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Bhagavad Gita As It Is DAY-51 (13.13-22)

Total questions: 29

Worksheet time: 3hrs 35mins

Name
Class
Date
1.

किस ज्ञाता के ज्ञान से मनुष्य जीवन-अमृत का आस्वादन कर सकता है? (13.13)

a)

केवल आत्मा

b)

केवल परमात्मा

c)

आत्मा तथा परमात्मा दोनों

2.

आनन्दब्रह्म और विज्ञानब्रह्म में क्या अंतर है? (13.13)

a)

विज्ञानब्रह्म शब्द जीवात्मा के लिए व्यवहृत होता है जबकि आनन्द ब्रह्म ही परब्रह्म भगवान् है

b)

आनन्द ब्रह्म शब्द जीवात्मा के लिए व्यवहृत होता है जबकि विज्ञानब्रह्म ही परब्रह्म भगवान् है

3.

वैदिक साहित्य से कहाँ पुष्टि होती है कि शरीर का ज्ञाता (आत्मा) न तो कभी उत्पन्न होता है, और न मरता है, परमात्मा मुख्य ज्ञाता है और प्रकृति के गुणों का स्वामी है व जीवात्माएँ सदा भगवान् की सेवा में लगी रहती हैं? (13.13)

a)

न जायते म्रियते वा विपश्चित् (कठोपनिषद् 1.2.18)

b)

प्रधान क्षेत्रज्ञपतिर्गुणेशः (श्वेताश्वतर उपनिषद 6.16)

c)

स्मृति वचन है – दासभूतो हरेरेव नान्यस्यैव कदाचन

4.

उनके हाथ, पाँव, आखें, सिर तथा मुँह तथा उनके कान सर्वत्र हैं - यह किसके लिए कहा गया है? (13.14)

a)

आत्मा (जीव)

b)

परमात्मा या भगवान्

5.

कौन सर्वव्यापक है? किसके हाथ, पाँव तथा नेत्र चारों दिशाओं में हैं? कौन अपना हाथ असीम दूरी तक फैला सकता है? (13.14)

a)

आत्मा (जीव)

b)

परमात्मा या भगवान्

6.

परमात्मा समस्त इन्द्रियों के मूल स्त्रोत हैं, फिर भी वे इन्द्रियों से रहित हैं - इसका क्या अर्थ है? (13.15)

a)

स्पष्ट है कि परमात्मा का कोई आकार नहीं है अर्थात वे निराकार हैं

b)

उनकी इन्द्रियाँ दिव्य होती हैं, उनके हाथ, पाँव, नेत्र तथा अन्य इन्द्रियाँ प्रकृति द्वारा कल्मषग्रस्त नहीं होतीं

7.

क्या प्रमाण है कि भगवान् के नेत्र, हाथ, पाँव इत्यादि होते हैं? (13.15)

a)

श्वेताश्वतर उपनिषद् (3.19) अपाणिपादो जवनोग्रहीता

b)

उनके हाथ होते तो वे अर्पित वस्तु ग्रहण नहीं करते?

c)

नेत्र होते तो वे भूत-वर्तमान-भविष्य नहीं देख लेते?

d)

उनके पाँव नहीं हैं, वे कहीं आ-जा नहीं सकते

8.

यदि मान लें कि भगवान् के हाथ, पाँव, सर, मुख होते हैं तो हमें क्यों नहीं दीखते? (13.15)

a)

जब हम दिव्य पद तक ऊपर उठ जाते हैं, तो हमें भगवान् के स्वरूप के दर्शन होते हैं

b)

कल्मषग्रस्त इन्द्रियों के कारण हम उनके स्वरूप को देख नहीं पाते

c)

निर्विशेषवादी भगवान् को नहीं समझ सकते, क्योंकि वे भौतिक दृष्टि से प्रभावित होते हैं

9.

परमसत्य में ऐसे क्या विरोधाभासी गुण हैं कि वे भौतिक इन्द्रियों के द्वारा जानने या देखने से परे हैं? (13.16)

a)

परम-पुरुष नारायण प्रत्येक जीव के बाहर तथा भीतर निवास करने वाले हैं

b)

वे भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों ही जगतों में विद्यमान रहते हैं

c)

यद्यपि वे बहुत दूर हैं, फिर भी वे हमारे निकट रहते हैं (कठोपनिषद् 1.2.21)

10.

जब वैदिक भाषा में भी कहा गया है कि भगवान् को समझने में हमारा भौतिक मन तथा इन्द्रियाँ असमर्थ हैं, तो उन्हें कैसे समझा जा सकता है? (13.16)

a)

भक्ति (कृष्णभावनामृत) के अभ्यास से अपने मन तथा इन्द्रियों को शुद्ध करने वाला ही उन्हें निरन्तर देख सकता है

b)

ब्रह्मसंहिता - परमेश्वर के लिए जिस भक्त में प्रेम उपज चुका है, वह निरन्तर उनका दर्शन कर सकता है

c)

भगवद्गीता (11.54) - उन्हें केवल भक्ति द्वारा देखा तथा समझा जा सकता है - भक्त्या त्वनन्यया शक्यः

11.

भगवान् सबों के हृदय में परमात्मा रूप में स्थित हैं, लेकिन वह कभी भी विभाजित नहीं है और एक रूप में स्थित है - यह समझाने के लिए वैदिक साहित्य में किसका उदाहरण दिया गया है? (13.17)

a)

जिस तरह अनेक पुरुषों को एक ही सूर्य की प्रतीति अनेक स्थानों में होती है

b)

जिस तरह खम्बे से टकराने पर एक वस्तु के कई सारे प्रतिरूप दिखाई देते हैं

12.

यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते येन जातानि जीवन्ति यत्प्रयन्त्यभिसंविशन्ति तद्ब्रह्म तद्विजिज्ञासस्व (तैत्तिरीय उपनिषद् 3.1) से किस सत्य की पुष्टि होती है? (13.17)

a)

भगवान् समस्त जीवों के मूल तथा सबके आश्रय-स्थल हैं

b)

सृष्टि के बाद सारी वस्तुएँ उनकी सर्वशक्तिमता पर टिकी रहती हैं

c)

प्रलय के बाद सारी वस्तुएँ पुनः उन्हीं में विश्राम पाने के लिए लौट आती हैं

13.

किस जगत् में हमें सूर्य, चन्द्र, बिजली आदि के प्रकाश की आवश्यकता पड़ती है? (13.18)

a)

वैकुण्ठ राज्य में क्योंकि वहाँ पर परमेश्वर का तेज कम पड़ता है

b)

भौतिक जगत् में क्योंकि यहां भगवान् का आध्यात्मिक तेज महत्तत्व अर्थात् भौतिक तत्त्वों से ढका रहता है

14.

वैदिक साहित्य विशेषकर श्वेताश्वतर उपनिषद् में परम भगवान् के विषय में क्या पुष्टि हुई है? (13.18)

a)

सूर्य की भाँति अत्यन्त तेजोमय हैं पर भौतिक अन्धकार से बहुत दूर हैं

b)

मुक्ति के इच्छुक मनुष्य को चाहिए कि वह भगवान् की शरण में जाय

c)

उन्हें जानने के बाद ही जन्म तथा मृत्यु की परिधि को लाँघा जा सकता है

d)

भगवान् समस्त जीवों का स्वामी या प्रभु है, अतएव सबका चरम लक्ष्य है

15.

ज्ञाता, ज्ञेय तथा जानने की विधि, ये तीनों मिलकर ________ कहलाते हैं | (13.19)

a)

विज्ञान

b)

ज्ञान

c)

अज्ञान

16.

13वें अध्याय के श्लोक 6 से 18 तक भगवान् ने किन विषयों का वर्णन किया है? (13.19)

a)

श्लोक 6 तथा 7 के महाभूतानि से लेकर चेतना धृतिः तक - शरीर तथा कार्यक्षेत्र

b)

श्लोक 8 से लेकर 12 तक अमानित्वम् से लेकर तत्त्वज्ञानार्थ-दर्शनम् तक - ज्ञान की विधि

c)

श्लोक 13 से 18 में अनादि मत्परम् से लेकर हृदि सर्वस्य विष्ठितम् तक - जीवात्मा तथा परमात्मा

17.

कौन भगवान् द्वारा बताये गए ज्ञान को पूरी तरह समझ सकते हैं और परमेश्वर कृष्ण के स्वभाव को प्राप्त कर सकते हैं? (13.19)

a)

केवल अनन्य भक्त

b)

जो भी गीता को मनमाने ढंग से पढ़ते हैं

c)

कृष्ण के रूप को भौतिक समझने वाले भी

d)

कृष्ण के वचनों पर संदेह करने वाले

e)

कृष्ण से द्वेष करने वाले

18.

इनमें से क्या नित्य नहीं है अर्थात सृष्टि के पहले से विद्यमान नहीं हैं? (13.20)

a)

प्रकृति से निर्मित, मनुष्य शरीर (क्रियाक्षेत्र)

b)

शरीर में बद्ध व उसके कार्यों को भोगने वाला, आत्मा

c)

भगवान् का साक्षात् अंश (स्वांश), परमात्मा

d)

परमेश्वर की शक्ति, प्रकृति

19.

परमेश्वर की सेवा करने से विमुख बद्धजीव के विषय में क्या सही नहीं है? (13.20)

a)

प्रकृति द्वारा आकृष्ट होने के कारण वे कठिन जीवन-संघर्ष कर रहे हैं

b)

इन्हें भौतिक जगत् में पुनः कर्म करने और वैकुण्ठ-लोक में प्रवेश करने की तैयारी करने का अवसर नहीं दिया जाता

c)

वह मूलतः परमेश्वर का अंश है, लेकिन अपने विद्रोही स्वभाव के कारण प्रकृति के भीतर बद्ध रहता है

20.

समस्त भौतिक कारणों तथा कार्यों (परिणामों) का कारण कौन है? (13.21)

a)

प्रकृति

b)

जीव (पुरुष)

21.

संसार में विविध सुख-दुख के भोग का कारण कौन है? (13.21)

a)

प्रकृति

b)

जीव (पुरुष)

22.

इनमें से क्या सही नहीं है? (13.21)

a)

जीव को अपनी पूर्व आकांक्षा तथा कर्म के अनुसार परिस्थितियों के वश वरदान या शाप मिलता है

b)

जीव प्रकृति द्वारा प्रदत्त स्थानों में जाने तथा मिलने वाले सुख-दुख का कारण स्वयं नहीं होता है

c)

भौतिक शरीर में जीव प्रकृति के वश में हो जाता है, चूंकि पदार्थ प्रकृति के नियम से कार्य करता है

23.

सही विकल्प चुनें - आध्यात्मिक जगत में व्यक्ति अपनी मूल अवस्था में बिना संदेह के आनन्दभोग करता है किन्तु भौतिक जगत् में वह विभिन्न प्रकार के शरीर-सुखों को प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष में रत रहता है | (13.21)

a)

दोनों वाक्यांश सही हैं

b)

दोनों वाक्यांश गलत हैं

c)

पहला वाक्यांश सही है पर दूसरा गलत है

d)

पहला वाक्यांश गलत है पर दूसरा सही है

24.

गलत वाक्य चुनें | (13.21)

a)

यह शरीर इन्द्रियों का कार्य है

b)

इन्द्रियाँ इच्छाओं की पूर्ति का साधन हैं

c)

यह शरीर तथा इन्द्रियाँ प्रकृति द्वारा प्रदत्त हैं

d)

जीव प्रकृति की सेवा करने भौतिक जगत् में आता है

25.

वेदों में (मुण्डक उपनिषद् 3.1.1) – द्वा सुर्पणा सयुजा सखायः के द्वारा भगवान् के जीव के प्रति विविध शरीरों की यात्रा में कैसे व्यवहार की पुष्टि करता है? (13.21)

a)

परमेश्वर जीव पर इतना कृपालु है कि वह सदा जीव के साथ रहता है और सभी परिस्थितियों में परमात्मा रूप में विद्यमान रहता है

b)

परमेश्वर जीव पर इतना कुपित रहता है कि वह स्वयं अपने धाम से बाहर भी नहीं निकलता और जीव को प्रताड़ित होने के लिए छोड़ देता है

26.

जीव का प्रकृति में ही जीवन बिताने का क्या कारण है? (13.22)

a)

प्रकृति के विभिन्न गुणों की संगति

b)

भगवान् की इच्छा

c)

भौतिक जीवन का अत्याकर्षक सुख

d)

आध्यात्मिक जगत के सुख से ऊबाहट

27.

किस प्रकार जीव भौतिक जगत की प्रतिकूल परिस्थितयों में फँसता रहता है और उसे निरन्तर देहान्तरण करना पड़ता है? (13.22)

a)

इस संसार के प्रति आसक्ति के कारण

b)

इस मिथ्या प्राकट्य पर मुग्ध रहने के कारण

c)

प्रकृति पर प्रभुत्व जताने की इच्छा के फलस्वरूप

d)

प्रमाणिक स्त्रोतों से ईश्वर-विज्ञान का श्रवण

28.

जब अनादि काल से जीव में भौतिक आकांक्षाएँ व्याप्त हैं, तो कैसे भौतिक चेतना में परिवर्तन के द्वारा आध्यात्मिक सुख और आनंदमय जीवन का आस्वादन सम्भव हो सकता है? (13.22)

a)

असंभव ! कम से कम मेरी चेतना को तो कोई नहीं बदल सकता, कृष्ण भी नहीं

b)

प्रमाणिक स्त्रोतों से श्रवण के द्वारा प्रकृति पर प्रभुत्व जताने की आकांक्षा समाप्त होगी

c)

उसी अनुपात में आध्यात्मिक सुख और आनन्दमय जीवन का आस्वादन होगा

29.

क्या आपको लगता है कि अनादिकाल से पाली हुई स्वामित्व की इच्छा कष्टकारी है? क्या आप अपनी सांसारिक चेतना में परिवर्तन चाहते हैं? यदि हाँ तो इसके लिए आपका पहला कदम क्या होगा?

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