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Worksheetsश्री जैन सिद्धांत प्रवेशिका - सम्यक्त्व, चारित्र, सुख, वीर्य
Total questions: 12
Worksheet time: 12mins
शुद्धात्मानुभवन से अविनाभावी विशेष चारित्र को ______ कहते हैं।
स्वरूपाचरणचारित्र
देशचारित्र
सकलचारित्र
यथाख्यातचारित्र
निश्चय सकलचारित्र _____ है।
मुनियों के व्रत
3 कषाय चौकड़ियों के अभाव से प्रकट हुई शुद्धता
2 कषाय चौकड़ियों के अभाव से प्रकट हुई शुद्धता
श्रावकों के व्रत
____ + ____ = आभ्यंतर क्रिया।
योग, कषाय
योग, अविरति
कषाय, प्रमाद
अविरति, प्रमाद
प्रमाद, योग
कषाय यह ____ है।
1. द्रव्यकर्म
2. भावकर्म
3. दोनों 1 & 2
4. कुछ कह नहीं सकते
5. न द्रव्यकर्म, न भावकर्म
सम्यग्दर्शन के उत्पत्ति की अपेक्षा से कौनसे दो भेद हैं? (दो सही विकल्प चुनें)
निसर्गज सम्यग्दर्शन
अधिगमज सम्यग्दर्शन
निश्चय सम्यग्दर्शन
व्यवहार सम्यग्दर्शन
क्षायिक सम्यग्दर्शन
चतुर्थ गुणस्थान में अपेक्षाभेद से _____ या _____ कहा जाता है। (दो सही विकल्प चुनें)
स्वरूपाचरणचारित्र
देशचारित्र
सकलचारित्र
यथाख्यातचारित्र
अचारित्र
क्या मौन के काल में वचनयोग संभव है?
हाँ
ना
आचार्य समन्तभद्र के शब्दों में _____ यह मोक्षमार्ग का कर्णधार है।
दर्शन
ज्ञान
चारित्र
संज्वलन कषाय चौकड़ी के अभाव में _____ प्रकट होता है।
सकलचारित्र
स्वरूपाचरण चारित्र
यथाख्यात चारित्र
देशचारित्र
सम्यग्दर्शन में दर्शन का अर्थ क्या है?
आँखों से देखना
सामान्य अवलोकन
जैन दर्शन (क्योंकि जैन दर्शन ही सम्यक है)
श्रद्धा गुण
निम्न में से कौनसे जीव कभी भी मोक्ष की प्राप्ति नहीं करते? ( एक से अधिक उत्तर संभव)
दूर भव्य
दूरान्दूर भव्य
अभव्य
निकट भव्य
भव्यत्व गुण वो होता है, जिसके कारण जीव कभी न कभी मोक्ष की प्राप्ति अवश्य करेगा।
हाँ
ना
