं ।

b)

ताकि हम जैसे कर्मकांडी व्यक्ति यह जान सकें कि देवताओं की प्रसन्नता तथा देवताओं की कृपा दोनों के परम स्रोत कृष्ण हैं ।

c)

ताकि हम जैसे कर्मकांडी व्यक्ति यह जान सकें कि सभी वस्तुएँ कृष्ण हैं ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

29.

क्या श्लोक संख्या 9.16 में भगवान् श्रीकृष्ण ने यज्ञ, यज्ञ-विधि, यज्ञ-सामग्री को स्वयँ का रूप इसलिए बताया क्योंकि वह यज्ञपति हैं ?

a)

नहीं, भगवान् श्रीकृष्ण ने यहाँ यह भी स्थापित किया कि वह केवल यज्ञ के अंतिम लक्ष्य ही नहीं हैं अपितु यज्ञ में प्रयुक्त होने वाली प्रत्येक वस्तु के स्रष्टा भी हैं ।

b)

हाँ, केवल अपनी भगवत्ता स्थापित करने के लिए भगवान् श्रीकृष्ण ने ऐसा कहा ।

c)

नहीं, यहाँ यह भी स्थापित हुआ है कि कृष्ण ने केवल अपनी प्रसन्नता के लिए ही प्रत्येक वस्तु की संरचना की है ।

d)

हाँ, ताकि हम यज्ञ के रहस्य को यज्ञ पति की दृष्टिकोण से समझ सकें ।

30.

निम्न वस्तुओं में से श्लोक संख्या 9.16 में किस वस्तु का वर्णन नहीं हुआ है ?

a)

यज्ञ ।

b)

पितरों को दिया जाने वाला तर्पण ।

c)

अग्नि ।

d)

पृथ्वी ।

31.

श्लोक संख्या 9.16 में भगवान् श्रीकृष्ण का मुख्य संदेश क्या है ?

a)

यह कि कृष्ण भक्त वेदविहित समस्त यज्ञ संपन्न किए हुए रहते हैं ।

b)

यह कि कृष्ण भक्ति में रत भक्तों को भी वेदसम्मत कर्मकाण्ड को करने की आवश्यकता होती है ।

c)

यह कि कृष्ण भक्ति आरंभ करने से पूर्व वैदिक अनुष्ठान करने अति आवश्यक हैं ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

32.

यह सारा चराचर विराट जगत् क्या है ?

a)

यह कृष्ण की शक्ति के विभिन्न कार्यकलापों की अभिव्यक्ति है ।

b)

यह एक अदृश्य शक्ति की अभिव्यक्ति मात्र है ।

c)

यह ब्रह्मा-विष्णु-महेश की संयुक्त शक्ति की पूर्ण अभिव्यक्ति है ।

d)

यह सभी कथन मिथ्या हैं ।

33.

क्या हम सभी जीव भी कृष्ण हैं ।

a)

हाँ, कृष्ण के अंश होने के नाते हम सभी जीव भी कृष्ण हैं । परंतु कृष्ण स्वामी हैं और हम सब उनके सेवक हैं ।

b)

नहीं, हम सभी जीव कृष्ण से भिन्न हैं ।

c)

हाँ, हम सभी जीव कृष्ण के समान हैं ।

d)

यह सभी कथन मिथ्या हैं ।

34.

वेदों का अंतिम लक्ष्य क्या है ?

a)

कृष्ण ।

b)

निराकार ब्रह्म ।

c)

अदृश्य शक्ति ।

d)

आध्यात्मिक ज्ञान ।

35.

हमारी स्वाभाविक स्थिति की शुद्धि करता कौन है ?

a)

कृष्ण ।

b)

निराकार ब्रह्म ।

c)

अदृश्य शक्ति ।

d)

शिव ।

36.

प्रणव किसे कहते हैं ?

a)

ओंकार को ।

b)

शब्द ध्वनि को ।

c)

ब्रह्मांड की गर्जना को ।

d)

वेणु ध्वनि को ।

37.

श्लोक संख्या 9.16 में भगवान् श्रीकृष्ण का मुख्य संदेश क्या है ?

a)

यह कि कृष्ण ही वेद तथा वेदों का अंतिम लक्ष्य हैं ।

b)

यह कि कृष्ण ही वेदों के माध्यम से शुद्धिकर्ता हैं ।

c)

यह कि कृष्ण ही सर्वस्व के स्रष्टा तथा आश्रय हैं ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

38.

श्लोक संख्या 9.18 के अनुसार गति का क्या अर्थ है ।

a)

गंतव्य ।

b)

वेग ।

c)

परिणाम ।

d)

स्थिति ।

39.

श्लोक संख्या 9.18 के अनुसार गति कौन है ।

a)

भगवान् श्रीकृष्ण

b)

भगवान् शिव

c)

भगवान् ब्रह्मा

d)

भगवान् इंद्र

40.

क्या कारण है कि हम लोग देवताओं की उपासना करते हैं ?

a)

अंतिम लक्ष्य के ज्ञान का अभाव ।

b)

देवताओं द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार ।

c)

देवताओं का वैभव ।

d)

देवताओं की अद्भुत लोक ।

41.

कृष्ण की शक्ति की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ वास्तव में क्या है ?

a)

कृष्ण की अनुभूति की दिशा में सोपान मात्र ।

b)

हम जीवों के इंद्रियभोग का साधन मात्र ।

c)

अनंत कोटि ब्रम्हांडों की उत्पत्ति का कारण ।

d)

देवताओं के मनोरंजन का साधन मात्र ।

42.

श्लोक संख्या 9.18 के तात्पर्य में श्रील प्रभुपाद जी द्वारा उद्धृत उदाहरण में सीढ़ियाँ क्या है ?

a)

भगवान् श्रीकृष्ण की शक्ति की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ तथा देवता ।

b)

इस ब्रह्मांड के विभिन्न लोक ।

c)

जीव द्वारा भौतिक देहावसान तथा देहांतरण ।

d)

भौतिक देह में छः प्रकार के परिवर्तन ।

43.

श्लोक संख्या 9.18 के तात्पर्य में श्रील प्रभुपाद जी द्वारा उद्धृत उदाहरण में एलिवेटर क्या है ?

a)

कृष्णभावनामृत

b)

मनोधर्म

c)

अष्टांग योग

d)

वैदिक ज्ञान

44.

श्लोक संख्या 9.18 में सुहृत शब्द का क्या अर्थ है ?

a)

यह कि भगवान् श्रीकृष्ण ही हमारे परम मित्र एवं हितैषी हैं ।

b)

यह कि प्रत्येक जीव स्वच्छ हृदय वाला होता है ।

c)

यह कि यह विराट दृश्य जगत् सर्वोत्तम शरण स्थली है ।

d)

यह सभी कथन सत्य हैं ।

45.

श्लोक संख्या 9.18 में बीजमव्ययम् शब्द का क्या अर्थ है ?

a)

यह कि कृष्ण सभी कारणों के शाश्वत कारण है ।

b)

यह कि कृष्ण सबसे बड़े बीज हैं ।

c)

यह कि कृष्ण के पास असंख्य बीज उपलब्ध हैं ।

d)

यह कि कृष्ण के बीज आत्मघाती हैं ।