Font size
Worksheets66.श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_16.01-16.06
Total questions: 42
Worksheet time: 1hrs 24mins
कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना फोन नो. लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
दिव्य्गुणों से युक्त संतान की उत्पति हेतु सामाजिक जीवन में मनुष्यों के लिए कितने नियम बताए है ?
6
8
10
12
वैदिक अनुष्ठानो के अनुसार कौन से कार्य मुक्ति के पथ पर अग्रसर करते है ?
सतो गुणी कार्य
रजो गुणी कार्य
तमो गुणी कार्य
इनमे से कोई भी नहीं
कौन से अध्याय के प्रारंभ में इस भौतिक जगत रूपी अश्व्थ वृक्ष की व्याख्या की है ?
चौहदवें अध्याय में
पन्द्रहवे अध्याय में
सौहल्वें अध्याय में
सत्रहवें अध्याय में
अश्वत्थ वृक्ष से निकलने वाली अतिरिक्त जड़ो की तुलना जीवों के कौन से कर्मो से की गयी है ?
दैवीय कर्मों से
असुरी कर्मों से
1 और 2 दोनों से
शुभ और अशुभ कर्मो से
देवों और असुरों का वर्णन भगवद गीता के और कौन से अध्याय में हुआ है ?
नवें अध्याय में
दसवें अध्याय में
ग्यारहवें अध्याय में
आठवे अध्याय में
मनुष्य को कैसी संताने उत्पन करनी चाहिए ?
जो जन्म लेने के पश्चात् माता - पिता की सेवा कर सके
जो जन्म लेने के पश्चात् सामाजिक कार्य कर सके
जो जन्म लेने के पश्चात् कृष्णभावनाभावित हो सके
जो जन्म लेने के पश्चात् अपना जीवन यापन स्वयं कर सके
तीन वर्णों का गुरु कौन माना जाता है ?
सन्यासी
ब्रह्मण
क्षत्रिय
प्रशन गलत है
सन्यासी की पहली योग्यता क्या होनी चाहिए ?
निर्भयता
एकाकी
शुद्धता
इनमे से कोई नहीं
प्राचीन भारत में समाज को चार वर्ण और चार आश्रम में क्यों बाँटा गया था ?
ताकि ब्राह्मण सारे समाज पर राज कर सकें
ताकि समाज में सुख, शांति और समृद्धि बनी जा सके
ताकि समाज में के विभिन्न भागों/अंगों में आंतरिक मुक़ाबला/प्रतियोगिता ना हो
उपरोक्त सभी
वर्णाश्रम धर्म की प्रकार समाज में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखता है ?
क्यूँकि प्रत्येक व्यक्ति अपने गुण के अनुसार कार्य करता है
जब व्यक्ति अपने स्वाभाविक गुण के अनुसार कार्य करता है तब उस कार्य में गलती नहीं होती
वर्णाश्रम में प्रत्येक व्यक्ति विशेष रूप से ब्राह्मण और क्षत्रिय प्रशिक्षित होकर अपना कार्य करते थे अतः समाज में शांति बनी रहती थी
उपरोक्त सभी
एक भक्त किस प्रकार से भय रहित रहता है ?
क्यूँकि एक भक्त को भगवान विभिन्न शक्तियाँ प्रदान करते हैं
क्यूँकि एक भक्त हमेशा अन्य भक्तों के संग रहता है जो भक्त को सुरक्षा प्रमाण करते हैं
क्यूँकि एक भक्त सदैव इस बात पर विश्वास रखता है की कृष्ण सदैव भक्त के साथ हैं और वो भक्त की रक्षा करेंगे
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 16.1 से 16.3 तक निम्नलिखित में से कौन से दैवी गुण का उल्लेख भगवान कृष्ण ने नहीं किया है ?
आत्म संयम
भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति
सत्यता
तेज
अच्छी संतान उत्पन्न करने के निमित मैथून जीवन साक्षात ………….. है
पाप
यज्ञ
पुण्य
कृष्ण
भगवान कृष्ण 16वें अध्याय में दैवी और असुरी गुणो का वर्णन करते हैं।किंतु दैवी गुणो का वर्णन सिर्फ़ 3 श्लोकों मैं हुआ है और बाक़ी सारे अध्याय में आसुरी गुणो का ही वर्णन हुआ है ।ऐसा क्यूँ किया गया है
?
क्यूँकि दैवी गुणो का वर्णन इस अध्याय से पहले भी हो चुका है
क्यूँकि कलियुग में आसुरी गुणो की ही प्रधानता है इस कारण असुरी गुणो का अधिक वर्णन आवश्यक है
क्यूँकि अपने अंदर असुरी स्वभाव को पहचाने के लिए असुरी स्वभाव का अधिक वर्णन आवश्यक था
उपरोक्त सभी
जीवन में शुद्धता के पालन के लिए निम्नलिखित में से सबसे आवश्यक क्या है ?
दिन में दो बार नहाना
अर्चा विग्रह की सेवा
अवैध स्त्री संग से बचना
यज्ञ करना
श्रील प्रारूपक के तात्पर्य के अनुसार आत्मसंयम विशेष रूप से कौन से आश्रम के निमित है ?
ब्रह्मचर्य
गृहस्थ
वानप्रस्थ
सन्यास
तपस्या विशेष रूप से कौन से आश्रम के लिए हैं ?
ब्रह्मचर्य
गृहस्थ
वानप्रस्थ
सन्यास
अहिंसा का अर्थ क्या है ?
किसी जीव के प्रगतिशील जीवन को ना रोकना
किसी भी जीव को प्रगति करने में सहायता करना
किसी के साथ मारपीट और हत्या ना करना
उपरोक्त सभी
निम्नलिखित में से कौन से आसुरी गुण का वर्णन भगवान कृष्ण ने श्लोक संख्या 16.02 में नहीं किया है ?
दर्प
लोभ
क्रोध
अज्ञान
श्लोक संख्या 16.05 में भगवान कृष्ण ने विशेष रूप से अर्जुन को क्यूँ कहा कि अर्जुन दैवी गुणो से युक्त होकर जन्मा है ?
क्यूँकि अर्जुन भगवान का सखा था और कृष्ण अर्जुन का गुणगान करना चाहते थे
क्यूँकि अर्जुन ने जब असुरी गुणो के विषय के बारे में सुना तो अर्जुन को लगा कि कहीं वह भी अभिमान के कारण ही युद्ध तो नहीं कर रहा था
क्यूँकि अर्जुन समस्त दैवी गुणो से युक्त था
उपरोक्त सभी
दैवी स्वभाव की कसौटी क्या है ?
अच्छा स्वभाव
लोक मत
शास्त्र
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 16.06 के अनुसार असुर तथा देवता दोनो प्रजापति से उत्पन्न हुए हैं ।ये प्रजापति कौन हैं?
विष्णु
ब्रह्मा
भृगु
कश्यप
मनुष्य जाति का अधिनियम क्या है ?
मनु संहिता
भगवत् गीता
श्रीमद् भागवत
वेद
_________ में किये गये सारे कार्य मुक्तिपथ में प्रगति करने के लिए शुभ माने जाते हैं?
रजोगुण
सतोगुण
तमोगुण
प्रकृति के किसी भी गुना में किए गए कार्य मुक्तिपथ में प्रगति करने के लिए शुभ माने जाते हैं
गीता के अनुसार रजो और तमो गुण में रहकर कार्य करते व्यक्ति की गति क्या होती है?
वे मुक्ति प्राप्त करते हैं
वे आम तौर पर उच्च ग्रह प्रणाली में स्थानांतरित हो जाते हैं
उन्हें या तो मनुष्य की तरह इसी भौतिक जगत् में रहना होता है या फिर वे पशुयोनि में या इससे भी निम्न योनियों में अवतरित होते हैं
गीता इसका कोई विशेष उत्तर नहीं देती है
वर्णाश्रमधर्म किस योग्याता के अनुसार विभाजित किया जाना चाहिए ?
जन्म के अनुसार
पुरुष और स्त्री के आधार पर
शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर
धन संचय के आधार पर
नीचे दिए गए विकल्पों में से किसे सभी वर्णों का गुरु माना जाता है?
ब्राह्मण को
क्षत्रियों को
वैश्यो को
शूद्रों को
अध्याय 16 के पहले श्लोक में प्रभुपाद ने आदर्श सन्यासी किसे कहा है?
प्रभुपाद ने श्लोक में खुद को एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया
भगवान शिव को
भगवान चैतन्य महाप्रभु को
स्वामी विवेकानंद को
कृष्णाभवनमृत हेतु दिया गया दान की श्रेणी में आता है ?
सतोगुण
रजोगुण
तमोगुण
ये एक मिश्रीत दान है जो सबी श्रेणी का हिसा है
एक गृहस्थ को केवल _________ के लिए यौन गतिविधियों में शामिल होना चाहिए?
ऐसी सन्तान उत्पती के लिए, जो कृष्णभावनाभावित हो सके
सनातन धर्म का पालन करने वाली जनसंख्या बढ़ाने के लिए
यौन सुख का आनंद लेने के लिए
इसका उल्लेख हम गीता में कहीं नहीं मिला
इस युग के लिए संस्तुत सर्वश्रेष्ठ यज्ञ __________है?
संकीर्तन यज्ञ
अग्निहोत्र यज्ञ
देव यज्ञ
भूत यज्ञ
वेदों का मूल क्या प्रयोजन है ?
कर्म कांड में पूर्णता
निराकार भ्रम का पूर्ण ज्ञान
कृष्ण को समझना
देवी देवताओं की मूल स्थिति को जनना
निम्न में से कौन सा क्षत्रिय का कर्तव्य नहीं है ?
राज्य पर शासन
नागरिकों की रक्षा करें
यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी वर्ग के पुरुष अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं
व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाना
श्लोक 16.1 मैं कितने देवी/दिव्य गुणो का वर्ण हुआ है?
25
26
28
30
दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, कठोरता तथा अज्ञान. ये किस स्वभाव वाले लोगो के गुण है?
आसुरी
देवतुल्य पुरुषों
वैष्णव के
सिद्ध पुरुष के
संकीर्तन यज्ञ ----------------- कहा जाता है?
भगवान के पवित्र नाम के जाप करना अर्थार्थ: हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
शुद्ध भ्रामणो के साथ हवन करना
देवताओ को प्रसन्न करना हेतु विभीन कर्म करना
किसी भी वैदिक मंत्र का पाठ करना
अर्जुन भगवान का पार्षद था और _________ गुनो से युक्त था ?
देवी
आसुरी
तमोगुण
रजोगुण
मोक्ष के लिए ________अनुकूल हैं ?
दिव्य गुण
आसुरी गुण
मोक्ष के लिए दोनो गुनो से ऊपर होना होता है
प्रकृति के नीचले गुण
