Worksheetsचरक चिकित्सा 21 से 25
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
आचार्य चरक अनुसार विष किस गुण से मारक होता है।
विकासी
आशु
व्यवायी
तीक्ष्ण
निरंकुश इव व्यालो यह लक्षण मद के किस अवस्था में पाया जाता है।
प्रथम अवस्था
द्वितीय अवस्था
संधि अवस्था
तृतीय अवस्था
अष्टांग लवण का रोगाधिकार है।
वातज मदात्यय
पित्त मदात्यय
कफ मदात्यय
सभी मदात्यय मे।
जलोदर रोग कौन से शस्त्र कर्म के योग्य है।
छेदन
भेदन
वेधन
विस्त्रावण
आचार्य सुश्रुत अनुसार यदि सिरा स्नायु संधि का दहन करना हो तो दहन हेतु प्रयुक्त होगा।
पिप्पली
अजा शकृद
मधु
गोदंत
आचार्य चरक ने बंधन के भेद माने हैं ।
2
14
15
3
शस्त्र कर्म करने के तुरंत पश्चात यदि किसी रोगी को कुब्जता, उसके शरीर के अंगों में क्रिया शक्ति की कमी एवं शरीर के अवयय में अवसाद होता है तो यह इंगित करता है की।
मांस मर्म पर शस्त्र कर्म हो गया
सिरा मर्म पर शस्त्र कर्म हो गया
स्नायु मर्म पर शस्त्र कर्म हो गया
संधि मर्म पर शस्त्र कर्म हो गया
यदि व्रण क्लेद से रहित है तथा कपोत वर्ण का है तो यह व्रण की किस अवस्था को बताता है।
रोहित व्रण
रूढ व्रण
शुद्ध व्रण
अशुद्ध व्रण
आचार्य चरक के अनुसार प्रसूता सर्प के काटने पर निम्न में से कौन से लक्षण नहीं मिलते हैं।
क्रोध
कुक्षी शूल
जृंभा
उपजिह्विका
आचार्य चरक के अनुसार यदि कोई वात प्रकृति का व्यक्ति है तो वह मद्यपान हेतु निम्न नियम का पालन करेगा।
वह मद्यपान ना करें
वह दुगुना पानी मिलाकर मद्यपान करें
मधु मुनक्का से बना मद्यपान करें
गुड़ तथा पिष्टी से बना मद्यपान करें
आचार्य सुश्रुत ने रोहिणी आदि सात प्रकार के मुख् रोगों में कौन सा शस्त्र कर्म करने के लिए कहा है।
भेदन
विस्त्रावण
लेखन
छेदन
आचार्य सुश्रुत के अनुसार प्रमेह रोगी को यदि व्रण हो तो वह चिकित्सा की दृष्टि से होगा।
साध्य
याप्य
कृछसाध्य
असाध्य
आचार्य सुश्रुत के अनुसार किस विसर्प में कुलथी के सदृश काले फोड़ेडहोते हैं।
पित्तज
रक्तज
क्षतज
त्रिदोषज
आचार्य चरक ने किस विसर्प को अमाशय एवं एक देशग्राही कहा है।
कफ पित्त
वात पित्त
वात कफ
आगंतुज
आचार्य चरक के अनुसार प्रलेप की मोटाई है
माहिष आद्रचर्म
त्रि भाग अंगुष्ठ उदर
दोनो
कोई नहीं
आचार्य चरक अनुसार विष किस वेग में पहुंचने पर हिक्का उत्पन्न करता है
चौथे
पंचम
छठवीं
सप्तम
आचार्य चरक ने काक पद का प्रयोग विष चिकित्सा में बताया है।
सातवें वेग में
आठवीं वेग में
विष द्वारा स्रोतों का कफा अवरोध होने पर
सर्प के काटने पर
महा सुगंधी अगद में कितने औषध का प्रयोग है
60
70
80
85
दर्बीकर ,मंडली एवं राजिमान सर्पों के किस वेग में लक्षण समान होते हैं।
4 एवम 5
5एवम 6
6 एवम 7
7 एवम 8
आचार्य वागभट्ट के अनुसार सर्प,लुता ,मूषक एवं वृश्चिक विष नाशक है
महा सुगंधी अगद
महागंधहस्ती अगद
बिल्वादी अगद
नकुलादी अगद
आचार्य सुश्रुत ने मद्य गुणों की संख्या मानी है।
10
14
8
9
आचार्य शारंगधर अनुसार मदावह गुण पाया जाता है।
मद्य में
विष में
मद्य विष दोनो में
सुपारी में
शब्द असहिष्णुता लक्षण पाया जाता है।
मद्यपान में
ध्वंसक
विक्षय
पानविभ्रम
मदात्यय में सुश्रुत ने दाह रोग का वर्णन करते हुए संख्या मानी।
5
6
7
8
आचार्य सुश्रुत अनुसार शोफ के उपक्रम की संख्या है।
36
60
7
11
आचार्य चरक ने ऐषणी के भेद माने है।
2
3
4
5
आचार्य सुश्रुत अनुसार रोपक एवम संधानक गण है।
नयग्रोध
प्रियंगु एवम अम्बष्ठा
हरिद्रा
वचा
आचार्य चरक के त्वचा जनन योग में नहीं है
वट
कुकुभ
पीपल
जामुन
वाग्भट ने सद्यो व्रण की संख्या मानी है।
8
6
10
12
आचार्य चरक अनुसार यदि: वातके स्थान में है तो उसकी चिकित्सा में प्रथम उपक्रम होगाl
रूक्ष द्रव्य प्रयोग
स्निग्ध द्रव्य प्रयोग
कुछ रूक्ष कुछ स्निग्ध
कोई नहीं
