Worksheets67.श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_16.07-16.16
Total questions: 37
Worksheet time: 1hrs 14mins
“यह जगत मिथ्या है” इस प्रकार का विचार कौन से प्रकार के लोग रखते हैं ?
दैवी स्वभाव के लोग
विरक्त पुरुष
आसुरी स्वभाव के लोग
उपरोक्त सभी
दैवी स्वभाव के लोग इस जगत के प्रति क्या भाव रखते हैं ?
यह संसार मिथ्या है
यह संसार अस्थाई है
यह संसार शून्य है
उपरोक्त सभी
आसुरी स्वभाव के व्यक्ति क्यों ईश्वर के नियमन व अस्तित्व को क्यूँ स्वीकार नहीं करते ?
ज्ञान के अभाव के कारण
श्रद्धा न होने कारण
संसार में तीव्र आसक्ति होने के कारण
उपरोक्त सभी
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण नाभिकीय अस्त्रों के के आविष्कार की अप्रत्यक्ष सूचना देते हैं ?
15.09
15.10
15.11
15.12
आज का आधुनिक समाज क्यूँ अधिकाधिक हिंसक और क्रूर होता जा रहा है ?
अधिक से अधिक इंद्रियतृप्ति के लिए प्रयासरत रहने के कारण
विज्ञान में प्रगति के कारण
पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने के कारण
उपरोक्त सभी
आसुरी मनोवृत्ति वाला व्यक्ति सबसे अधिक किस वस्तु की ओर आकृष्ट होता है ?
कामसुख व सम्पत्ति संचय
स्वर्ग के सुख
अपने नाम बड़ाई के लिए धार्मिक कार्य
उपरोक्त सभी
असुरों के अनुसार मानव सभ्यता की मूल आवश्यकता क्या है ?
काम सुख
इंद्रियों की तुष्टि
धन
उपरोक्त सभी
एक आसुरी व्यक्ति इंद्रिय भोग के लिए कोई भी पाप कर्म करने के लिए स्वतंत्र क्यूँ मानता है ?
क्यूँकि ऐसा व्यक्ति अहंकारी होता है
क्यूँकि ऐसा व्यक्ति वैष्णव अपराध करता है
क्यूँकि ऐसे व्यक्ति को शस्त्रों में श्रद्धा और ज्ञान नहीं रहता
उपरोक्त सभी
भगवान कृष्ण आसुरी गुणो का वर्णन करते हुए कहते हैं की असुरी व्यक्ति सदैव अधिक से अधिक धन संचय करने की योजनाएँ बनाता रहता है ।क्या अधिक धन कमाना असुरी गुण है ?
हाँ, क्यूँकि धन से बुद्धि का नाश होता है
नहीं , भगवान कृष्ण तो यहाँ आवश्यकता पूरी होने के उपरांत धन से संतुष्टि के विषय में वर्णन कर रहे हैं
हाँ, क्यूँकि भागवतम के अनुसार कृष्ण केवल अकिंचन भक्तों को ही मिलते हैं
नहीं, क्यूँकि धन ना हो तो जीव का पालन पोषण भी ना हो
श्लोक संख्या 13.15 के अनुसार एक आसुरी स्वभाव का व्यक्ति क्या सोचता है ?
यज्ञ करने के विषय में सोचता है
दान देनें के विषय में सोचता है
आनंद मनाने के विषय में सोचता है
उपरोक्त सभी
एक आसुरी व्यक्ति शास्त्रों में श्रद्धा से विहीन होता है फिर वह यज्ञ और दान क्यूँ करता है ?
ऐसा व्यक्ति भक्तों से प्रेरित होकर यज्ञ और दान देता है
ऐसा व्यक्ति अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए यज्ञ और दान देता है
ऐसा व्यक्ति शास्त्रों में संस्तुत विधि के बिना यज्ञ और दान देता है
2 और 3
एक आसुरी व्यक्ति निम्नलिखित में से किस बात पर विश्वास रखता है ?
कर्म सिद्धांत पर
अपने बाहुबल पर
संयोग पर
2 और 3
विभिन्न पक्षों में शत्रुता मूल में किस कारण से होती है ?
भगवान की इच्छा के कारण
इंद्रिय तृप्ति में बाधा उत्पन्न होने कारण
पृथ्वी में सीमित साधन होने के कारण
उपरोक्त सभी
श्लोक संख्या 16.16 के अनुसार जब एक आसुरी व्यक्ति अपने से अधिक धनी और ऐश्वर्यवान देखता है तो उस के मन में क्या भाव उठते हैं ?
ईर्ष्या भाव
शत्रुता के भाव
वह दूसरे व्यक्तियों को इस प्रकार देखने पर भी अपने को ही अधिक धनी और ऐश्वर्यवान समझता
उपरोक्त सभी
जो वैदिक सभ्यता का पालन करते हैं उन्हे __________कहा जाता है?
विनयगण
सभ्य गण
आर्यगण
सनातनी
आंतरिक स्वच्छता के लिए प्रभुपाद किस तकनिक का पालन करने का सुझाव दे रहे है?
ईश्वर के पवित्र नामों का स्मरण करे और हरे कृष्ण महा मन्त्र का कीर्तन करे
निर्विशेष का ध्यान करे
पवित्र ब्राह्मण के साथ हवन में आहुति दे
आप किसी भी अध्यात्म मार्ग का अनुसरण कर सकते हैं, अंतिम गंतव्य एक ही है
यह जगत्माया जाल है, इसका न कोई कारण है, न कार्य, न नियामक, न कोई प्रयोजन – हर वस्तु मिथ्या है. ऐसे सोच के व्यक्ति किस श्रेणी में आते हैं ?
दिव्या श्रेणी में
ऐसा आर्यगनो का मत है
आसुरी श्रेणी में
ऐसा नित्य मुक्त जीव का मत है
आत्म तथा पदार्थ में क्या अंतर है?
आत्मा भौतिक है और पदार्थ अध्यात्म है
आत्मा और पदार्थ दोनों ही अध्यात्म है
आत्मा आध्यात्मिक है जबकि पदार्थ भौतिक है
आत्मा और पदार्थ दोनों ही भौतिक हैं
भौतिक शरीर पदार्थ का संयोगमात्र है, जिसने जीवों को उत्पन्न किया, अतएव आत्मा के अस्तित्व का प्रश्न ही नहीं है. ये शिक्षाएँ क्या प्रदर्शित करती हैं?
ये है रूप गोस्वामी की शिक्षाओ का सार
ये है वेदो का सार
ऐसा आसुरी स्वभाव के लोगो का मनाना है
ये भगवत गीता का निष्कर्ष है
सामान्य तौर पर लोग आधुनिक उन्नति को शाश्वत सुख की कुंजी मानते हैं। परन्तु _______ के बिना ना ही शांति ना ही मानव समाज में शाश्वत सुख संभव है ?
आध्यात्मिक ज्ञान के अनुशीलन
आत्मरक्षा के लिए परमाणु बम का निर्माण
भोजन, वस्त्र और आश्रय के साथ एक दूसरे की सहायता किए बिना
निर्विशेष का ध्यान किया बिना
असुरों में ____ कि तृप्ति नहीं होती ?
अध्यात्म ज्ञान में आगे बढ़ने
काम की इच्छा
नाम जप में रूचि
सतोगुण में रहने की इच्छा
किस आसुरी प्रवृत्ति का वर्णन गीता के 16 अध्याय में नहीं हुआ है ?
मद्य, स्त्रियों, द्यूत क्रीडा तथा मांसाहार के प्रति आसक्ति
क्षणभंगुर वस्तुओं को स्वीकार करना
गुरु आश्रय लेकर भक्ति में आगे बढ़ना
अहंकार से प्रेरित होना
आसुरी प्रवृत्ति के लोग _____और _______से आकर्षित होते हैं ?
भगवान और भक्ति से
भगवान और भक्तों की संगती से
कामभोग तथा सम्पत्ति संचय से
शास्त्र तथा आर्चविग्रह से
कृष्णाभवनामृत हेतु दिया गया दान____ की श्रेणी में आता है?
सतोगुण
रजोगुण
तमोगुण
ये एक मिश्रीत दान है जो सभी श्रेणी का हिस्सा है
शास्त्रो का मत है की भोक्ता _____ है _______ नहीं ?
भगवान कृष्णा है जीव नहीं
जीव है भगवान नहीं
शास्त्रो का मत है सब कुछ शून्य है कोई भोक्ता नहीं
देवी दुर्गा है कृष्णा नहीं
मृत्यु के बाद जीवन है. ये विश्र्वास नहीं करना ______ है ?
ज्ञान
अज्ञान
ज्ञान की पूर्णता है
आर्य गण का मत है
अन्तर में स्थित परमात्मा _______ का अंश है ?
कृष्ण का
महादेव का
निराकार ब्रहम का
देवी दुर्गा का
एक वृक्ष में दो पक्षी बैठे हैं, एक पक्षी कर्म करता हुआ टहनियों में लगे सुख-दुख रूपी फलों को भोग रहा है और दूसरा उसका साक्षी है | यह व्याख्या __ से ली गई है जैसा कि अध्याय 2 में भी पुष्टि की गई है ?
मुंडकउपनिषद और श्वेताश्वतर उपनिषद
ईशोपनिषद
चैतन्य चरित्रामृत
श्रीमद भागवतम
मोक्ष के लिए ________अनुकूल हैं ?
दिव्य गुण
आसुरी गुण
मोक्ष के लिए दोनो गुणों से ऊपर होना होता है
प्रकृति के निचले गुण
इस युग में असुरी प्रवर्ति से उठने के लिए संस्तुत सर्वश्रेष्ठ यज्ञ __________है ?
संकीर्तन यज्ञ
अग्निहोत्र यज्ञ
देव यज्ञ
भूत यज्ञ
कुछ हासिल करने के उद्देश्य से किया गया दान ______ के अंतरगत है ?
सतोगुण
रजो और तमोगुण
आध्यात्मिक उन्नति के अंतरगत
ऐसे दान पवित्रता के प्रतीक हैं
हम सभी को दैनिक जीवन में आसुरी गुणों वाले लोगों से मिलने, काम करने और उनके साथ व्यवहार करने का व्यक्तिगत अनुभव होता है । हमें अपनी भौतिक जिम्मेदारियों का ध्यान रखते हुए अपनी चेतना को कैसे अप्रभावित रख सकते हैं ?
हमें भक्तों की संगति में पूरे मनोयोग से भगवान के पवित्र नाम का जाप करना चाहिए
हमें श्रील प्रभुपाद द्वारा दिए गए शास्त्रों को पढ़ने तथा प्रतिदिन मंगला आरती करनी चाहिए
हमें प्रतिदिन वरिष्ठ भक्तों से गीता और भागवतम को ध्यान पूर्वक सुनना चाहिए
उपरोक्त सभी का पालन करके
अपनी खोई हुई कृष्ण चेतना को पुनर्जीवित करने के लिए हम निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया का अनुसरण कर सकते हैं ?
प्रमाणिक स्रोतों से कृष्ण का नाम, रूप, गुण और लीलाओं के बारे में सुनना
हम कृष्ण के बारे में किसी से भी सुन सकते हैं। यह हमें शुद्ध करने में मदद करेगा
इस कलियुग में ध्यान की आवश्यकता है। निर्वात कमरे में बैठकर मन को एकाग्र करने का प्रयास करें। यह हमें शुद्ध करेगा
बार-बार मंदिरों में जाकर शुद्धिकरण और खोई हुई कृष्ण चेतना को पुनर्जीवित किया जा सकता है
कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना फोन नो . लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
