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Assessment

Presentation

•

Other

•

9th Grade

•

Hard

Created by

Bhikha Gohel

FREE Resource

3 Slides • 0 Questions

1

​बात अठन्नी की - सुदर्शन

By Bhikha Gohel

2

​रसीला इंजीनियर बाबू जगतसिंह के यहाँ नौकर था। दस रुपए वेतन था। गाँव में उसके बूढ़े पिता, पत्नी, एक लड़की और दो लड़के थे। इन सबका भार उसी के कंधों पर था। वह सारी तनख्वाह घर भेज देता, पर घरवालों का गुजारा न चल पाता। उसने इंजीनियर साहब से वेतन बढाने की बार-बार प्रार्थना की पर वह हर बार यही कहते "अगर तुम्हें कोई ज्यादा दे तो अवश्य चले जाओ। मैं तनख्वाह नहीं बढ़ाऊँगा।"


वह सोचता, "यहाँ इतने सालों से हूँ। अमीर लोग नौकरों पर विश्वास नहीं करते, पर मुझ पर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यहाँ से जाऊँ तो शायद कोई ग्यारह-बारह दे दे, पर ऐसा आदर न मिलेगा।"


जिला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन इंजीनियर बाबू के पड़ोस में रहते थे। उनके चौकीदार मियाँ रमजान और रसीला में बहुत मैत्री थी। दोनों घंटों साथ बैठते, बातें करते। शेख साहब फलों के शौकीन थे, रमजान रसीला को फल देता। इंजीनियर साहब को मिठाई का शौक था, रसीला रमजान को मिठाई देता।

एक दिन रमजान ने रसीला को उदास देखकर कारण पूछा। पहले तो रसीला छिपाता रहा। फिर रमज़ान ने कहा, "कोई बात नहीं है, तो खाओ सौगंध।"

रसीला ने रमजान का हठ देखा तो आँखें भर आईं। बोला, "घर से खत आया है, बच्चे बीमार हैं और रुपया नहीं है।"

"तो मालिक से पेशगी' माँग लो।"

"कहते हैं, एक पैसा भी न दूँगा।"


3

​रमजान ने ठंडी साँस भरी। उसने रसीला को ठहरने का संकेत किया और आप कोठरी में चला गया। थोड़ी देर बाद उसने कुछ रुपए रसीला की हथेली पर रख दिए। रसीला के मुँह से एक शब्द भी न निकला। सोचने लगा, "बाबू साहब की मैंने इतनी सेवा की, पर दुख में उन्होंने साथ न दिया। रमजान को देखो गरीब है, परंतु आदमी नहीं, देवता है। ईश्वर उसका भला करे।"
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​बात अठन्नी की - सुदर्शन

By Bhikha Gohel

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