wayground logo

Free Printable Worksheets

Font size

S
M
L
XL
Worksheets

Bhagavad Gita As It Is DAY-18 (4.10-19)

Total questions: 25

Worksheet time: 2hrs 5mins

Name
Class
Date
1.

भौतिकतावादी व्यक्ति, जो देहात्मबुद्धि में आसक्त होते हैं, उनके लिए क्या समझ पाना असम्भव सा है? (4.10)

a)

परमात्मा व्यक्ति भी हो सकता है

b)

ऐसा भी दिव्य शरीर है जो नित्य तथा सच्चिदानन्दमय है

c)

मुक्ति के बाद भी अपना स्वरूप बनाये रखने के विचार से डरते हैं

d)

पुनः व्यक्ति बनने से भयभीत हो उठते हैं

2.

भौतिक जगत् के प्रति आसक्ति की अवस्थाएं कौन सी हैं? (4.10)

a)

आध्यात्मिक जीवन की उपेक्षा

b)

आध्यात्मिक साकार रूप का भय

c)

जीवन की हताशा से उत्पन्न शून्यवाद की कल्पना

d)

आध्यात्मिक जगत में भी भगवान् की सेवा की चाह

3.

भौतिक जगत् के प्रति आसक्ति की तीनों अवस्थाओं से छुटकारा पाने के लिए क्या आवश्यक है? (4.10)

a)

प्रामाणिक गुरु का निर्देशन

b)

भगवान् की शरण ग्रहण करना

c)

भक्तिमय जीवन के नियम तथा विधि-विधानों का पालन

d)

भौतिक व्यक्तिओं, वस्तुओं आदि से घृणा

4.

भक्तिरसामृतसिन्धु के अनुसार भगवत्प्रेम तक के नौ सोपान कौन से हैं? (4.10)

a)

श्रद्धा-साधुसंग-भजनक्रिया

b)

संग-काम-क्रोध

c)

अनर्थ निवृत्ति-निष्ठा-रूचि

d)

सम्मोह-स्मृति विभ्रम-बुद्धिनाश

e)

आसक्ति-भाव-प्रेम

5.

दिव्य जगत् में कृष्ण अपने शुद्ध भक्तों के साथ दिव्य भाव से किस प्रकार विनिमय करते हैं? (4.11)

a)

परम स्वामी के रूप में

b)

सखा के रूप में

c)

पुत्र के रूप में

d)

प्रेमी के रूप में

e)

शत्रु के रूप में

6.

निर्विशेषवादी कौन हैं? (4.11)

a)

जो जीवात्मा के अस्तित्व को मिटाकर आध्यात्मिक आत्मघात करना चाहते हैं

b)

जो सच्चिदानन्द भगवान् को स्वीकार नहीं करते

c)

जो निर्विशेष ब्रह्मज्योति तेज में लीन होना चाहते हैं

7.

मनुष्य चाहे निष्काम हो या फल का इच्छुक या मुक्ति का इच्छुक ही क्यों न हो, उसे पूरे सामर्थ्य से क्या करना चाहिए? (4.11)

a)

भगवान् की सेवा

b)

भगवान् की नक़ल

c)

भगवान् की निंदा

d)

भगवान् की अवहेलना

8.

ब्रह्मा, शिव तथा अन्य देवताओं के विषय में क्या सत्य है? (4.12)

a)

सभी देवता – नारायण, विष्णु या कृष्ण के तुल्य हैं

b)

जो ईश्र्वर तथा देवताओं को एक नहीं मानता, वह नास्तिक है

c)

सभी देवताओं को भौतिक जगत् का प्रबन्ध हेतु शक्तियाँ प्राप्त हैं

d)

सभी देवता परमेश्वर के विभिन्न रूप हैं

9.

देवता तथा उनके पूजक, इस संसार के संहार के साथ ही विनष्ट हो जाएँगे | फिर भी लोग किसी तत्काल क्षणिक लाभ के लिए किसी तुच्छ देवता की पूजा क्यों करते हैं? (4.12)

a)

मानव समाज क्षणिक वस्तुओं – यथा सम्पत्ति, परिवार तथा भोग की सामग्री के पीछे पागल रहता है और उसे प्राप्त करके सोचता है कि उसने महान वरदान प्राप्त कर लिया है

b)

ऐसे मुर्ख व्यक्ति इस संसार के कष्टों के स्थायी निवारण के लिए कृष्णभावनामृत में अभिरुचि नहीं दिखाते और थोड़े से इन्द्रियसुख के पीछे दीवाने रहते हैं

10.

मानव समाज के चार विभाग कैसे रचे गए? (4.13)

a)

प्रकृति के तीनों गुणों के अनुसार

b)

सम्बद्ध कर्म के अनुसार

c)

स्वार्थी मनुष्यों के द्वारा

d)

जन्म के आधार पर

e)

भगवान् श्रीकृष्ण के द्वारा

11.

जो मनुष्य निर्विशेष ब्रह्मस्वरूप के सीमित ज्ञान को लाँघकर भगवान् श्रीकृष्ण के ज्ञान तक पहुँच जाता है, वह क्या होता है? (4.13)

a)

वैष्णव

b)

ब्राह्मण

c)

क्षत्रिय

d)

वैश्य

e)

शूद्र

12.

वैश्य कहलाने वाले लोग प्रकृति के किन गुणों के मिश्रण से युक्त होते हैं? (4.13)

a)

सतो व रजो

b)

रजो व तमो

c)

तमो व सतो

13.

इनमें से क्या सही नहीं है? (4.13)

a)

कृष्ण किसी वर्ण में नहीं आते, क्योंकि वे बद्धजीव नहीं हैं

b)

हमें पशु-स्तर से उठाने के लिए ही वर्णाश्रम की रचना की गई

c)

हमारी कार्यप्रवृत्ति का निर्धारण अर्जित गुणों द्वारा होता है

d)

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति ब्राह्मण से बढ़कर नहीं होता है

e)

कृष्णभावनामृत में राम, नृसिंह आदि का ज्ञान भी रहता है

14.

भगवान् इस भौतिक जगत् के स्त्रष्टा हैं, किन्तु वे भौतिक जगत् के अच्छे-बुरे कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं | इस तथ्य की पुष्टि के लिए क्या-क्या उदाहरण दिए गए हैं? (4.14)

a)

राजा न तो दण्डनीय है, न ही किसी राजनियमों के अधीन रहता है

b)

संस्थान का स्वामी कभी कर्मचारियों सा निम्न सुख नहीं चाहता

c)

विभिन्न वनस्पतियों के उगने के लिए वर्षा उत्तरदायी नहीं है

15.

शुभाशुभ कर्मों के फल भोगने के लिए कौन उत्तरदायी है? (4.14)

a)

भगवान् क्योंकि वे ही ऐसे कर्म करने के लिए समुचित सुविधाएँ प्रदान करने वाले हैं

b)

प्रकृति क्योंकि बहिरंगा शक्ति के माध्यम से ही सुविधा प्रदाता विराट जगत् दृष्टिगोचर होता है

c)

जीवात्मा अपने कर्मों के लिए स्वयं उत्तरदायी है

16.

कृष्णभावनामृत में नवदीक्षित प्रायः जिनके मनों में दूषित विचार भरे हैं, उनके लिए भगवान् का क्या आदेश है? (4.15)

a)

भक्ति के अनुष्ठानों का पालन करते हुए क्रमिक शुद्धिकरण के लिए कृष्णभावनामृत को ग्रहण करें

b)

कृष्णभावनामृत का पूरा ज्ञान प्राप्त किये बिना कार्य से विरत हो जाएँ

c)

सूर्यदेव विवस्वान् के पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए कृष्णभावनामृत में कार्य करे

17.

क्या अधिक महत्त्वपूर्ण है? (4.15)

a)

कृष्णभावनामृत के कार्यों से विमुख होना

b)

एकान्त में बैठकर कृष्णभावनामृत का प्रदर्शन करना

c)

कृष्ण के लिए कार्य में रत होना

18.

मनुष्य को किन महान अधिकारियों (महाजनों) के पदचिन्हों का अनुसरण करने की संस्तुति की गयी है? (4.16)

a)

ब्रह्मा, शिव, नारद

b)

यमराज , जनक तथा बलि महाराज

c)

मनु, चारों कुमार, कपिल

d)

हिरण्यकशिपु, रावण, कंस

e)

प्रह्लाद, भीष्म, शुकदेव गोस्वामी

19.

कृष्णभावनामृत के आदर्श कर्म के विषय में मोहग्रस्त होने के बदले भवबंधन से उबरने के लिए किस प्रकार कर्म करना चाहिए? (4.16)

a)

पूर्ववर्ती प्रामाणिक भक्तों के आदर्श के अनुसार करना चाहिए

b)

परम्परा के पूर्ववर्ती अधिकारियों के पदचिन्हों का अनुसरण न करके स्वतंत्र कर्म करना चाहिए

c)

अपूर्ण प्रायोगिक ज्ञान व मानसिक चिंतन के द्वारा धर्म-पथ का निर्णय किया जा सकता है

20.

जीवात्मा भगवान् का नित्य दास है इस कृष्णभावनामृत के विरुद्ध सारे निष्कर्ष एवं परिणाम क्या कहलाते हैं? (4.17)

a)

कर्म

b)

विकर्म

c)

अकर्म

21.

इनमें से क्या सही नहीं है? (4.17)

a)

कर्म की बारीकियों को समझना अत्यन्त सरल है

b)

कर्म के रहस्य को समझने के लिए कृष्णभावनामृत के अधिकारियों की संगति करनी होती है

c)

भक्तों से समझना साक्षात् भगवान् से समझने के समान है

22.

भगवान् श्रीकृष्ण के अनुसार कौन सभी मनुष्यों में बुद्धिमान् है? (4.18)

a)

जो मनुष्य कर्म में अकर्म देखता है

b)

जो मनुष्य अकर्म में कर्म देखता है

c)

सब प्रकार के कर्मों में प्रवृत्त रहकर भी दिव्य स्थिति में रहता है

23.

कृष्णभावनामृत में कार्य करने वाला व्यक्ति कैसा होता है? (4.18)

a)

स्वभावतः कर्म-बन्धन से मुक्त होता है

b)

उसके सारे कर्म कृष्ण के लिए होते हैं

c)

कर्म के फल से उसे कोई लाभ या हानि नहीं होती

d)

वे व्यक्तिगत इन्द्रियतृप्ति की इच्छा से रहित होते हैं

e)

अपने आपको कृष्णभावनामृत के कार्यों में तत्पर रखता है

24.

भगवान् की नित्य दासता के पूर्णज्ञान से युक्त व्यक्ति के विषय में क्या सही है? (4.19)

a)

यह ऐसी अग्नि है जो एक बार प्रज्ज्वलित हो जाने पर कर्म के सारे फलों को भस्म कर सकती है

b)

ऐसे व्यक्ति में इन्द्रियतृप्ति की प्रवृत्ति का अभाव रहता है

c)

जिसने ऐसा पूर्णज्ञान प्राप्त कर लिया है वह सचमुच विद्वान है

25.

जीवन में प्रतिक्षण मिलने वाले विभिन्न कष्टों को एक भक्त को कैसे देखना चाहिए?

4 lines