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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-33 (8.12-21)
Total questions: 28
Worksheet time: 3hrs 30mins
अविचलित दिव्य समाधि में बने रहने के लिए आज के समय में कौन सी विधि व्यावहारिक (सुगम) है? (8.12)
इन्द्रियभोग के सारे द्वार बन्द करना
इन्द्रियविषयों से इन्द्रियों को हटाना
मन हृदय में स्थित परमात्मा पर केन्द्रित करना
प्राणवायु को सिर के ऊपर तक चढ़ाना
कृष्णभावनामृत में अपने मन को कृष्ण में स्थिर करना
निर्विशेषवादी (निराकारवादी) कहाँ रह जाते हैं? (8.13)
ब्रह्मज्योति
वैकुण्ठ लोक
गोलोक वृन्दावन
अमेरिका
यदि कोई – हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे– इस मन्त्र का जप करते हुए शरीर त्यागता है तो वह कहाँ जाता है? (8.13)
अपने अभ्यास के गुणानुसार आध्यात्मिक लोकों में
निर्विशेष ब्रह्मज्योति में
अमेरिका में
अधोलोकों में
ॐकार के विषय में क्या सही है? (8.13)
ॐ, ब्रह्म तथा भगवान् कृष्ण परस्पर भिन्न नहीं हैं
ॐ, कृष्ण की निर्विशेष ध्वनि है
हरे कृष्ण में यह ॐ सन्निहित है
शुद्धभक्त क्या चाहता है? (8.14)
स्वर्गलोक जाना
ब्रह्मज्योति से तादात्म्य
मोक्ष या भवबन्धन से मुक्ति
भगवान् को प्रसन्न करना
कुछ नहीं चाहता
कौन सा शब्द सूचित करता है कि इस श्लोक में शुद्ध भक्तियोग का वर्णन है, जिसमें ज्ञान, कर्म या हठ आदि अन्य विधियों का मिश्रण नहीं होता? (8.14)
अनन्यचेताः
सततं
स्मरति
नित्यशः
किसे पूर्णशान्ति का लाभ होता है? (8.14)
स्वर्गलोक चाहने वाला कर्मयोगी
ब्रह्मज्योति से तादात्म्य का इच्छुक ज्ञानयोगी
मोक्ष या भवबन्धन से मुक्ति का अभिलाषी हठयोगी
एकनिष्ट भाव से भक्ति में लगा निष्काम शुद्धभक्त
भगवान् तो सबों पर कृपालु हैं, फिर भक्ति करने का क्या लाभ? (8.14)
अनन्य भक्तों के ऊपर भगवान् विशेष कृपालु रहते हैं
अन्य योग के अभ्यासकर्ताओं के समान भक्त को कोई समस्या नहीं आती
शुद्धभक्त के लिए भगवान् सहज सुलभ हैं
भक्तियोगी किस प्रकार प्रेमाभक्ति में लगा रहता है? (8.14)
शान्त भक्त, उदासीन रहकर
दास्य भक्त, दास के रूप में
सख्य भक्त, सखा रूप में
वात्सल्य भक्त, माता-पिता की भाँति
माधुर्य भक्त, परमेश्वर के साथ दाम्पत्य प्रेमी की भाँति
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे – इस महामन्त्र के कीर्तन की कृष्णभावनाभावित विधि का सबसे बड़ा आशीर्वाद क्या है? (8.14)
शुद्धभक्त क्षणभर के लिए भी भगवान् को नहीं भूलता
भगवान् अपने शुद्धभक्त को क्षणभर के लिए भी नहीं भूलते
भगवान् सरलता से प्राप्त हो जाते हैं
शुद्धभक्त कहीं भी वृन्दावन उत्पन्न कर सकता है
भगवान् ने इस भौतिक संसार के लिए क्या शब्द प्रयोग किये हैं? (8.15)
दुखालयं
सुखालयं
अशाश्वतं
शाश्वतं
भक्तियोगी महापुरुष कभी भी दुखों से पूर्ण इस अनित्य जगत् में क्यों नहीं लौटते? (8.15)
चूँकि यह जगत् जन्म, जरा तथा मृत्यु के क्लेशों से पूर्ण है
क्योंकि वह परमलोक गोलोक वृन्दावन को प्राप्त होता है
क्योंकि वे केवल कृष्ण तथा कृष्ण का सामीप्य चाहते हैं
क्योंकि वे किसी आध्यात्मिक लोक में जाना चाहते हैं
परमलोक कृष्णलोक या गोलोक वृन्दावन को वेदों में क्या-क्या कहा गया है? (8.15)
अव्यक्त
नश्वर जगत
अक्षर
भौतिक लोक
परमा गति
छान्दोग्य उपनिषद् में किस विद्या का विधान है, जिससे मनुष्य ब्रह्मलोक को प्राप्त कर सकता है? (8.16)
पंचाग्नि
पंचवर्षा
पंचवायु
पंचभू
ब्रह्मलोक, चन्द्रलोक तथा इन्द्रलोक जैसे उच्चतर लोकों में जाने से क्या हानि है? (8.16)
इस जगत् में सारे लोक दुखों के घर हैं
जन्म तथा मरण का चक्कर लगा रहता है
पृथ्वी पर फिर से लौटना पड़ता है
बिना भक्ति किये नित्य परमधाम को भेजे जाते हैं
क्या उच्चतर लोकों में कृष्णभावनामृत में प्रगति करके नित्य परमधाम गोलोक वृन्दावन जाना संभव है? (8.16)
नहीं, नीचे आना होगा - आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन
हाँ, ब्रह्माण्ड के प्रलय के समय ब्रह्मा तथा कृष्णभावनामृत में निरन्तर प्रवृत्त भक्त इच्छानुसार आध्यात्मिक ब्रह्माण्ड को तथा विशिष्ट वैकुण्ठ लोकों को जाते हैं
कल्प क्या होता है? (8.17)
ब्रह्मा का एक दिन
ब्रह्मा का एक महीना
ब्रह्मा का एक वर्ष
ब्रह्मा का एक क्षण
ब्रह्मा के एक दिन में चतुर्युग – सत्य, त्रेता, द्वापर तथा कलि – के कितने चक्र होते हैं? (8.17)
1
10
100
1000
10000
वर्तमान युग, कलियुग कितने वर्षों तक चलता है? (8.17)
4,32,000
8,64,000
12,96,000
17,28,000
31,10,40,00,00,00,000
कलियुग में किसका प्राधान्य रहता है? (8.17)
कलह
अज्ञान
अधर्म
पाप
सदाचार
ब्रह्मा की आयु के विषय में क्या सही नहीं है? (8.17)
ब्रह्मा की आयु अत्यन्त विचित्र तथा न समाप्त होने वाली है
नित्यता की दृष्टि से यह बिजली की चमक जैसी अल्प है
ब्रह्मा भी जन्म, जरा, रोग और मरण की क्रिया से अछूते नहीं हैं
ब्रह्मा की रात्रि में सारे जीव किसमें विलीन हो जाते हैं? (8.18)
अव्यक्त
व्यक्त
अहः
संज्ञा
भूत्वा भूत्वा प्रलीयते - का क्या अर्थ है? (8.19)
दिन के समय प्रकट होते हैं और रात्रि के समय पुनः विनष्ट हो जाते हैं
बार-बार जन्म लेते हैं
भूत-भूत शराब पी कर लीन हो जाते हैं
ब्रह्मा के दिन में अल्पज्ञानी पुरुषों को प्राप्त भौतिक शरीर रात्रि में किसके शरीर में विलीन हो जाते हैं? (8.19)
ब्रह्मा
विष्णु
ब्रह्मज्योति
कृष्ण
कृष्ण की पराशक्ति भौतिक प्रकृति के गुण से कैसे विपरीत है? (8.20)
कृष्ण की पराशक्ति दिव्य और शाश्वत है
यह परा (श्रेष्ठ) और कभी न नाश होने वाली है
संसार का लय होने पर यह भी नष्ट हो जाती है
भगवान् अपने परमधाम के विषय में क्या बताते हैं? (8.21)
अप्रकट और अविनाशी
परम गन्तव्य
प्राप्त कर लेने पर कोई वापस नहीं आता
जहां पहुंचना कठिन है पर गिरना बहुत सरल है
ब्रह्मसंहिता में भगवान् कृष्ण के परमधाम के विषय में क्या बताया गया है? (8.21)
चिन्तामणि धाम जहाँ सारी इच्छाएँ पूरी होती हैं
पारसमणि से निर्मित प्रसादों से युक्त गोलोक वृन्दावन
किसी भी तरह का खाद्य प्रदान करने वाले कल्पतरु वृक्ष
अनन्त दुग्ध देने वाली सुरभि गौएँ
भगवान् की सेवा के लिए लाखों लक्ष्मियाँ
आपको कैसे विश्वास है कि इस संसार से परे एक अन्य आध्यात्मिक संसार है? क्या शास्त्रों को न मानने वाले को समझा सकते हैं?
