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Bhagavad Gita As It Is DAY-64 (18.9-18)

Total questions: 19

Worksheet time: 2hrs 45mins

Name
Class
Date
1.

जो व्यक्ति कृष्णभावनामृत में रहकर कारखाने में कार्य करता है, वह किस तरह दिव्य स्तर पर कार्य करता है? (18.9)

a)

वह कारखाने के कार्यों से अपने को जोड़ता है

b)

वह कारखाने के श्रमिकों से अपने को जोड़ता है

c)

वह तो मात्र कृष्ण के लिए कार्य करता है

d)

वह इसका फल कृष्ण को अर्पण कर देता है

2.

कैसा त्याग सात्त्विक कहलाता है? (18.9)

a)

जब मनुष्य नियत कर्तव्य को करणीय मान कर करता है

b)

जब मनुष्य समस्त भौतिक संगति तथा फल की आसक्ति को त्याग देता है

c)

जब मनुष्य नियत कर्त्तव्य को ही भौतिक समझकर त्याग देता है

3.

सतोगुण में स्थित बुद्धिमान त्यागी, जो अध्यात्म को प्राप्त है, किस प्रकार कार्य करता है? (18.10)

a)

न तो अशुभ कार्य न किसी व्यक्ति से घृणा करता है

b)

उपयुक्त स्थान-समय पर बिना डरे कर्तव्य करता है

c)

न शुभकर्म से लिप्त होता है

d)

न अपने शरीर को कष्ट देने वाले से घृणा करता है

e)

कर्म के विषय में कोई संशय नहीं रखता

4.

कौन वास्तव में त्यागी है? (18.11)

a)

समस्त कर्मों का परित्याग करने वाला

b)

जो कर्म फल का परित्याग करता है

c)

जो कृष्ण के लिए कर्म करता है

d)

जो कर्म फलों को भोगता नहीं

e)

जो कृष्ण को सब कुछ अर्पित करता है

5.

किस व्यक्ति को इच्छित (इष्ट), अनिच्छित (अनिष्ट) तथा मिश्रित – ये तीन प्रकार के कर्मफल मृत्यु के बाद मिलते हैं? (18.12)

a)

जो संन्यासी है

b)

जो त्यागी नहीं है

c)

कृष्णभावनामय व्यक्ति

6.

किस प्रकार अन्तर्यामी परमात्मा परम नियंत्रक हैं? (18.13)

a)

भगवद्गीता में कहा गया है – सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टः – वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके पूर्व कर्मों का स्मरण करा कर किसी न किसी कार्य में प्रवृत्त करते रहते हैं

b)

जो कृष्ण भावना भावित कर्म अन्तर्यामी भगवान् के निर्देशानुसार किये जाते हैं, उनका फल न तो इस जीवन में, न ही मृत्यु के पश्चात् मिलता है

7.

सांख्य और वेदांत में क्या सम्बन्ध है? (18.13)

a)

सांख्य का अर्थ है ज्ञान का आधार स्तम्भ और वेदान्त अग्रणी आचार्यों द्वारा स्वीकृत ज्ञान का चरम आधार स्तम्भ है

b)

वेदान्त का अर्थ है ज्ञान का आधार स्तम्भ और सांख्य अग्रणी आचार्यों द्वारा स्वीकृत ज्ञान का चरम आधार स्तम्भ है

8.

सांख्य और वेदांत के उद्धरण के आधार पर कर्म के कारण कौन से हैं? (18.14)

a)

अधिष्ठानं - कर्म का स्थान (शरीर)

b)

कर्ता - आत्मा

c)

करणं च पृथग्विधम् - विभिन्न इन्द्रियाँ

d)

पृथक्चेष्टा - अनेक प्रकार की चेष्टाएँ

e)

दैवं - परमात्मा

9.

आत्मा ही ज्ञाता तथा कर्ता है, इसका उल्लेख श्रुति (वैदिक साहित्य) में कहाँ है? (18.14)

a)

एष हि द्रष्टा स्रष्टा (प्रश्न उपनिषद् 4.9)

b)

वेदान्त सूत्र में भी ज्ञोऽतएव (2.3.18) तथा कर्ता शास्त्रार्थवत्त्वात् (2.3.33)

10.

इनमें से क्या सही है? (18.14)

a)

शरीर के भीतर आत्मा कर्म करता है, जिससे कर्म फल होता है और आत्मा इन्द्रियों के द्वारा विभिन्न कर्म करता है

b)

सारे कार्यकलाप, प्रत्येक हृदय में मित्र रूप में आसीन, परमात्मा की इच्छा पर निर्भर करते हैं, वे ही परम कारण हैं

c)

जो पूर्ण कृष्णभावनामय हैं, वे अन्ततः अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी नहीं होते, किसी कर्म से नहीं बंधते

11.

न्याय्य (उचित) कर्म किसे कहा जाता है? (18.15)

a)

जो शास्त्रों में निर्दिष्ट निर्देशों के अनुसार किया जाता है

b)

जिसमें शास्त्रीय आदेशों की अवहेलना की जाती है

c)

जिसे शास्त्रों के निर्देश से अनभिज्ञ रहते हुए स्वार्थवश किया जाता है

12.

विपरीत (अनुचित) कर्म की पूर्णता के लिए भी क्या पाँचों कारणों - कर्म का स्थान (शरीर), कर्ता, विभिन्न इन्द्रियाँ, अनेक प्रकार की चेष्टाएँ तथा परमात्मा - की आवश्यकता पड़ती है?(18.15)

a)

हाँ

b)

नहीं

13.

कर्मों का संचालन करने वाला मुख्य (अंतिम) परम सक्षम कारण कौन है, जिसे मूर्ख व्यक्ति नहीं समझ पाते? (18.16)

a)

स्थान

b)

कर्ता

c)

चेष्टा

d)

इन्द्रियाँ

e)

स्वयं भगवान्

14.

जीव में व्यक्तिगत कार्यकलाप तथा उसके उत्तरदायित्व का उदय कैसे होता है? (18.17)

a)

मिथ्या अहंकार, बँधी बुद्धि से

b)

कृष्णभावनामृत में परमात्मा या भगवान् के आदेशानुसार कर्म करने से

c)

ईश्वरविहीनता या कृष्णभावनामृत के अभाव से

15.

इनमें से किस स्थिति में एक सैनिक को दण्डित किया जाता है? (18.17)

a)

जब कोई सैनिक अपने श्रेष्ठ अधिकारी सेनापति की आज्ञा से वध करता है

b)

यदि वही सैनिक स्वेच्छा से वध कर दे

16.

कर्म के संघटक कौन से हैं जिन्हें कर्म-संग्रह कहा जाता है? (18.18)

a)

इन्द्रियाँ (करण), कर्म तथा कर्ता

b)

ज्ञान, ज्ञेय तथा ज्ञाता

17.

कर्म करने के लिए प्रेरणा देने वाली मनोवैज्ञानिक विधियां कौन सी हैं? (18.18)

a)

सोचने

b)

अनुभव करने

c)

इच्छा करने

d)

शास्त्रों से

e)

गुरु के उपदेश से

18.

समस्त इन्द्रियों का केन्द्र किसे कहा गया है? (18.18)

a)

मन

b)

बुद्धि

c)

आत्मा

d)

परमात्मा

19.

अपना कोई अनुभव बताएं जब कर्म की पूर्णता के पांच कारणों में से आपने परम मुख्य कारण दैवं (परमात्मा या भगवान्) के हस्तक्षेप का अनुभव किया |

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