Worksheets45. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_9.32–10.07
Total questions: 39
Worksheet time: 20mins
1. भगवद्गीता के अनुसार विभिन्न वर्णों को इस आधार पर बाँटा गया है?
जन्म I
जन्म तथा कर्म |
गुण तथा जन्म ।
गुण तथा कर्म।
भगवद्गीता के अनुसार अगर सभी वर्णों के लोग भगवान को प्राप्त कर सकते हैं तो फिर समाज को चार वर्णों में क्यों विभाजित किया गया है?
यह विभाजन यह विभाजन ब्राह्मणों द्वारा किया गया है जिससे कि उनका प्रभुत्व समाज में बना रहे |
सनातन धर्म में व्यवस्था थी की प्रत्येक व्यक्ति अपने गुण के अनुसार अपना नियत कर्म करे और सभी शांतिपूर्वक आध्यात्मिक उन्नति कर सकें |
पृथ्वी के सीमित साधनों का दुरुपयोग न हो तथा सभी व्यक्ति कम से कम साधनों में गुज़ारा करे इसलिए समाज का विभाजन किया गया |
उपरोक्त में से कोई नहीं |
भगवत गीता के श्लोक संख्या 9.33 के अनुसार इस भौतिक जगत की क्या विशेषताएँ हैं?
नाशवान और दुखमय |
सुख दुख का मिश्रण |
नाशवान् |
रोचक |
संस्कृत शब्द "भज्" का अर्थ हिंदी में क्या है?
पूजा |
शरणागति |
प्रेम पूर्वक सेवा |
चित्त वृत्ति का निरोध |
श्लोक संख्या 9. 33 में भौतिक जगत को नश्वर तथा दुखमय बताया गया है। इससे पूर्व भी कौन से श्लोक में श्रीकृष्ण द्वारा इस जगत को भी इसी प्रकार का बताया गया है ?
5.22 |
13.9 |
8.16 |
8.15 |
भगवद्गीता में जिस शुद्ध भक्ति का वर्णन हुआ है वह निम्नलिखित में से कौन कौन सी अशुद्धियां से मुक्त है?
कल्पना, योग तथा सकाम कर्म |
भोग की इच्छा |
ज्ञान |
उपरोक्त सभी |
श्लोक संख्या 9.34 के अनुसार निम्नलिखित में से कृष्ण कौन सा उपदेश नहीं करते ?
कृष्ण के भक्त बनो |
अपने मन को कृष्ण में लगाओ |
कृष्ण के दर्शन करो |
कृष्ण को नमस्कार करो |
संस्कृत वाक्य -देह देही विभेदोअयम नेश्वरे विद्यते क्वचित् - का क्या अर्थ है ?
श्रीकृष्ण तथा उनके देह कोई अंतर नहीं है |
श्रीकृष्ण की देह में निराकार ब्रह्म स्थित है |
प्रत्येक व्यक्ति अपने देह का ईश्वर है |
प्रत्येक व्यक्ति अपने देह का ईश्वर है |
भगवद्गीता संख्या 9.34 ने कृष्ण ने जो उपदेश किया है वह परम सत्य की कौन सी अवधारणा पर सटीक बैठता है ?
निर्गुण भगवान
सगुण भगवान
निराकार ब्रह्मा
हृदय में स्थित परमात्मा
भगवद्गीता में कृष्ण सबको अपना भक्त बनने का उपदेश करते हैं, किन्तु इसके उपरांत भी भगवत गीता के बड़े बड़े पंडित कृष्ण भक्त नहीं बनते इसका क्या कारण है ?
क्योंकि कृष्ण भक्त बनना आवश्यक नहीं है और सदैव भले काम करना आवश्यक है
कृष्ण अपनी भक्ति पंडितों को नहीं देते
क्योंकि वे कृष्ण में श्रद्धा नहीं रखते
क्योंकि गीता में कृष्ण अन्य मार्गों जैसे की कर्मयोग, ज्ञान योग तथा अष्टांग योग का भी वर्णन करते हैं
कंस भी कृष्ण का निरंतर स्मरण करता था तो क्या वह भगवान कृष्ण का भक्त था?
नहीं, क्योंकि वह भक्तिमय प्रेम से कृष्ण का स्मरण नहीं करता था
हाँ ,क्योंकि कंस पूर्व जन्म का महान कृष्ण भक्त था
नहीं, क्योंकि कंस बहुत पापी था
हाँ , क्योंकि कंस ने कृष्ण के साक्षात दर्शन किए थे
भगवान कृष्ण का शरीर भौतिक नहीं अपितु…………हैं ?
अमर
सच्चिदानंद स्वरूप
योगिक सिद्धि प्राप्त
निराकार ब्रह्म से प्रकट
भगवद गीता के 9 अध्याय में है वर्णित परम गुह्य ज्ञान का सार स्वरूप क्या है?
कृष्ण का भक्त बनना तथा अच्छे कर्म करना
कृष्ण में दृढ़ विश्वास रखना था और उनकी भक्ति करना
भागवत धाम प्राप्त करना
कृष्ण की पूजा करना
निम्नलिखित में से कौन से ऋषि ने भगवान की व्याख्या की है?
व्यास।
बाल्मीकि
अगस्त्य
पराशर
श्री कृष्ण ने 9वें अध्याय में दृढ़ विश्वास के साथ अपनी भक्ति करने का उपदेश किया है तो फिर 10वें अध्याय में अपने ऐश्वर्यों का वर्णन फिर से क्यूँ किया?
ताकी साधक भक्ति करने के लिए दृढ़ विश्वास रखें
दो ताकि साधक कृष्ण की सर्वशक्तिमता को समझें
उपरोक्त दोनों
उपरोक्त में से कोई नहीं
भगवान कृष्ण ने 9वें अध्याय में भक्ति का वर्णन किया तथा 10वें में अपने ऐश्वर्य का ज्ञान दिया और कहा कि ऐश्वर्य का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ है। तो क्या इसका अर्थ हुआ कि भक्ति से श्रेष्ठ है?
नहीं इसका अर्थ है की भक्ति में स्थिर होने के लिए भगवान के ऐश्वर्यों का ज्ञान आवश्यक है
हाँ , क्यूँकि भक्ति ज्ञान प्राप्त करने हेतु ही की जाती है
भक्ति और ज्ञान दोनों बराबर महत्वपूर्ण है
उपरोक्त में से कोई नहीं
भक्ति करने का मूल मूल्य क्या है ?
गुरु के प्रति शरणागति
भक्ति करने की इच्छा
कृष्ण के प्रति श्रद्धा
नाम जप
भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवत गीता का उपदेश देने के लिए पात्र क्यों चुना?
क्योंकि अर्जुन भगवान कृष्ण का भाई था
क्योंकि अर्जुन एक महान योद्धा था
क्योंकि अर्जुन भगवान से ईर्ष्या नहीं करता था और उनका प्रिय था
क्योंकि अर्जुन ने कृष्ण से प्रश्न पूछे और कृष्ण को गुरु रूप में स्वीकार किया
भगवान कृष्ण की भक्ति का शुभारम्भ करने का साधन क्या है?
कृष्ण के विषय में सुनना
कृष्ण का नाम जप करना
कृष्ण की पूजा करना
कृष्ण के शरणागत होना
10.2 श्लोक के अनुसार कृष्ण को देवता तथा महर्षि भी नहीं समझ पाते तो फिर क्या कलयुग के लोग कृष्ण को समझ सकते हैं?
हाँ , क्योंकि कृष्ण की भक्ति करने पर कृष्ण स्वयं को भक्तों के समक्ष प्रकट करते हैं
मनुष्यों के लिए कृष्ण को पूर्णतया समझना असंभव है
कलियुग के लोग कृष्ण को नहीं समझ सकते
पहला और दूसरा
दशम अध्याय के दुसरे श्लोक के तात्पर्य के अनुसार श्री कृष्ण क्यों अवतार ग्रहन करते है ?
क्योंकि भगवान को असुरो का संहार करना होता है
क्योंकि भगवान को साधुओं की रक्षा करनी होती है
क्योंकि अधिकांश लोग कृष्ण को उनके वास्तविक रूप को नही समझ पाते इसलिए वे आते है
उपरोक्त सभी
केवल भक्त गण ही भगवान को पूर्णतया समझ पाते है क्योंकि ?
भक्त बहुत ही बुद्धिमान होते है
भक्त बहुत ही ज्ञानी होते है
भक्त सर्वश्रेष्ठ होते है
भगवद कृपा के कारण
दशम अध्याय के तीसरे श्लोक के अनुसार कौन सा मनुष्य मोहरहित और समस्त पापों से मुक्त हो सकता है ?
जो कृष्ण को अजन्मा जानता है
जो कृष्ण को अनादि जानता है
जो कृष्ण को समस्त लोकों के स्वामी के रूप में जानता है
उपरोक्त सभी
भगवद गीता का कौन सा श्लोक बताता है कि आत्मसाक्षात्कार करने वाले मनुष्य बहुत दुर्लभ होते है ?
10.3
10.4
7.3
7.4
जब भगवान कृष्ण देवकी और वासुदेव के समक्ष प्रकट हुए थे वे किस रूप में प्रकट हुए थे ?
सामान्य शिशु के रूप में
चतुर्भुज नारायण के रूप में
विराट रूप में
श्यामसुंदर किशोर के रूप में
भगवद गीता की शिक्षा के अनुसार इस संसार में शुभ या अशुभ वस्तुओ का बोध बुहत कुछ मनोधर्म है क्योंकि ?
शुभ अशुभ कुछ नही होता |
ऐसा आप कैसे कह सकते है | शुभ अशुभ होता है |
इस संसार में सब कुछ शुभ है |
प्रत्येक वस्तु अशुभ है , क्योंकि प्रकृति स्वयं ही अशुभ है |
आपका शुभ नाम क्या है ?
कृप्या अपना फोन नो. यहां लिखे ?
कृप्या अपना पता लिखे ?
कृपया आप अपनी उम्र लिखे ?
यदि हम इस संसार में शुभ चाहते हैं तो हमे क्या करना होगा ?
शुभ अशुभ जैसी कोई वस्तु नही |
ज्योतिष के अनुसार शुभ वेला / मुहूर्त पर कार्य शुरू / संपन्न करके शुभ प्राप्त किया जा सकता है |
हमे परमेश्वर की आज्ञा से कर्म करना होगा |
शुभ के लिए पूजा पाठ बहुत जरूरी है |
भगवद गीता के किस अध्याय से हमें पता चलता है कि भगवान अजन्मा होकर भी जन्म लेते है ?
4 th
6 th
8 th
9 th
भगवान अजन्मा है, इसे सबसे सटीक रूप से हम कैसे समझ सकते है ?
भगवान जीवों से भिन्न है, क्योंकि जीव भौतिक आसक्ति वश जन्म लेते और मरते रहते है |
भगवान बहिरंगा नही अंतरंगा शक्ति के माध्यम से प्रकट होते है
भगवान जब प्रकट होते है तो अपना शरीर नही बदलते अपितु अपने उसी आदि स्वरुप को प्रकट करते है |
उपरोक्त सभी |
चतुर्श्लोकी गीता किस अध्याय में आती है
7 th
8 th
9 th
10 th
कौन व्यक्ति मोहरहित तथा समस्त पापों से मुक्त होता है
जो पाप कर्म न करें |
जो पाप पुण्य से परे हो जाये |
जो कृष्ण को अजन्मा, अनादि और समस्त लोकों के स्वामी के रूप में जाने |
उपरोक्त सभी
अहिंसा का अर्थ क्या है ?
किसी को कष्ट न पहुंचाया जाए |
किसी का वध न किया जाय
किसी से मारपीट न की जाए
उपरोक्त सभी
निमान्न्लिखित में से कौन सा नाम ब्रह्मा जी का है ?
हिरण्यगर्भ |
पुरंदर |
हिरण्याक्ष |
अर्यमा |
ब्रह्मा जी के प्रथम पुत्र कौन थे ?
नारद |
असित |
चार कुमार |
मार्ककडेय |
चैतन्य महाप्रभु इस पृथ्वी पर कब प्रकट हुए ?
1484
1486
1485
1487
