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Bhagavad Gita As It Is DAY-51 (13.13-22)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-51 (13.13-22)
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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किस ज्ञाता के ज्ञान से मनुष्य जीवन-अमृत का आस्वादन कर सकता है? (13.13)

केवल आत्मा

केवल परमात्मा

आत्मा तथा परमात्मा दोनों

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

आनन्दब्रह्म और विज्ञानब्रह्म में क्या अंतर है? (13.13)

विज्ञानब्रह्म शब्द जीवात्मा के लिए व्यवहृत होता है जबकि आनन्द ब्रह्म ही परब्रह्म भगवान् है

आनन्द ब्रह्म शब्द जीवात्मा के लिए व्यवहृत होता है जबकि विज्ञानब्रह्म ही परब्रह्म भगवान् है

3.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

वैदिक साहित्य से कहाँ पुष्टि होती है कि शरीर का ज्ञाता (आत्मा) न तो कभी उत्पन्न होता है, और न मरता है, परमात्मा मुख्य ज्ञाता है और प्रकृति के गुणों का स्वामी है व जीवात्माएँ सदा भगवान् की सेवा में लगी रहती हैं? (13.13)

न जायते म्रियते वा विपश्चित् (कठोपनिषद् 1.2.18)

प्रधान क्षेत्रज्ञपतिर्गुणेशः (श्वेताश्वतर उपनिषद 6.16)

स्मृति वचन है – दासभूतो हरेरेव नान्यस्यैव कदाचन

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

उनके हाथ, पाँव, आखें, सिर तथा मुँह तथा उनके कान सर्वत्र हैं - यह किसके लिए कहा गया है? (13.14)

आत्मा (जीव)

परमात्मा या भगवान्

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

कौन सर्वव्यापक है? किसके हाथ, पाँव तथा नेत्र चारों दिशाओं में हैं? कौन अपना हाथ असीम दूरी तक फैला सकता है? (13.14)

आत्मा (जीव)

परमात्मा या भगवान्

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

परमात्मा समस्त इन्द्रियों के मूल स्त्रोत हैं, फिर भी वे इन्द्रियों से रहित हैं - इसका क्या अर्थ है? (13.15)

स्पष्ट है कि परमात्मा का कोई आकार नहीं है अर्थात वे निराकार हैं

उनकी इन्द्रियाँ दिव्य होती हैं, उनके हाथ, पाँव, नेत्र तथा अन्य इन्द्रियाँ प्रकृति द्वारा कल्मषग्रस्त नहीं होतीं

7.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

क्या प्रमाण है कि भगवान् के नेत्र, हाथ, पाँव इत्यादि होते हैं? (13.15)

श्वेताश्वतर उपनिषद् (3.19) अपाणिपादो जवनोग्रहीता

उनके हाथ होते तो वे अर्पित वस्तु ग्रहण नहीं करते?

नेत्र होते तो वे भूत-वर्तमान-भविष्य नहीं देख लेते?

उनके पाँव नहीं हैं, वे कहीं आ-जा नहीं सकते

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