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57. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_13.08-13.14

Total questions: 40

Worksheet time: 21mins

Name
Class
Date
1.

कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे ?

4 lines
2.

कृप्या यहाँ पर अपना फ़ोन नो. लिखे ?

4 lines
3.

कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?

4 lines
4.

कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे ?

4 lines
5.

क्या एक प्रामाणिक गुरु को स्वीकार करना आवश्यक है जब हम पहले से ही 4 सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं, मंगला आरती कर रहे हैं, जप कर रहे हैं और अन्य सभी भक्ति संबंधी कार्य कर रहे हैं?

a)

नहीं, अंततः गुरु भी हमसे वही गतिविधियों के लिए कहेंगे

b)

हाँ, क्योंकि समाज हम पर एक आध्यात्मिक व्यक्ति की मुहर तभी लगाएगा जब हमारे पास गुरु हो

c)

नहीं, अंततः कृष्ण ही सब कुछ तय करते हैं, गुरु नहीं

d)

हाँ,आध्यात्मिक जीवन का शुभारम्भ तभी होता है, जब प्रामाणिक गुरु ग्रहण किया जाय

6.

एक भक्त किस दर्शन का पालन करता है जिसके आधार पर भक्त सम्मान और अनादर को सहन करता है?

a)

नियमित भागवतम सुनने से वह सहन करने की प्रवृति रखते हैं

b)

वह जानता है कि वह शरीर नहीं है और इन चीजों का आत्मा से कोई लेना-देना नहीं है।

c)

कोई दर्शन नहीं है क्योंकि भक्त केवल भक्तों के साथ होने पर ही इन प्रतिक्रियाओं को सहन करता है बाकी दुनिया के साथ नहीं

d)

गीता में ऐसी किसी बात का उल्लेख नहीं है इसलिए मैं उत्तर नहीं दे सकता

7.

प्रमाणिक गुरु कृष्ण का ____________ होता है?

a)

नेता

b)

प्रतिनिधि

c)

वक्ता

d)

मुनीम

8.

वैराग्य का अर्थ भगवत गीता के अनुसार क्या है?

a)

हमें भौतिक जीवन को पूरी तरह से त्याग देना चाहिए

b)

हमें उन चीजों को त्याग देना का प्रयास करना चाहिए जो हमें आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने में मदद नहीं करती हैं और हमारे सभी संसाधनों को कृष्ण की सेवा में लगाना चाहिए

c)

हमें ऐसे जीना चाहिए जैसे हम बहरे और गूंगे हों, जैसे कि इस भौतिक दुनिया में हमारा कोई लेना-देना नहीं है

d)

भगवत गीता हमें जीवन में सकारात्मक बनाने के लिए है ताकि हम पूरी तरह से जी सकें लेकिन वैराग्य के बारे में मूर्खतापूर्ण विचार नहीं देते

9.

जीभ सबसे अनियंत्रित इंद्रिय है और बोलने और खाने के लिए उपयोग की जाती है। जीभ को नियंत्रित करने के लिए प्रभुपाद व्यवहारिक रूप से क्या सुझाव देते हैं?

a)

शाकाहारी बनें और अच्छे शब्द बोलें

b)

बिना प्याज और लहसुन के खाना खाएं और दूसरों की तारीफ करते रहें

c)

नियमित रूप से जीभ को कृष्णार्पित भोग के उच्छिष्ट का स्वाद लेने में तथा हरे कृष्ण का कीर्तन करने में प्रयुक्त करना चाहिए

d)

जीभ को नियंत्रित करने के लिए, प्रभुपाद ने हमें एक शब्द भी न बोलने और जितना हो सके उपवास करने की कोशिश करने के लिए कहा

10.

मिथ्या अहंकार का क्या अर्थ है?

a)

मैं आत्मा हूँ

b)

मैं कृष्ण का शाश्वत सेवक हूं

c)

A और B दोनों सही हैं

d)

मैं यह शरीर हूँ या इस शरीर को आत्मा मानना

11.

परिवार को सुखमय बनाने की सर्वोत्तम विधि ________ है?

a)

स्नेह

b)

देखभाल

c)

एक दूसरे की मदद करना

d)

कृष्णभावनामृत

12.

क्या भक्ति योग इस बात का समर्थन करता है कि जीव और ईश्वर एक ही हैं?

a)

हाँ, वे एक हैं और समान हैं। यही भक्ति योग का अंतिम निष्कर्ष है |

b)

भक्ति योग सबसे शीर्ष योग है और इसलिए यह किसी भी कथन का समर्थन नहीं करता है जो भ्रम पैदा करता है|

c)

नहीं। भक्ति का अर्थ है यह समझना कि जीव ईश्वर का अभिन्न अंग हैं और भगवान की सेवा के लिए बने हैं, उनके साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं|

d)

नहीं, भक्ति योग का अर्थ है स्वयं को समझना लेकिन ईश्वर और जीवों के बीच किसी भी संबंध का विश्लेषण नहीं करना

13.

शरीर का ज्ञाता न तो कभी उत्पन्न होता है, और न मरता है | वह ज्ञान से पूर्ण होता है. यह कथन किस उपनिषद का है?

a)

केनोपनिषद्

b)

मुण्डकोपनिषद्

c)

तैत्तरीयोपनिषद्

d)

कठोपनिषद्

14.

कौन सा ग्रंथ इस रहस्य को उजागर करता है कि जीव कब प्रकट हुआ?

a)

ऋग्वेद

b)

वेदांतसूत्र

c)

बृहन्नारदीयपुराण

d)

परमेश्र्वर से जीवात्मा के प्राकट्य का इतिहास कोई ग्रंथ नहीं बताता

15.

परमेश्र्वर को परमात्मा रूप में शरीर का मुख्य ज्ञाता तथा प्रकृति के गुणों का स्वामी किस ग्रंथ में कहा गया है?

a)

केनोपनिषद्

b)

तैत्तरीयोपनिषद्

c)

श्र्वेताश्र्वतर उपनिषद

d)

कठोपनिषद्

16.

ब्रह्मसंहिता के अनुसार कृष्ण किस सर्वोच्च ग्रह पर नित्य स्थित हैं?

a)

वैकुंठ

b)

इन्द्रलोक

c)

गोलोक

d)

भूलोक

17.

यदि हमारी इंद्रिय मूलतः अध्यात्मिक है तो हम भगवान के रूप के दर्शन क्यों नहीं कर पाते?

a)

कल्मषग्रस्त इन्द्रियों के कारण हम उनके स्वरूप को देख नहीं पाते

b)

क्योंकि भगवान का कोई रूप ही नहीं है

c)

मुझे लगता है कि यह अप्रासंगिक प्रश्न है क्योंकि मैं कृष्ण को उनके नाम रूप, गुण और लीला में महसूस करता हूं

d)

क्योंकि हम हरे कृष्ण महा मंत्र का जाप करके सही अध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण नहीं कर रहे हैं

18.

आप क्या समझते हैं जब गीता कहती है कि कृष्ण निर्गुण हैं?

a)

कृष्ण की परम विशेषता यह है कि वे निराकार हैं

b)

भगवान भौतिक प्रगति के 3 गुण से प्रभावित नहीं है अर्थात उनकी इन्द्रियाँ भौतिक आवरण से रहित होती हैं

c)

भगवान कृष्ण में कोई गुण नहीं है

d)

कृष्ण के गुण की कोई तुलना नहीं कर सकता

19.

निम्नलिखित में से कौन सा कथन जीव  और परमात्मा के संदर्भ में सत्य नहीं है

a)

जीव परमात्मा का अंश है

b)

भौतिक प्रकृति जीव को प्रभावित कर सकती है लेकिन परमात्मा को नहीं

c)

जीव और परमात्मा गुणात्मक और मात्रा दोनों रूप से समान हैं

d)

जीव और परमात्मा दोनों ही शाश्वत हैं

20.

जब भगवान प्रकट  होते हैं तो किस शक्ति के माध्यम से यथारूप में प्रकट  होते हैं?

a)

अन्तरंगा शक्ति

b)

बहिरंगा शक्ति

c)

तटस्थ शक्ति

d)

इनमे से कोई भी नहीं

21.

भगवान का नित्य स्वरूप _________ है?

a)

अकल्पनीय

b)

निराकारी

c)

विराट

d)

सच्चिदानन्द 

22.

जब कोई व्यक्ति इस धारणा में होता है कि ईश्वर निराकार है और वह ईश्वर के समान है, तो गीता के अनुसार उसकी वास्तविक स्थिति क्या है?

a)

उन्हें सर्वोच्च योगी माना जाता है

b)

गीता के अनुसार वह मुक्त अवस्था में है

c)

वह प्रकृति के भौतिक गुणों से दूषित है

d)

मैंने गीता में ऐसा कोई श्लोक नहीं पढ़ा है

23.

कलयुग में सरलता तथा सुखपूर्वक परम धाम पहुंचने की विधि क्या है?

a)

ध्यान लगाना

b)

गायत्री मंत्र का जाप करें

c)

हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करे

d)

पवित्र स्थानों पर जाएँ और गंगा स्नान करें

24.

देहधारी आत्मा __________ तत्त्वों से बने आवरण रूप शरीर में बन्द रहता है?

a)

11

b)

20

c)

12

d)

24

25.

भगवान कृष्ण द्वारा बताए गया ज्ञान की प्रक्रिया का  (श्लोक 13.8 से 13.12) कब पालन करने पर भी वह निष्फल हो जाती  है ?

a)

अगर इस ज्ञान के पालन को घर गृहस्थी से वैराग्य उत्पन्न करने के लिए न किया जाए

b)

अगर इस ज्ञान से पालन से विनम्रता उत्पन्न ना हो

c)

अगर इस ज्ञान के पालन को भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति उत्पन्न करने के लिए नहीं किया जाए

d)

उपरोक्त सभी

26.

कौन से शास्त्र में ऐसा वर्णन मिलता है कृष्ण की भक्ति प्राप्त करने पर व्यक्ति में देवताओं के समस्त गुण प्रकट हो जाते हैं ?

a)

भागवत गीता   

b)

श्रीमद् भागवत

c)

श्वेतासुर उपनिषद

d)

बृहद नारदीय  पुराण

27.

श्लोक संख्या 13.8 में  श्री कृष्ण ‘आचार्य उपासनम’ शब्द का प्रयोग करते हैं, इसका सही अर्थ चुनिए ?

a)

आचार्यों की पूजा भगवान के समान करना

b)

आचार्य और भगवान को एक मानना

c)

आचार्य के पास जाकर श्रधापूर्वक उनसे भक्ति का ज्ञान प्राप्त कर उसका पालन करना

d)

आचार्य की वपू सेवा करना

28.

भगवान कृष्ण श्लोक संख्या 13.8 में गुरु की शरण में जाने का उपदेश करते हैं ।इसके अलावा भी श्री कृष्ण भगवत गीता के कौन से श्लोक में  गुरु की शरण में जाने का उपदेश करते हैं ?

a)

2.55

b)

4.34    

c)

9.32    

d)

17.30

29.

भक्ति के मार्ग में ‘हृदय की दुर्बलता’ का क्या अर्थ अथवा लक्षण है ?

a)

प्रकृति के साधनों पर अधिकाधिक इंद्रिय तृप्ति के लिए प्रभुत्व जताना

b)

हृदय के कमजोर होने के करण हृदयघात होना

c)

भक्ति करने पर हृदय का दुर्बल अर्थात् कोमल  होना

d)

भक्ति करने पर हृदय निर्मल होना

30.

भक्ति में  प्रगति के लिए श्री कृष्ण के शुद्ध भक्त को गुरु स्वीकार करके  उन्हें सेवा से प्रसन्न करने की क्या आवश्यकता है ?

a)

क्यूँकि श्री कृष्ण अपने शुद्ध भक्तों की पूँजी हैं और उनकी कृपा से कृष्ण सरलता से मिल जाते हैं   

b)

क्यूँकि कृष्ण सिर्फ़ विनम्रता से मिलते हैं और गुरु को शरणागत होकर विनम्रता  विकसित होती है

c)

क्यूँकि कृष्ण सिर्फ़ ईर्ष्या से रहित होने पर मिलते हैं और गुरु के शरणागत होने पर साधक में  ईर्ष्या समाप्त हो जाती है

d)

उपरोक्त सभी

31.

सच्चा  वैराग्य क्या है ?

a)

सम्भोग न करना

b)

भक्ति के अनुकूल वस्तुओं को स्वीकार करना और प्रतिकूल वस्तुओं का परित्याग करना

c)

सभी आसक्तियों का त्याग कर देना

d)

उपरोक्त सभी 

32.

मिथ्या अहंकार की समाप्ति कब होती है ?

a)

जब जीव के हृदय से “मैं” भावना समाप्त होती है

b)

जब जीव कोई भी सम्मान स्वीकार नहीं करता

c)

जब जीव स्वयं को कृष्ण के दास के रूप में पहचान लेता है

d)

उपरोक्त सभी

33.

भगवान कृष्ण जन्म, मृत्यु, जरा और व्याधि के दुःख और दोष को देखने  का उपदेश करते हैं , किंतु सभी लोग इन सब  को अपने जीवन में देखते ही हैं फिर कृष्ण विशेष रूप से इस पर बल क्यूँ देते है ?

a)

 क्यूँकि इन दुखों को देखकर भी सामान्य व्यक्ति यह नहीं समझ पाता  की यह संसार दुखो का घर है

b)

क्यूँकि इन दुखों को देख कर व्यक्ति संसार से छूटने की इच्छा करता है

c)

क्यूँकि यहाँ  देखने से भगवान  कृष्ण का अर्थ है यह समझना की ये दुःख आत्मा के आनंदमय स्वरूप के विपरीत है

d)

उपरोक्त सभी

34.

घर को कृष्ण भावनामृत होने के लिये  क्या करना चाहिए ?

a)

श्री विग्रह की अर्चा सेवा नियमित रूप से करनी चाहिए

b)

श्रीमद् भागवत और गीता आदि का नियमित साथ में  बैठकर करना चाहिए

c)

हरिनाम कीर्तन मिल कर करना चाहिए

d)

उपरोक्त सभी 

35.

श्लोक संख्या 13.13  में आत्मा को ब्रह्म कहा गया है । यह आत्मा किस प्रकार का ब्रह्म है ?

a)

परब्रह्म

b)

विज्ञान ब्रह्म    

c)

आनंदब्रह्म

d)

शब्द ब्रह्म

36.

श्लोक संख्या 13.13 के अनुसार साधक दिव्य आनंद का निरंतर आस्वादन कर सकता है जब वह आत्मा और परमात्मा को जाने।साथ में श्री कृष्ण यह भी बताते हैं की यह आत्मा उनके अधीन है (मत परम )।इस दासता की अवस्था में साधक (आत्मा) कैसे आनंद भोग सकता है ?

a)

क्यूँकि जीव का स्वरूप ही है कृष्ण की सेवा (दास) जिस में उसे दिव्य आनंद मिलता है

b)

क्यूँकि इस सेवा को करके आत्मा संसार से मुक्त हो सकता है और ब्रह्म ज्योति को प्राप्त कर सकता है

c)

जीव कभी भी दासता से आनंद प्राप्त नहीं कर सकता, स्वाधीनता में ही आनंद है

d)

1 और 2

37.

इस अध्याय से पूर्व भी श्री कृष्ण ब्रह्म के विषय में कौन से श्लोक में बता  चुके हैं ?

a)

2.57    

b)

4.34    

c)

7.21

d)

8.3

38.

भगवान कृष्ण की कौन सी लीला श्लोक संख्या 13.14 में  वर्णित परब्रह्म के गुणो का सटीक चित्रण करती  है ?

a)

श्री कृष्ण की अपने सखाओं के साथ वृंदावन में दोपहर भोजन लीला |

b)

श्री कृष्ण का  रास लीला नृत्य

c)

श्री कृष्ण का द्वारिका में अपनी रानियों के साथ रहना

d)

उपरोक्त सभी

39.

निम्नलिखित में  से कौन सा श्लोक श्री चैतन्य महाप्रभु ने सार्वभौम भट्टाचार्य को जगन्नाथ पूरी में उपदेश में सुनाया था ?

a)

13.13

b)

13.14  

c)

13.15

d)

13.16

40.

       श्लोक संख्या 13.14 में निम्नलिखित में  से कौन सा भाव वर्णित है ?

a)

परब्रह्म सर्वव्यापी है

b)

परब्रह्म निराकार है

c)

परब्रह्म विश्वरूप है

d)

परब्रह्म सर्व व्यापक होकर भी साकार है