Worksheets50.भगवद गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_11.16–11.35
Total questions: 44
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भगवान कृष्ण का विराट रूप किस वस्तु को प्रदर्शित करता है ?
विराट रूप भगवान कृष्ण का मूल स्वरूप है
विराट रूप में भगवान कृष्ण यह दिखाते हैं की वे किस प्रकार इस भौतिक जगत में प्रविष्ट हुए हैं
विराट रूप भगवान कृष्ण के अंतर्यामी रूप को प्रदर्शित करता है
विराट रूप भगवान कृष्ण के निर्विशेष निराकार रूप को प्रदर्शित करता है
अर्जुन ने भगवान कृष्ण के विराट रूप के दर्शन की इच्छा प्रकट क्यों की ?
क्यूँकि अर्जुन को भगवान कृष्ण के ऐश्वर्य पर संदेह था
क्यूँकि अर्जुन को भगवान कृष्ण के विराट रूप को देखने की तीव्र इच्छा थी
क्यूँकि अर्जुन इस तथ्य को समस्त संसार के समक्ष स्थापित कर देना चाहता था कि भगवान कृष्ण परम ईश्वर हैं
2 और 3 दोनो
परम ईश्वर भगवान कृष्ण भौतिक इंद्रियों के द्वारा ना तो देखा जा सकता है , ना सुना जा सकता है और ना ही अनुभव किया जा सकता है ।फिर किस प्रकार इस भौतिक जगत के जीव कृष्ण को समझ सकते हैं ?
अष्टांग योग के द्वारा ही कृष्ण को समझा जा सकता है
ज्ञान से ही कृष्ण को समझा जा सकता है
दिव्य प्रेममयी सेवा से ही कृष्ण को समझा जा सकता है , क्यूँकि कृष्ण स्वयं को ऐसे सेवक के समक्ष प्रकट करते हैं
उपरोक्त सभी
एक शुद्ध भक्त भगवान कृष्ण के विराट रूप को देखने का इच्छुक क्यूँ नहीं रहता ?
क्यूँकि यह रूप भौतिक प्रकृति के समान ही प्रकट अप्रकट होता रहता है
क्यूँकि यह रूप अस्थाई काल के द्वारा प्रभावित होता है
क्यूँकि यह रूप भक्त के कृष्ण के प्रति शुद्ध मधुर प्रेम को संकुचित करता है
उपरोक्त सभी
भगवान कृष्ण के विराट रूप और द्विभुज रूप मैं कौन अधिक महत्वपूर्ण है ?
द्विभुज रूप अधिक महत्वपूर्ण है
विराट रूप अधिक महत्वपूर्ण है?
दोनो रूप बराबर महत्वपूर्ण हैं
उपरोक्त में से कोई नहीं
भगवान कृष्ण द्वारा प्रकट विराट रूप निम्नलिखित में से किसके आराध्य भगवान हैं ?
अर्जुन
संजय
भीष्म
धृतराष्ट्र
अर्जुन के अलावा किस किस ने भगवान कृष्ण के अन्य विराट रूप का दर्शन किया है ?
माता यशोदा
दुर्योधन
कर्ण
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 10:15 के अनुसार अर्जुन ने भगवान कृष्ण के विराट रूप में ब्रह्मा, शिव , ऋषियों और दिव्या सर्पों को देखा ।ये कौन से सर्प हैं ?
कालिया सर्प
नाग लोक के सर्प
शेष शैय्या
समस्त नागों की माता कदरु
अर्जुन ने भगवान कृष्ण के विराट रूप का वर्णन करते समय विभिन्न बातों की पुनरुक्ति (एक ही बात को बार बोलना) क्यूँ की ?
क्यूँकि अर्जुन भगवान कृष्ण के विराट रूप को देख कर अभिभूत हो गया था
क्यूँकि अर्जुन को अलग कहने को कुछ नहीं था
क्यूँकि अर्जुन अधिक विद्वान नहीं था बल्कि एक योद्धा था
उपरोक्त में से कोई नहीं
विराट रूप मैं भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यह क्यूँ दिखाया की भीष्म एवं द्रोण भी काल के मुख मैं प्रवेश कर रहे हैं हालाँकि ये दोनो ही सज्जन पुरुष थे और भगवान कृष्ण के भक्त थे ?
क्यूँकि अर्जुन इन दोनो से युद्ध नहीं करना चाह रहा था और इनके प्राण बचाना चाहता था किंतु कृष्ण ने अर्जुन को बताया की इन सब की मृत्यु अवश्यम्भावी है
क्यूँकि इन पर भी द्रौपदी की रक्षा न करने के कारण पाप लग गया था
उपरोक्त दोनो
उपरोक्त में से कोई नहीं
विराट रूप देखने से पूर्व भी अर्जुन जानता था की कृष्ण परम ईश्वर हैं , किंतु विराट रूप देखने के बाद फिर अर्जुन भगवान कृष्ण को बारम्बार प्रणाम और अपने पूर्व के किए गए सख्य पूर्वक व्यवहार के लिए क्षमा क्यूँ माँगने लगा ?
क्यूँकि भगवान कृष्ण के ऐश्वर्य का उदय होते ही उनके प्रति मधुर घनिष्ठता का सम्बन्ध शिथिल हो गया
क्यूँकि विराट रूप को देखने के बाद ही अर्जुन को असली ज्ञान हुआ
क्यूँकि विराट रूप को देखने के बाद अर्जुन को अपनी त्रुटियों की अनुभूति हुई
क्यूँकि विराट रूप को देखने से पहले ही अर्जुन को दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई
द्वारिका , मथुरा और वृंदावन में से कहाँ कृष्ण का ऐश्वर्य सबसे अधिक उदित रहता है ?
द्वारिका
मथुरा
वृंदावन
सब जगह बराबर रहता है
निम्नलिखित में से कौन से धाम के परिकरों का प्रेम भाव कृष्ण को सर्वाधिक आकर्षित करता है ?
द्वारिका
मथुरा
वृंदावन
सभी जगह के भक्तों का प्रेम बराबर आकर्षित करता है
निम्नलिखित में से भगवान कृष्ण का ऐसा कौन सा स्वरूप है जो ये बताता है कि कृष्ण वृंदावन के परिकरों के मधुर प्रेम रस का कभी भी विस्मरण नहीं कर पाते ?
श्री विट्ठल
श्री चैतन्य महाप्रभु
श्री बदरी नारायण
श्री जगन्नाथ
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में अर्जुन कहता है की वह विराट रूप में ब्रह्मा , शिव और विष्णु के दर्शन कर पा रहा है ?
11.14
11.15
11.16
11.17
विराट रूप को देखने के बाद अर्जुन में कौन से भाव का उदय हुआ ?
भय
आश्चर्य
प्रेम
क्रोध
विराट रूप में अर्जुन ने ब्रह्मा , विष्णु , महेश ,सारे अन्य देवता ,समस्त लोक व ब्रह्मांड व जीव जंतु इत्यादि सारी सृष्टि देख ली ।इस प्रकार के दर्शन से क्या सिद्ध होता है ?
यह की अंत में सब एक ही है जो की निराकार और निर्विशेष ब्रह्म है
यह की भगवान के अनंत रूप हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी का भी भजन किया जा सकता है , सभी का बराबर फल होगा
यह की भगवान कृष्ण परम ईश्वर हैं और कृष्ण ने सारी सृष्टि को अपने स्व अंशों और विभिन्न अंशो से धारण किया है
उपरोक्त में से कोई नहीं
निम्नलिखित में से कौन भगवान कृष्ण/विष्णु के अवतार नहीं हैं ?
विराट रूप
बलराम
बुद्ध
लक्ष्मण
अर्जुन ने विराट रूप में ऐसा क्यूँ दर्शन किया की यह रूप सभी को निगल कर उनकी मृत्यु का कारण है ?
क्यूँकि काल के रूप में प्रकट होकर कृष्ण भौतिक जगत में सभी का नाश करते हैं
क्यूँकि कृष्ण अर्जुन को युद्ध में यह दिखा कर लगाना चाहते थे की कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों के अतिरिक्त सभी को कृष्ण पहले से ही मार चुके थे
उपरोक्त दोनो
उपरोक्त में से कोई नहीं
भगवान को कृपा और प्रेम का सागर माना जाता है , किंतु विराट स्वरूप में तो अर्जुन ने दर्शन किया कि यह रूप सभी दिशाओं के लोगों को निगल रह है ,इसका कारण क्या है ?
क्यूँकि भगवान कृपा और प्रेम के सागर नहीं हैं
क्योंकि भगवान कृष्ण इस जगत में कष्ट दे कर और इस भौतिक जगत में स्वयं प्रकट होकर कृपा वश सबको अपने निज गोलोक धाम बुलाना चाहते हैं
क्योंकि अच्छा और बुरा दोनों कृष्ण के स्वरूप में हैं
मृत्यु में कोई कष्ट नहीं है , कष्ट तो व्यक्ति के मन में है
अर्जुन द्वार 11.16 में भगवान को सम्बोधित शब्द ‘विश्र्वेश्र्वर’ का क्या अर्थ है ?
परमात्मा रूपी
परम जादूगर
ब्रह्माण्ड के स्वामी
परम योगी
श्लोक 11.17 में अर्जुन किस वस्तु को भगवान के विराट रूप में देख पा रहा था ?
मुकुटों को
गदाओं को
चक्रों को
अर्जुन श्लोक में भगवान को अनेक मुकुटों, गदाओं तथा चक्रों से विभूषित देख पा रहा था
अर्जुन सूर्य और चंद्रमा को भगवान का ___________ कहता है
नासिकाय
कान
मुख
आँखें
श्लोक 11.20 में "लोकत्रयम्" क्यों प्रयोग किया गया ?
तीन लोको के निवासी भगवान का विराट रूप देख पा रहे थे
तीन प्रकार के देवता भगवान को प्रणाम कर रहे थे
सभी लोक भगवान के विषरूप से प्रकाश में थे
हम नहीं समझ पा रहे ये क्यों प्रयोग हुआ
अर्जुन ने भगवान को "देवेश" कहकर क्यों संबोधित करना चाहा ?
क्योंकि भगवान देव लोक के निवासी है
क्योंकि भगवान देवताओ पर विराट रूप में कृपा कर रहे थे
भगवान विराट रूप में देवताओं की स्तुति करना चाह रहे थे
भगवान का विराट रूप देख सभी देवता उन्हे प्रणाम कर रहे थे क्योंकि भगवान देवताओ के स्वामी है
भगवान के विराट रूप को देख कर अर्जुन की मानसिकता का किस प्रसार का वर्णन किया गया है ?
अर्जुन के निडर योद्धा होने के कारण उसे कोई फ़र्क न था
अर्जुन की मानसिकता गीता में नहीं बताई गई है
अर्जुन विराट रूप देख प्रसन्न था और भगवान से प्रार्थना कर रहा था के विराट रूप सदा बना रहे
अर्जुन विराट रूप को देखकर अपना सन्तुलन नहीं रख पा रहा था तथा विचलित और मोहग्रस्त था
अर्जुन भगवान के श्री मुख में विपक्ष के नेता तथा उनके सैनिक विनष्ट होते देख पा रहा था. प्रभुपाद इसका क्या अभिप्राय बता रहे हैं ?
इसके माध्यम से भगवान अपना ऐश्वर्या अर्जुन को बता रहे हैं
भगवान बता रहे हैं की युद्ध के बाद ये अपने दुष्कर्मो के कारण भगवान का भोजन बनेगे
यह इसका संकेत है कि कुरुक्षेत्र में एकत्र समस्त व्यक्तियों की मृत्यु के बाद अर्जुन विजयी होगा
यह प्रश्न सही नही है
अर्जुन नदियों को समुद्र में प्रवेश करने का उदाहरण क्या समझने के लिए देता है?
प्रकृति में जो कुछ घटित हो रहा है वह समझाना चाहता था
नदियों का कोई अस्तित्व नहीं होता ये समझाना चाहता था
समुद्र का महत्त्व समझाना चाहता था
अर्जुन समझाना चाहता था ये समस्त महान योद्धा भी आपके प्रज्जवलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं अत: मृत्यु को प्राप्त होंगे
अर्जुन के अनुसार लोग पूर्ण वेग से कृष्णा में उसी प्रकार प्रविष्ट हो रहे थे जिस प्रकार ________ अपने विनाश के लिए प्रज्जवलित अग्नि में कूद पड़ते हैं ?
पतिंगे
जलचर
पक्षी
छोटे पौधे
भगवान का विराट रूप ब्रह्मांड के किस विभाग में फेल था?
अखिल ब्रह्मांड में फैला था
केवल दक्षिण और पूर्व में फैला था
केवल पश्चिम और उतर दिशा की ओर
इसका व्याख्या गीता में नहीं है
अर्जुन विराट रूप में ब्रह्मांड की किन गतिविधि को देख पा रहा था?
भगवान के माध्यम से अखिल ब्रह्मांड में घटित सभी गतिविधियो को देख पा रहा था
देव लोको में घटित सभी गतिविधियो को देख पा रहा था
मध्य लोको में घटित सभी गतिविधियो को देख पा रहा था
पाताल लोको में घटित सभी गतिविधियो को देख पा रहा था
काल गीता के अनुसार किस की शक्ति का प्रदर्शन करती है ?
काल एक स्वतंत्र देवता है
ये प्रश्न ही गलत है, काल कैसी शक्ति को प्रदर्शित करता है
पूर्ण पुरुषोत्तम श्री कृष्ण की
महादेव शिव की
अन्ततः सारे ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा अन्य सभी परमेश्र्वर द्वारा काल-कवलित होते हैं , ये किस उपनिषद का वाक्य है ?
श्वेताश्वतर उपनिषद्
छान्दोग्य उपनिषद
ईशोपनिषद्
कठोपनिषद्
जैसा हम जानते है की अर्जुन लड़ना नहीं चाहता था, अगर ऐसा होता तो सभी योद्धा का क्या परिणाम होता ?
तब सभी अपने निर्धारित कार्यो में लगे रहते
तब शांति तथा प्रेम की विजय होती
यदि अर्जुन नहीं लड़ता, तो वे सब अन्य विधि से मरते, अर्जुन तो केवल निमित था
यदि अर्जुन नहीं लड़ता, तो निश्चय ही दुर्योधन की विजय होती
सव्यसाची का क्या अर्थ है?
जो हर परिस्थिती में सच बोलता हो
जो सभ्य कुल में जन्मा हो
जो एक महान राजनीतिज्ञ हो
जो युद्धभूमि में अत्यन्त कौशल के साथ तीर छोड़ सके
ये विराट भौतिक जगत भगवान द्वारा क्यों बनाया गया ?
ये भगवान की इच्छा है, जीवा आत्मा को कहीं तो भगवान रखेगे इसिलिए इसे बनाया गया
ये प्रश्न ही गलत है, संसार रासायनिक मिश्रण से बना, विज्ञान भी यही कहता है
सभी देवता को प्रशासनिक कार्य सौपने के लिए
विराट जगत् बद्धजीवों के लिए भगवान् के धाम वापस जाने के सुअवसर देने के लिए बनाया गया
क्या ये भौतिक प्रकृति स्वतंत्र होकर स्वयं ही प्रगतिशील है?
जी हां, हर कार्य अकस्मात् संभव होता है
ये ईश्वर की परम अध्यक्षता में संभव होता है
केवल देवताओ की अध्यक्षता में संभव होता है
हम इसपर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं
बद्धजीव कलयुग में किस प्रमाणिक विधि से भागवत धाम वापस जाने योग्य बन सकता है ?
वेदों का गहन अध्ययन करके
परोपकारी कार्यों में भाग लेकर
पवित्र स्थानों में शारीरिक रूप से उपस्थित होने से
कृष्ण के पवित्र नाम का जप करते हुए"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे "|
भगवत गीता के अनुसार हम किसको समर्पण करे और उनके माध्यम से कृष्णा की सेवा करे ?
किसी भी ब्राह्मण को
अपने माता पिता को
प्रमाणिक गुरु को
भक्ति हृदय का भाव है समर्पण का नहीं
अर्जुन विराट रूप को देख अपनी प्रार्थनाओं और ऐश्वर्य की स्तुति किस रूप और भाव में करने लगा ?
सखा के रूप में
एक योद्धा के रूप में
एक भक्त के रूप मैं
भाई के रूप मैं
कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना फोन नो. लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
