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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-61 (17.7-16)
Total questions: 21
Worksheet time: 2hrs 51mins
सबको एकसा मानने वाले मूर्ख मार्गदर्शक के स्थान पर शास्त्रों के आदेशानुसार कार्य करने वाले बुद्धिमान व्यक्ति किन चीजों में प्रकृति के अनुसार भेद करते हैं? (17.7)
भोजन
यज्ञ
तपस्या
दान
आध्यात्मिक जगत
सात्त्विक भोजन में क्या गुण होते हैं? (17.8)
आयु घटाने वाला, जीवन को अशुद्ध करने वाला
बल, स्वास्थ्य, सुख तथा तृप्ति प्रदान करने वाला
रसमय, स्निग्ध, स्वास्थ्यप्रद, हृदय को भाने वाला
किन शब्दों में बताया गया है कि राजसी भोजन दुख, शोक तथा रोग उत्पन्न करने वाले हैं? (17.9)
कट्वम्ललवणात्युष्ण
तीक्ष्णरुक्षविदाहिनः
आहारा राजसस्येष्टा
दु:खशोकामयप्रदाः
अत्यधिक चटपटा, खट्टा, गरमागरम भोजन किस श्रेणी के लोग पसंद करते हैं? (17.9)
सात्त्विक
राजसिक
तामसिक
त्रिगुणातीत
जूठे भोजन के लिए भगवान् ने क्या शब्द का प्रयोग किया है? (17.10)
यातयामं
गतरसं
पूति
पर्युषितं
उच्छिष्टं
अस्पृश्य (अमेध्यं) खाद्य पदार्थ कौन से हैं? (17.10)
स्वास्थ्य तथा आयु को बढ़ाने वाले दूध के व्यंजन
चीनी, चावल, गेहूँ, फल तथा तरकारियाँ
भुना मक्का तथा गुड़
मांस तथा मदिरा
सतोगुणी प्रोटीनयुक्त स्निग्ध (चिकने) पदार्थ कौनसे हैं? (17.10)
पशु-वध से प्राप्त चर्बी
समस्त भोजनों में परम चमत्कारी दुग्ध
मक्खन, पनीर तथा अन्य पदार्थ
मटर, दाल, दलिया आदि
इनमें से क्या सही है? (17.10)
आवश्यक चर्बी प्राप्त करने की सुसंस्कृत विधि पशु वध है
दूध तो अमानवीय है
केवल पाशविक मनोवृत्ति के कारण पशुवध चल रहा है
भगवान् को समर्पित भोजन का उच्छिष्ट सर्वोत्तम भोजन है
कैसे भोजन से तामसी लोग प्रायः आकृष्ट होते हैं? (17.10)
कटु, बहुत लवणीय या अत्यधिक गर्म, चरपरा
आमाशय की श्लेष्मा को घटाने वाला
खाने के तीन घंटे पूर्व बना अनिवार्यतः बासी
बिगड़ने के कारण जिससे दुर्गंध आती है
उच्छिष्ट (जूठा) भोजन किस अवस्था में स्वीकार किया जा सकता है? (17.10)
जब वह भगवान् को अर्पित किया जा चुका हो
जब वह कोई साधुपुरुष, विशेष रूप से गुरु द्वारा,ग्रहण किया जा चुका हो
जब बहुत भूख लगी हो और कुछ खाने को न हो
बहुत घंटे पूर्व तैयार हुआ भी कैसा भोजन ग्रहण किया जा सकता है? (17.10)
जो शास्त्रीय ढंग से तैयार किया जाता है
जो भगवान् को अर्पित किया जाता है
जो रोगाणुरोधक, खाद्य, रुचिकर तथा दिव्य होता है
किस प्रकार किया गया यज्ञ सात्त्विक होता है? (17.11)
शास्त्र के निर्देशानुसार
कर्तव्य समझ कर
बिना किसी इच्छा के
भौतिक लाभ को दृष्टि में रख कर
स्वर्गलोक पहुँचने या किसी भौतिक लाभ के लिए किये गए यज्ञ तथा अनुष्ठान कैसे माने जाते हैं? (17.12)
सात्त्विक
राजसी
तामसी
मानसी
उरबसी
किस प्रकार किया गया यज्ञ तामसी माना जाता है? (17.13)
दम्भपूर्वक गर्ववश
शास्त्र के निर्देशों की अवहेलना करके
प्रसाद वितरण किये बिना
वैदिक मन्त्रों का उच्चारण किये बिना
पुरोहितों को दक्षिणा दिये बिना
किस गुण में श्रद्धा वास्तव में अश्रद्धा है जिससे मानव समाज को कोई लाभ नहीं पहुँचता? (17.13)
सतोगुण
रजोगुण
तमोगुण
शुद्धसत्त्व
क्या कार्य शारीरिक तपस्या के अंतर्गत नहीं बताया गया है? (17.14)
परमेश्वर, ब्राह्मणों, गुरु, माता-पिता आदि की पूजा करना
आंतरिक तथा बाह्य रूप में अपने को शुद्ध करने का अभ्यास
आचरण में सरल बनना - आर्जवं
वैवाहिक जीवन के अतिरिक्त भी मैथुन में रत होना
सर्दी में ठण्डे जल खड़े होकर मुक्केबाजी का अभ्यास
सत्य बोलने पर व्यक्ति को भाता नहीं है और क्षुब्ध न करने के लिए असत्य बोलना भी सही नहीं है, तो किस प्रकार बोलें? (17.15)
शिक्षक अपने विद्यार्थियों को उपदेश देने के लिए सत्य बोल सकता है
शिक्षक, जो उसके विद्यार्थी नहीं है, उसके मन को क्षुब्ध करने वाला सत्य न बोले
तुरन्त ही अपने कथन की पुष्टि के लिए शास्त्रों का प्रमाण देना चाहिए
वाणी की तपस्या क्या कही जाती है? (17.15)
ऐसा बोलना चाहिए कि दूसरों के मन क्षुब्ध हो जाएँ
बात सुनने में अति प्रिय लगनी चाहिए
जो भी कहा जाय वह शास्त्र-सम्मत हो
वैदिक साहित्य का अध्ययन किया जाना चाहिए
मन की तपस्याएँ क्या हैं? (17.16)
मनः प्रसादः - मन की संतुष्टि
सौम्यत्वं - सरलता, किसी भी कापट्य से रहित
मौनं - गम्भीरता
आत्मविनिग्रहः - आत्मसंयम
भावसंशुद्धिः - जीवन की शुद्धि
मन की तुष्टि या संतोष कैसे प्राप्त कर सकते हैं? (17.16)
अनेक प्रकार के इन्द्रियतृप्ति के साधनों में लगा कर
इन्द्रियभोग के विचारों से मन को अलग रख करके
जितना इन्द्रियभोग सोचते हैं, उतना ही मन तृप्त
सर्वश्रेष्ठ है कि मन को वैदिक साहित्य की ओर मोड़ें
सबके कल्याण (हित) के विषय में सोचना चाहिए
मन, वाणी, शरीर की तपस्याओं और गुणों के अनुसार भोजन के विवरण से आप तुरंत से व्यवहारिक तौर पर क्या अपनाने वाले हैं?
