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Worksheets68.श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_16.16-16.21
Total questions: 44
Worksheet time: 44mins
------------- व्यक्ति धन अर्जित करने की इच्छा की कोई सीमा नहीं जानता उसकी इच्छा असीम बनी रहती है ?
भक्त
अभक्त
आसुरी व्यक्ति
दैवीय स्वभाव व्यक्ति
किसी प्रमाण या शास्त्र की परवाह न करके कभी कभी तथाकथित लोग बड़े ही गर्व के साथ यज्ञ करते है ?
भक्त
श्रद्धालु
आसुरी
ब्राहमण
"अविधि - पूर्वकम " शब्द का अर्थ है ?
समय से पूर्व
विधि- पूर्वक
विधि - विधानों की पालन न करते हुए
विधि -विधानों का पालन करते हुए
सोलहवें अध्याय के कौन से श्लोक संख्या में आसुरी व्यक्ति यज्ञ का अनुष्ठान करते है ?
16.15
16.16
16.17
16.18
आसुरी लोगों में ईर्ष्या कहाँ से उत्पन होती है ?
तथाकथित प्रतिष्ठा तथा धन एवं शक्ति के संग्रह से
धार्मिक अनुष्ठान करके
ये प्रशन ही गलत है
1 और 2
इस जन्म में संग्रह की हुई सम्पति (भक्ति या मिथ्या अंहकार ) हमारे अगले जीवन की तैयारी है ये कौन से श्लोक संख्या में कहा गया है ?
16.16
16.18
16.17
16.19
संसार में जीवों की इतनी योनिया किसके द्वारा व्यवस्थित है ?
मन्ष्यों के कर्म द्वारा
श्री भगवान द्वारा
धार्मिक अनुष्ठान द्वारा
आसुरी लोगों के यज्ञ के द्वारा
मृत्यु के बाद जीव को माता के गर्भ में रखा जाता है जहाँ उच्च शक्ति के नरीक्षण में उसे विशेष प्रकार का शरीर प्राप्त होता है यह श्रीमद भागवतम के कौन से स्कन्ध में कहा गया है ?
पहले स्कंध
द्वितीय स्कंध
तृतीय स्कंध
चतुर्थ स्कंध
कौन सी योनि में जन्म लेने वाले श्री भगवान तक नहीं पहुँच पाते है और अधम गति को प्राप्त करते है ?
आसुरी योनि में
देव योनि में
वृक्षों योनि में
इनमे से कोई भी नहीं
यदि ईश्वर असुरों पर कृपालु नहीं (उन्हें अधम गति में भेजते )है तो श्री भगवान को सर्व कृपालु क्यों कहा जाता है ?
असुरों को निम्न योनि में रखना श्री भगवान की जिद्द है
असुरों को निम्न योनि में रखना श्री भगवान की चालाकी है
असुरों को निम्न योनि में रखना श्री भगवान का छल है
असुरों को निम्न योनि में रखना श्री भगवान की कृपा की अन्य विशेषता है
कृप्या यहाँ पर अपना नाम लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना पता लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपना फोन नो. लिखे ?
कृप्या यहाँ पर अपनी आयु लिखे ?
खुद को आध्यात्मिक ज्ञान का उपदेशक की भूमिका में रखना, धार्मिक सुधारक या ईश्र्वर के अवतारों के रूप में मानना _____ और_______ के कारण व्यक्ति करता है ?
ज्ञान और अनुभव
भगवान को आत्मसमापन और उनके प्रति निष्ठा के कारण
अज्ञान तथा मोह
अनुभव तथा भगवान के प्रति प्रेम के कारण
वास्तव में इस संसार से विरक्त होने वाले पर अनेक प्रतिबन्ध होते हैं । लेकिन ये ______ प्रवृति के व्यक्ति भौतिक भोग करते हुए इन प्रतिबन्धों की परवाह नहीं करते ?
नित्य सिद्ध
असुर
भगवत भक्त
शुद्ध चेतना वाला व्यक्ति
भगवान की भक्ति में न लगना एक प्रकार की ________ ही है
अहिंसा
हिंसा
सहानुभूति
आध्यात्मिक प्रेम का लक्ष्य
वर्तमान जीवन _______की तैयारी है ?
अगले जीवन
भविष्य के प्रयास
वृध्दावस्था
भविष्य की कमाई
श्लोक 16.19 में भगवान कहते हैं जो लोग ईर्ष्यालु तथा क्रूर हैं और नराधम हैं, उन्हें मैं निरन्तर _____ तथा _____में डालता रहता हूँ ?
विभिन्न आसुरी योनि तथा भवसागर
उच्च योनि तथा स्वर्ग
मनुष्य योनि तथा तथा अच्छे परिवार
देवता की योनि तथा देव लोक
देहात्मबुधि से निकलने के लिए भगवान गीता में किस विधि का पालन करने की सलाह दे रहे हैं ?
भक्ति में लगकर विधि विधानो का पालन करने की
अनासक्त रहकर निर्वेश का ध्यान करने की
एकांत में रहकर परमात्मा का ध्यान करने की
कृष्ण किसी भी तरीके को अपनाने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन कठोरता से पालन करने के लिए कह रहे हैं
मृत्यु के बाद जीव को माता के गर्भ में रखा जाता है, जहाँ उच्च शक्ति के निरिक्षण में उसे विशेष प्रकार का शरीर प्राप्त होता है. इसका स्पष्टीकरण किस ग्रंथ में किया गया है ?
श्रीमद्भागवतम्
चैतन्य चरणामृत
उपदेशामृत
ब्रह्म संहिता
श्लोक 16.19 में नीचे से किस वर्ग के लोगों को असुर के रूप में प्रयोग किया गया है?
सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले लोग
अनैतिक तरीके से अपना धंधा चला रहे लोग
जंगलों के अनेक शिकारी मनुष्य को
देश में अशांति फैलाने का काम कर रहे लोग
हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए भगवान किस रूप में आय ?
नरसिंह रूप
वामन रूप
वराह रूप में
राम रूप में
परमेश्र्वर किसी से घृणा नहीं करते. श्लोक 16.20 के अनुसार ये हमें _______ से पता चलता है ?
उपनिषदों से
पुराणों से
वेदान्तसूत्र
वेद से
वैदिक साहित्य से पता चलता है कि जिस किसी का वध परमेश्र्वर द्वारा होता है, उसको _____ मिल जाती है ?
मुक्ति
अधम योनि
देव लोक की प्राप्ति
मनुष्य शरीर की प्राप्ति
नरक के कितने द्वार का वर्णन श्लोक 16.21 में हुआ है?
3
4
5
6
वैदिक पद्धति के अनुसार ____ आश्रमों तथा ____ वर्णों का विधान किया गया है ?
4.4
4.6
4.7
4.8
मृत्युरूपी भवबंधन से निकलने की सर्वोत्कृष्ट विधि क्या है?
भगवद्भक्ति
निराकार ब्रह्म का ध्यान
परोपकारी कार्य
योग अभ्यास
सिद्धावस्था को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को चाहिए की अपने को _______में ऊपर ले जाये ?
गहन ध्यान
निराकार की प्राप्ति
कृष्णभावना मृत
परोपकारी कार्य में
गीता के ______अध्याय में कहा है वेदों के सारे विधि-विधान कृष्ण को जानने के लिए हैं ?
15
17
18
11
भगवान के किस अवतार ने कलियुग में कृष्ण भावनामृत को अत्यन्त सरल बना दिया है ?
चैतन्य महाप्रभु
भगवान वामन
भगवान राम
भगवान परशुराम
निम्न में से क्या बद्धजीव में नहीं पाया जाता है?
पूर्ण इन्द्रियाँ
कपटता
त्रुटि करना
मोहग्रस्त होना
________आसुरी जीवन के कारण स्वरूप हैं ?
तमो तथा रजो गुण
सतोगुण
शुद्ध सतोगुण
प्रकृति के सभी प्रकार के गुण
आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए किस की शरण में जाना अनिवार्य है ?
प्रमाणिक गुरु के
एक योगी के
एक निराकारी प्रचारक के
जो कोई भी शांति और सद्भाव से प्यार करता है
निम्नलिखित में से कौन से श्लोक में भगवान कृष्ण शास्त्रों में वर्णित विधि के पालन पर बल देते हैं ?
16.16
16.17
16.18
16.19
असुर व्यक्तियों में कुछ धन अथवा प्रतिष्ठा प्राप्त करने पर जो मोह उत्पन्न होता है उससे उनमें क्या प्रकट होता हैं ?
घमंड
मिथ्याचार
असत्य भाषण
उपरोक्त सभी
समाज में बड़े बड़े धर्म उपदेशक, संन्यासी अथवा समाज सुधारकों को कब असुरी माना जाएगा ?
अगर ऐसे लोग शास्त्रों की विधि का पालन न करें
अगर ऐसे लोग अपने मनगढ़ंत मार्ग का निर्माण करें
अगर ऐसे लोग शास्त्रों में वर्णित प्रतिबंधों का पालन न करें
उपरोक्त सभी
निम्न लिखित में से कौन सा अनर्थ अन्य सभी अनर्थों की जड़ है ?
कामवासना
क्रोध
लोभ
असूया
एक आसुरी व्यक्ति की भगवान करे प्रति ईर्ष्या कब बढ़ जाती है ?
जब आसुरी व्यक्ति को संसार में कष्ट मिलता है
जब असुरी व्यक्ति संसार में धन, शक्ति एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करता है
जब आसुरी व्यक्ति समाज में परोपकार करता है
उपरोक्त सभी
एक आसुरी व्यक्ति ……… के प्रति ईर्ष्या करने के कारण ही ……… के प्रति ईर्ष्या करता है ।
भगवान, जीवों
जीवों, भगवान
भगवान, स्वयं
स्वयं, भगवान
श्लोक संख्या 16.17 में भगवान कृष्ण निम्नलिखित में से कौन से अनर्थ का उल्लेख नहीं किया हैं ?
काम
दर्प
बल
लोभ
श्लोक संख्या 16.19 के अनुसार आसुरी व्यक्तियों को कौन विभिन्न आसुरी योनियों में डालता है ?
यम दूत
माया शक्ति
यमराज
भगवान कृष्ण
अगर भगवान कृष्ण परम दयालु हैं तो वो असुरों पर दया क्यूँ नहीं करते ?
भगवान कृष्ण किसी से घृणा नहीं करते अपितु असुरों को निम्न योनि में रखना भी उन पर भगवान की कृपा है
भगवान कृष्ण असुरों का वध करके उन्हें संसार से मुक्त कर कृपा करते हैं
भगवान कृष्ण कभी किसी की व्यक्तिगत इच्छा पर रोक नहीं लगते
उपरोक्त सभी
लोग संख्या 16.21 में भगवान कृष्ण काम, क्रोध और लोभ को नरक के तीन द्वार बतलाते है।इससे पूर्व निम्नलिखित कौन से श्लोक में है भगवान कृष्ण इसी प्रकार का उपदेश करते हैं ?
2.62
2.63
3.37
उपरोक्त सभी
