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WorksheetsBhagavad Gita As It Is DAY-60 (16.21-24, 17.1-6)
Total questions: 23
Worksheet time: 2hrs 5mins
किन्हें भगवान् ने नरक के द्वार बताया है जिन्हें तुरंत त्याग देना चाहिए क्योंकि ये आत्मा का हनन इस हद तक कर देते हैं कि इस भवबन्धन से मुक्ति की सम्भावना नहीं रह जाती? (16.21)
काम
निर्धनता
क्रोध
कुरूपता
लोभ
तीनों नरक-द्वारों के लिए भगवान् ने क्या शब्द कहा है? (16.22)
सतोद्वार
रजोद्वार
तमोद्वार
गुरुद्वार
मानव-जीवन के तीन शत्रुओं – काम, क्रोध तथा लोभ – के परित्याग से क्या लाभ है? (16.22)
व्यक्ति जितना इनसे मुक्त होगा, उतना जीवन शुद्ध होगा
वैदिक साहित्य के विधि-विधानों का पालन कर सकता है
आत्म-साक्षात्कार के उच्चपद तक उठ सकता है
आत्म-साक्षात्कार की पूर्णता, भक्ति में मुक्ति निश्चित है
"मनमाने ढंग से कार्य करता है" - किन शब्दों से सूचित होता है? (16.23)
यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य
वर्तते कामकारतः
न स सिद्धिमवाप्नोति
न सुखं न परां गतिम्
मानव समाज के विभिन्न आश्रमों तथा वर्णों को किस प्रकार कार्य करने से सिद्धि, सुख तथा परमगति की प्राप्ति हो पाती है? (16.23)
काम, क्रोध और लोभवश स्वेच्छा से
शास्त्र के विधि-विधानों तथा नैतिक सिद्धान्तों का पालन
कैसा व्यक्ति स्वेच्छाचारी कहलाता है? (16.23)
जो व्यक्ति जान बूझ का नियमों का अतिक्रमण करता है, वह काम के वश में होकर कर्म करता है
जो जानता है कि ऐसा करना मना है, लेकिन फिर भी वह ऐसा करता है
यह जानते हुए भी कि अमुक काम करना चाहिए, फिर भी जो उसे नहीं करता है
भगवान् चैतन्य महाप्रभु ने शास्त्र विधि को अत्यन्त सरल बनाते हुए सभी को क्या करने के लिए कहा? (16.24)
केवल हरे कृष्ण महामन्त्र जपने
भगवान् की भक्ति में प्रवृत्त होने
अर्चविग्रह को अर्पित भोग का उच्चिष्ठ खाने
प्रति माह 15 लाख रुपये दान देने
अपने मनगढंत सिद्धांत बनाने
किन दोषों के कारण बद्धजीव विधि-विधान बनाने के लिए अयोग्य होता है? (16.24)
अपूर्ण इन्द्रियाँ
कपटता
त्रुटि करना
अल्प आयु
मोहग्रस्त होना
वेदों के नियमों के अनुसार अपना जीवन बिताने वाले आध्यात्मिक विद्या के दल कौन से हैं? (16.24)
निराकारवादी
साकारवादी
शून्यवादी
उग्रवादी
आतंकवादी
रजो तथा तमोगुणी व्यक्ति को किन दोषों के कारण आसुरी जीवन बिताना पड़ता है? (16.24)
भगवान् के ज्ञान की खिल्ली उड़ाते हैं
गुरु के आदेशों का उल्लंघन करते हैं
भक्ति की महिमा सुनकर भी आकृष्ट नहीं होते
अपनी उन्नति का अपना निजी मार्ग बनाते हैं
वेदों के नियमों के अनुसार अपना जीवन बिताते हैं
शास्त्र के नियमों का पालन करना किसे कहा जाता है? (16.24)
करणीय तथा अकरणीय कर्म का निर्णय वेदों से करे
तर्क किये बिना तदनुसार कर्म करना चाहिए
इच्छित परिवर्तन के बाद ही स्वीकार करे
भागवतविद्या के नियमों के प्रति द्वेष रखे
इसके पूर्व कि भगवान् के ज्ञान का मार्ग खुले, मनुष्य को कम से कम __________ तक ऊपर उठना होता है । (16.24)
सतोगुण
रजोगुण
तमोगुण
विशुद्ध सत्वगुण
अर्जुन किन लोगों की सतोगुणी, रजोगुणी या तमोगुणी स्थिति के बारे में प्रश्न करता है? (17.1)
जो शास्त्रों के विधि-विधानों का पालन नहीं करते
जो लोग शास्त्रों के विधि-विधानों का पालन करते हैं
जो ऐसे नियमों का पालते हैं, जो शास्त्रों में नहीं
जो अपनी कल्पना के अनुसार पूजा करते हैं
जो देवी, देवताओं तथा मनुष्यों की पूजा करते हैं
कैसे संग में जीव अपनी मनोवृत्ति बदलकर अपनी स्थिति तमोगुण से सतोगुण या रजोगुण से सतोगुण में परिवर्तित कर उच्चतर गुण की स्थिति को प्राप्त कर सकता है? (17.2)
प्रकृति के संसर्ग में
प्रामाणिक गुरु की संगति
किसी गुण विशेष में अंध विश्वास करने से
जो लोग शास्त्रों के विधि-विधानों को जानते हैं, वे फिर भी उनका पालन क्यों नहीं करते? (17.2)
आलस्यवश
कार्यविमुखतावश
प्रकृति के गुणों द्वारा शासित होकर
बुद्धिपूर्वक
भौतिक प्रकृति के संसर्ग में अपने अपने अस्तित्व के अनुसार मनुष्य किन-किन विशेष प्रकार की श्रद्धा विकसित करता है? (17.3)
उत्तम (सतोगुणी)
राजस (रजोगुणी)
तामसी
आध्यात्मिक (दिव्य)
श्रद्धा मूलतः ________ से उत्पन्न होती है । (17.3)
सतोगुण
रजोगुण
तमोगुण
विभिन्न प्रकार के धर्म, पूजा पद्धतियां और धार्मिक सिद्धांत किसके अनुसार होते हैं? (17.3)
विभिन्न प्रकार की श्रद्धाओं के अनुसार
हृदय की कलुषितता के कारण
भिन्न आर्थिक स्थितियों के अनुसार
भिन्न त्वचा के रंग के अनुसार
सही वाक्य चुनिए | (17.4)
शास्त्रों के आदेशानुसार केवल भगवान् ही पूजनीय हैं
सतोगुणी सामान्यतया प्रेतों की पूजा करते हैं
रजोगुणी देवताओं की पूजा करते हैं
तमोगुणी यक्ष-राक्षसों की पूजा करते हैं
इनमें से कौन सी पूजा तमोगुणी मानी जाती हैं? (17.4)
मृत प्राणी की कब्र पर पूजा
मैथुन सेवा
भूत वाले वृक्ष की पूजा और बलि
पंचदेवताओं की पूजा
सतोगुण में स्थित माने जाने वाले निर्विशेषवादियों के विषय में क्या सही है? (17.4)
वे पंचदेवताओं की पूजा करते हैं, लेकिन वे निराकार ब्रह्म को ही वास्तविक सत्य मानते हैं
वे भौतिक जगत में निराकार विष्णु को पूजते हैं, जो सिद्धान्तीकृत विष्णु कहलाता है
वे अन्ततः समस्त पूज्य वस्तुओं को त्याग देते हैं, अतः इन्हें भक्तों की संगति से शुद्ध किया जा सकता है
आसुरी तपस्या और व्रत के क्या लक्षण हैं? (17.5-6)
दम्भ तथा अहंकार से मुक्त होकर शास्त्रानुसार
आध्यात्मिक उन्नति के लिए
शरीर के भीतर परमात्मा को भी कष्ट पहुँचता है
किसी स्वार्थ से, यथा राजनीतिक कारणों से
नरक के तीनों द्वारों में से आप स्वयं को किसके सबसे नजदीक पाते हैं? इससे बचने का क्या उपाय करने वाले हैं?
