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WorksheetsShri Bhagwad Geeta Group 1
Total questions: 39
Worksheet time: 25mins
कृष्ण आत्म संतुष्ट है किन्तु फिर भी वे पत्र, पुष्प, फल आदि अर्पित किये जाते है उन्हें क्यूँ स्वीकार करते है ?
क्योंकि कृष्ण लोगों में दान करने की प्रवति को लोकहित में बढ़ाना चाहते है
क्योंकि कृष्ण भक्त से प्रेम व् स्नेह का आदान प्रदान चाहते है
ताकि दान करने वाला व्यक्ति दान के फल से स्वर्ग जा सके
क्योंकि कृष्ण को दान /पूजा करने कृष्ण की शक्ति बढती है
हमें कौन से समय में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए ?
रविवार
द्वादशी के दिन
रात के समय
(ii) & (iii)
भगवद गीता के अनुसार जो लोग कृष्ण को बिना अर्पित किये खाते है वो केवल -------- खाते है ?
भोजन
पाप
पेट भरने के लिए
आनंद के लिए
कृष्ण को जब पत्र, पुष्प , फल और जल अर्पित किया जाता है तो वे इसे स्वीकार करते हैं , इसका अर्थ हुआ की कृष्ण .....................?
इन्द्रियों से युक्त है
इन्द्रियों से अतीत है अर्थात परे है
इन्द्रियों से रहित है
इन्द्रियों के स्वामी है
कृष्ण जब इस धरती पर अवतरित हुए तब कृष्ण इन्द्रियों से युक्त थे , तब इसका क्या अर्थ हुआ की कृष्ण एक सामान्य व्यक्ति के समान थे या परम सत्य नही थे ?
हाँ ,क्योंकि निराकार ब्रह्मा कृष्ण / मानव रूप में प्रकट हुए थे जो वापिस निराकार ब्रह्मा में लीन हो गये थे
नही ,क्योंकि कृष्ण अपने आदि दिव्य रूप में अपनी दिव्य इन्द्रियों के साथ अपने धाम सहित प्रकट हुए थे जो निराकार ब्रह्मा के भी आश्रय है
हाँ , क्योंकि पर ब्रह्मा तो निराकार है और समस्त उपाधियों से रहित है
(i) & (iii)
भगवद गीता 9.27 के अनुसार कृष्ण को क्या - क्या अर्पित किया जाना चाहिए ?
समस्त कार्य
समस्त कार्य , भोजन और दान
समस्त कार्य, भोजन, दान और तपस्या
समस्त कार्य , भोजन , दान तपस्या और सुख / दुःख
कृष्ण उपदेश करते हैं कि समस्त कार्य कृष्ण को अर्पित करो, तो क्या इसका अर्थ हुआ कि पाप कर्म भी कृष्ण को अर्पित किया जाय ?
हाँ , क्योंकि कृष्ण सब पाप और पुण्य से परे है |
नहीं , क्योंकि पापकर्म को कृष्ण की संतुष्टि के लिए नहीं किया जा सकता |
हाँ, क्योंकि अगर कृष्ण को पाप भी अर्पित किया जाय तो वे सरे पापों से जीव को मुक्त कर देते हैं |
हाँ , क्योंकि पाप और पुण्य व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है |
भगवद गीता के अनुसार सबसे महानतम योगी और ध्यानी कौन है ?
जो निरंतर कृष्ण का नाम जप / स्मरण करे |
जो अष्टांग योग की सबसे ऊँची अवस्था समाधि लगा सके |
जो पूर्ण नैष्ठिक ब्र्ह्मधारी हो |
जो गृहस्थ होने पर भी अपनी भौतिक और अध्यात्मिक जीवन का ठीक से पालन करे |
भगवद गीता श्लोक नo 26 और 27 का सार क्या है ?
पर ब्रह्मा निरकार और निर्विशेष है, जीव का उनसे प्रेम संभव नहीं है
कृष्ण अपूर्ण है और इसी कारण जीवआत्माओं से सेवा की आशा रखते है |
कृष्ण परं भोक्ता है , स्वामी है और समस्त जीवआत्माओं के प्रेम के आगार है |
इन श्लोकों का व्यव्हार में पालन असंभव है |
इ
युक्त वैराग्य की परिभाषा किसने दी है और कौन से ग्रन्थ में है ?
सनातन गोस्वामी , बृहद भागवतमृत
रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिन्धु
चैतन्य महाप्रभु , शिक्षा अष्टकम
जीव गोस्वामी, षट संधर्भ
युक्त वैराग्य का क्या अर्थ है ?
हम जगत में रहते हुए कर्म करना बंद नही कर सकते इसलिए कर्म करके फल कृष्ण को अर्पित किया जाए
जगत को छोड़कर वैराग से युक्त रहा जाए
जगत से वैराग्य संभव नही है इसलिए जगत से युक्त रहा जाए
जगत में आसक्ति और विरक्ति में संतुलन बना कर मध्य मार्ग का पालन किया जाए
कृष्ण शुभ तथा अशुभ कर्मो के बंधन से मुक्त होने का उपदेश करते है किन्तु शुभ कर्म के बंधन से मुक्त होना क्यों आवश्यक है ?
शुभ कर्म बंधन से मुक्त होना आवश्यक नही है क्योंकि इस संसार में अनेक प्रकार के आनंद प्राप्त होते है
शुभ कर्म बंधन से मुक्त होना आवश्यक नही है क्योंकि विभिन्न पुन्य कर्म करके फलस्वरूप स्वर्ग के सुख को प्राप्त किया जा सकता है
कर्म बंधन से मुक्त होना आवश्यक है ताकि आत्मा निराकार ब्रह्मा में लीन हो सके
कर्म बंधन से मुक्त होना आवश्यक है क्योंकि इस भौतिक जगत में जन्म, मृत्यु , जरा, व्याधि का दुःख सदैव रहता है
श्लोक संख्या 9.28 में " माम उपैष्यसि " शब्द का क्या अर्थ है ?
कृष्ण को प्राप्त करना
निराकार ब्रह्म में लीन होना
स्वर्ग प्राप्त करना
शशि अर्थात चंद्रलोक को प्राप्त करना
मुक्ति की कितनी अवस्थाएँ है
4
5
8
1
कर्म बंधन से किस प्रकार मुक्त हुआ जा सकता है |
कर्तव्य का पालन करके किन्तु फल की इस्छा न करके |
समस्त कर्मों का त्याग करके |
समस्त कार्य यथा कर्म , भोजन , दान और तपस्या कृष्ण को अर्पित करके |
सन्यास लेकर |
भगवान कृष्ण ने दुर्योंधन के 56 भोग स्वीकार नही किये किन्तु विदुर जी के घर का साग खा लिया, यह घटना कौन से श्लोक से तादात्मय रखती है ?
9.27
9.26
9.29
9.31
कृष्ण कहते है की वो न तो किसी से द्वेष करते है न पक्षपात करते है किन्तु कृष्ण लीला में कृष्ण ने अनेक राक्षसों का वध किया क्योंकि ----
लोक कल्याण के लिए इन राक्षसों को मारना आवश्यक था
कृष्ण द्वारा वध करने पर भी इन राक्षसों को मुक्ति प्राप्त हुई जिसे अन्यथा प्राप्त करना कठिन है
कृष्ण द्वेषी तथा पक्षपाती है
पृथ्वी देवी के भार को कम करने हेतु
श्लोक 9.29 में कृष्ण कहते है कि जो उनकी भक्ति पूर्वक सेवा करता है वह उनका मित्र है और कृष्ण उनके मित्र है , इस तथ्य से क्या सिद्ध होता है ?
परम सत्य भी भावना और विविधता से परिपूर्ण है और पूर्ण होने पर भी जीव आत्मा से प्रेम विनिमय करता है |
परम सत्य निराकार है और उसमे भावना, प्रेम आदि का कोई स्थान नही है |
कृष्ण जब प्रकट थे तब उनके साथ प्रेम किया जा सकता था किन्तु उनके अप्रकट होने पर अब कृष्ण के साथ प्रेम संभव नही है |
(2) & (3)
कृष्ण की भक्ति में निरंतर किस प्रकार लीन रहा जा सकता है
कृष्ण के नाम व् लीला का निरंतर श्रवण और कीर्तन करके
सन्यास ग्रहण करके
अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करके
घर में मंदिर बना कर
श्लोक संख्या 9.29 में श्री कृष्ण ने जो उपदेश दिया है, इससे पूर्व भी इसी प्रकार का उपदेश श्री कृष्ण ने गीता के कौन से अध्याय के श्लोक में किया है ?
4.11
6.47
7.25
9.11
श्लोक संख्या 9.30 (अपि चेत सु दुराचारी ----) के अनुसार -----?
इस श्लोक के अनुसार नव दीक्षित भक्त को पाप करने की छूट है |
भक्त के आकस्मिक पतन से भक्तिमय जीवन नष्ट हो जाता है |
भक्तिमय जीवन में भक्त को सब पापकर्म करने की छूट है |
किसी भी व्यक्ति को भक्त के आकस्मिक पतन पर उनको निंदा नही करनी चाहिए |
भक्ति में आकस्मिक पतन का क्या अर्थ है ?
सब के सामने भक्ति करना और एकांत में इन्द्रिय तृप्ति में लगे रहना |
भक्ति करना छोड़ देना |
भक्ति के नियमों का दृढ़ता से पालन करना किन्तु पूर्व के संस्कार के कारण कोई पापकर्म भूलवश क्र बैठना |
उपरोक्त सभी |
---------में वर्णन मिलता है यदि कोई व्यक्ति पतित हो जाए, किन्तु यदि भगवान की दिव्य सेवा में लगा रहे तो भगवान उसे शुद्ध कर देते है और उस निंदनीय कार्य के लिए क्षमा कर देते है ?
श्रीमद भगवद गीता
मुण्डक उपनिषद
विष्णु पुराण
श्रीमद भागवत
आकस्मिक पतन होने के उपरांत भी यदि साधक कृष्ण भक्ति में लगा रहे तो वह शुद्ध किस प्रकार हो जाता है ?
क्योंकि कृष्ण भक्ति अत्यंत शक्तिशाली है |
क्योंकि कृष्ण भक्त को कभी कोई पाप नही लगता |
क्योंकि आकस्मिक पतन होने पर किसी को भी पाप नही लगता |
उपरोक्त कोई नहीं |
चैतन्य चरितामृत के अनुसार नवधा भक्ति में सर्वश्रेष्ठ भक्ति कौन सी मानी गई है ?
श्रवण |
नाम संकीर्तन |
स्मरण |
पूजन |
भक्ति को माया के विरुद्ध युद्ध क्यों कहा गया है ?
क्योंकि भक्ति में इन्द्रियों से भगवान की सेवा की जाती है और माया में अपनी इन्द्रियों की सेवा जाती है |
क्योंकि भक्ति करने से ही संसार में भौतिक सुख मिलता है |
क्योंकि भक्त भगवान की सेवा के लिए अभक्तों से युद्ध करते है |
क्योंकि अभक्त सदैव भगवान के भक्तों के साथ युद्ध करते है |
निमिन्लिखित में से कौन से भक्त ने मात्र स्मरण से भगवान कृष्ण को प्राप्त किया ?
गोपियाँ |
प्रहलाद महाराज |
अक्रूर जी |
मीरा बाई |
माया की दो प्रकार की शक्तियां कौन सी है ?
धूमावती और कालरात्रि |
महामाया और योगमाया |
आवरणात्मिका और प्र्कशेपात्मिका |
रिद्धि और सिद्धि |
निमन्लिखित में से कौन ऐसे भक्त का उदाहरण है जो पतन के उपरांत भी भक्ति करने पर अंततः शुद्ध हो गये ?
वृत्रासुर
अजामिल
इंद्र
ध्रुव महाराज
कृष्ण भगवान 9.31 श्लोक संख्या में अर्जुन से यह घोषणा करने को क्यों कहते है कि " उनका भक्त कभी विनष्ट नही होता " जबकि गीता उपद्देश में स्वयं भी यह घोषणा कर सकते थे ?
क्योंकि कृष्ण इस घोषणा को पूर्ण रूप से पालन नही करना चाहते |
क्योंकि कृष्ण कभी कभी अपने वचनों को तोड़ देते है पर अपने भक्त के वचनों को निष्फल नही होने देते |
कृष्ण जिम्मेवारी से बचना चाहते थे |
उपरोक्त में से कोई भी नही |
गीता महात्मय के रचियता कौन है ?
शंकराचार्य |
मध्वाचार्य |
चैतन्य महाप्रभु |
निम्बार्क चार्य |
निम्नलिखित में से कौन से परम गुह्य ज्ञान की विशेषता कृष्ण द्वारा नहीं बताई गयी है ?
पवित्रतम |
गोपनीय |
अव्यय |
पालन में जटिल |
निम्नलिखित में से कौन सा तुलसी महारानी का नाम नही है ?
नंदनी
पद्मा
पुष्पसारा |
विश्व पूजिता |
श्लोक संख्या 9.22 से सम्बंधित घटना निमन्लिखित में से कौन से भक्त के साथ घटित हुई है ?
तुलसी दास जी |
अर्जुनाचार्य जी |
संत तुकाराम जी |
वल्लभाचार्य जी |
आपका क्या नाम है
आपका फोन नो. क्या है
आपका पता क्या है
आपकी उम्र क्या है ?
भगवद गीता 9.26 श्लोक में जो दो बार भक्ति शब्द का उल्लेख हुआ है , इसका क्या अर्थ है ?
कृष्ण की सेवा
सारे कर्मो का कृष्ण को समर्पण
कृष्ण की पूजा
कृष्ण की प्रेमपूर्वक सेवा
